{"_id":"67105cd4722055c3dc0f5816","slug":"resident-doctors-in-pgi-postponed-the-strike-employees-still-adamant-chandigarh-news-c-16-pkl1049-542006-2024-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की स्थगित, कर्मचारी अब भी जिद पर अड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की स्थगित, कर्मचारी अब भी जिद पर अड़े
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीजीआई में सात दिन से हॉस्पिटल अटेंडेंट, किचन स्टाफ, सफाई कर्मी व ऑफिस बियरर की हड़ताल से व्यवस्था चरमरा गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को हड़ताल पर रोक लगा दी और अनुबंधकर्मियों को तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया। साथ ही यूटी प्रशासन व पीजीआई प्रबंधन को आदेश दिया कि जो कर्मचारी काम पर न लाैटें, उन पर कार्रवाई की जाए।
पीजीआई चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि पीजीआई अटेंडेंट कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने 16 सितंबर को उन्हें नोटिस दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के फरवरी 2020 में जारी आदेश के अनुसार अनुबंधकर्मियों को नियमित कर्मियों के समान वेतन दिया जाए। साथ ही इस वेतन का एरियर जारी किया जाए और इसमें से कोई कटौती न की जाए।
नोटिस में कहा गया था कि यदि एरियर के साथ यह राशि 10 अक्तूबर तक जारी नहीं की गई तो हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हड़ताल शुरू होने के बाद पीजीआई की अन्य यूनियनों ने भी उन्हें अपना समर्थन दे दिया और काम छोड़ दिया। पीजीआई की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने बीते 9 अगस्त को पीजीआई की कर्मचारी यूनियनों के हड़ताल के आदेश पर रोक लगाया था, बावजूद इसके यह हड़ताल की जा रही है।
विज्ञापन
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल अनिवार्य क्षेत्र है और उसके कर्मचारी सेवा विवाद के चलते काम से गैरमौजूद नहीं रह सकते। इससे पीजीआई की स्वच्छता और सफाई व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। पीजीआई उत्तर क्षेत्र का बेहतरीन संस्थान है और इस हड़ताल से उसकी बदनामी हो रही है। 1947 के अनिवार्य सेवा एक्ट के तहत कर्मचारियों की हड़ताल पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण दिखाई नहीं देता कि पीजीआई और यूटी प्रशासन काम पर न लौटने वालों पर कार्रवाई न करें। ऐसे में हाईकोर्ट ने कर्मियों को काम पर लौटने का आदेश दिया। साथ ही कर्मचारी यूनियनों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
राहत : पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल स्थगित
सबहेड
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब वीरवार को अनुबंधकर्मियों के भी काम पर लाैटने की उम्मीद
अनुबंधकर्मी लाैटे तो ओपीडी में नए मरीजों को आज से मिलने लगेगा इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से की गई हड़ताल बुधवार को स्थगित कर दी गई। सूचना के बाद से रेजिडेंट डॉक्टर ओपीडी में पहुंच गए और फॉलोअप मरीजों का इलाज किया। राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संगठनों से वार्ता के बाद एसोसिएशन ने हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे पीजीआई प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि रेजिडेंट डॉक्टर की हड़ताल से ओपीडी में फॉलोअप मरीजों का भी इलाज प्रभावित होने लगा था।
उधर, अनुबंधकर्मियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। इससे सिर्फ फॉलोअप मरीजों को ही इलाज मिल पाया। नए मरीज सातवें दिन भी निराश होकर लौटे। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, वीरवार को भी ओपीडी में सिर्फ फॉलोअप मरीज ही देखे जाएंगे। इसके लिए सुबह 8 से 10 बजे तक पंजीकरण होगा। पंजीकरण की संख्या भी सीमित रहेगी। ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट भी रद्द रहेंगे। वैकल्पिक प्रवेश और सर्जरी भी स्थगित कर दी गईं हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुबंध कर्मचारियों के भी वीरवार से काम पर लौटने की उम्मीद है, अगर अनुबंधकर्मी काम पर लाैट आए तो स्थिति को देखते हुए पुरानी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
