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पंचकूला: गर्व है शहीद डीएसपी कर्म सिंह का बेटा हूं...जो चीनी सैनिकों से बहादुरी से लड़े

Thu, 22 Oct 2020 05:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 22 Oct 2020 05:34 PM IST
सार

  • पहला पुलिस मेडल पाने वाले महान शूरवीर कर्म सिंह को बेटे ने दी श्रद्धांजलि
  • रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हरचरण सिंह अपने पिता को याद करते हुए भावुक
  • पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिया था देश का पहला पुलिस मेडल

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Retired Lieutenant General Harcharan Singh share memories of his father
शूरवीर डीएसपी कर्म सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड हरचरण सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

मुझे गर्व है कि मैं भारत माता के उस महान शूरवीर डीएसपी कर्म सिंह का बेटा हूं, जिन्होंने उत्तरी पूर्वी लद्दाख में अवैध चीनी सड़क निर्माण की सूचना सबसे पहले दी थी। उस टुकड़ी का नेतृत्व किया था, जिसने कम संख्या होते हुए भी चीनी सेना का डटकर मुकाबला किया। इसमें 10 पुलिस कर्मचारी शहीद हुए थे। इसी शूरवीरता के सम्मान में डीएसपी कर्म सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देश का पहला पुलिस मेडल देकर सम्मानित किया था।’  

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राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल दिवस के अवसर पर कर्म सिंह के बेटे एवं विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हरचरण सिंह ने ऑनलाइन श्रद्धांजलि कार्यक्रम में यह बात कही। कार्यक्रम श्री मथुरा दास सुभाष हितैषी फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था। 
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पंचकूला के सेक्टर 2 में रहने वाले हरचरण सिंह ने बताया कि उनके पिता कर्म सिंह का जन्म 1 अगस्त 1909 को गुजरांवाला पाकिस्तान में हुआ था। वह पुलिस में भर्ती हुए। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद वह विभिन्न पदों पर आसीन रहे और 1957 में पुलिस में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस पर पदोन्नति मिली। 

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1959 में चीनी सैनिकों ने किया था हमला 

हरचरण सिंह ने बताया कि 1959 में तिब्बत के साथ भारत की 2500 मील लंबी सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी भारत के पुलिसकर्मियों की थी। तीसरी बटालियन की एक कंपनी को उत्तर पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स एरिया में तैनात किया गया। 20 अक्तूबर को गश्त पर निकली तीसरी टुकड़ी के सदस्य वापस नहीं आए। 

इन गुमशुदा पुलिसकर्मियों की तलाश में डीसीआईओ कर्म सिंह की अगुवाई में 20 पुलिसकर्मी 21 अक्तूबर 1959 के दिन सीमा के लिए निकले। दोपहर के समय चीनी सैनिकों ने गोलियां दागनी शुरू कर दीं। कई पुलिस कर्मचारी घायल हो गए। 10 वीर पुलिस कर्मचारी शहीद हो गए जबकि सात बुरी तरह से घायल हो गए थे। कर्म सिंह सहित सातों घायल पुलिस कर्मियों को चीनी सैनिक बंधक बनाकर ले गए और बाद में 13 नवंबर को चीन ने 10 शहीदों के पार्थिव शरीर व 7 बंदी पुलिस कर्मियों को लौटा दिया। 

शहीदों की याद में मनाते हैं पुलिस मेमोरियल दिवस
10 शहीद पुलिसकर्मी जिन्होंने चीनी सैनिकों से मुकाबला किया उनकी याद में हर साल पुलिस मेमोरियल दिवस मनाया जाता है और 2 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस कर्मियों के सम्मान में नई दिल्ली में बने नेशनल पुलिस स्मारक को देश को समर्पित किया था। 

एसटीएफ में तैनात दीपक धामा ने शहीदों को कुछ यूं याद किया- बस नफा ही तोले दुनिया, मुझे क्या जाने कितने घाटे हैं, मैंने छीन के अपने बच्चों से औरों को बचपन बांटे हैं। होली-दिवाली बस मैं खुद ही, खुद ही हूं ईद-बैशाखी। साधारण कोई वस्त्र नहीं मैं वर्दी हूं खाकी।

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