चिकित्सा अधीक्षक ने भी वाइपर लेकर की सफाई
इमरजेंसी ट्रॉमा समेत अन्य विभागों में गंदगी को देखते हुए बुधवार को पीजीआई में अफसरों ने भी कमान संभाल ली। पीजीआई की नर्सिंग इंस्टीट्यूट की एनएसएस छात्राओं के साथ पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल, प्रो. नवीन पांडे भी हाथों में ग्लव्स पहनकर वाइपर चलाते दिखे। प्रो. विपिन कौशल ने तो शौचालय तक साफ किया। उन्होंने कहा कि अपने संस्थान के लिए किसी भी तरह का कार्य करने में उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं। ऐसे में संकट की घड़ी में सबको एक दूसरे का हाथ थामकर स्थिति को संभालने के लिए आगे आना होगा। विभिन्न संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने भी झाड़ू और वाइपर लेकर सफाई की।
बॉक्स
जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी के तीनों फ्लोर फुल
पीजीआई में सात दिनों से चल रही हड़ताल के कारण रेफर मरीजों को न भेजने की अपील के बाद जीएमसीएच-32 ने मरीजों को पीजीआई भेजना बंद कर दिया है। ऐसी स्थिति में जीएमसीएच-32 में हमेशा फर्स्ट फ्लोर तक फुल रहने वाली इमरजेंसी के तीनों फ्लोर मरीजों से भर गए हैं। डॉक्टर और कर्मचारियों को कहना है कि बेहद गंभीर मरीजों को भी पीजीआई रेफर न कर पाने के कारण स्थिति बेहद जटिल हो गई है। जीएमसीएच-32 प्रशासन का कहना है कि पीजीआई की अपील के बाद से उनका प्रयास है कि वह मरीजों को अगला आदेश तक रेफर न करें ताकि पीजीआई में भर्ती मरीजों का इलाज सुचारु रूप से चल सके।
बॉक्स
नो वर्क नो पे से बढ़ी कर्मचारियों की चिंता
हड़ताल कर रहे कर्मचारी पीजीआई प्रशासन की ओर से लागू नो वर्क नो पे नियम के निर्देश के बाद बेहद तनाव में दिखे। सुबह से ही कर्मचारी यूनियन नेता से हड़ताल के दौरान पैसे काटे जाने की बात को लेकर बातें करते नजर आए। ज्यादातर कर्मचारियों ने तो काम पर लौटने का मन भी बना लिया था लेकिन हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद निर्णय लेने की बात पर वे रुक गए।
बीते दो दिन में किस विभाग में कितने मरीजों को मिला इलाज
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विभाग
15 अक्तूबर 16 अक्तूबर
ओपीडी
4852
5442
इमरजेंसी ओपीडी
148
160
ट्रामा ओपीडी
22
14
कैथ लैब
12
16
डिलिवरी
5
5
डे केयर कीमोथेरेपी
152
140
आपातकालीन
314
309
एडवांस ट्रॉमा सेंटर
227
227
विज्ञापन
पीजीआई चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि पीजीआई अटेंडेंट कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने 16 सितंबर को उन्हें नोटिस दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के फरवरी 2020 में जारी आदेश के अनुसार अनुबंधकर्मियों को नियमित कर्मियों के समान वेतन दिया जाए। साथ ही इस वेतन का एरियर जारी किया जाए और इसमें से कोई कटौती न की जाए।
विज्ञापन
नोटिस में कहा गया था कि यदि एरियर के साथ यह राशि 10 अक्तूबर तक जारी नहीं की गई तो हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हड़ताल शुरू होने के बाद पीजीआई की अन्य यूनियनों ने भी उन्हें अपना समर्थन दे दिया और काम छोड़ दिया। पीजीआई की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने बीते 9 अगस्त को पीजीआई की कर्मचारी यूनियनों के हड़ताल के आदेश पर रोक लगाया था, बावजूद इसके यह हड़ताल की जा रही है।
विज्ञापन
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल अनिवार्य क्षेत्र है और उसके कर्मचारी सेवा विवाद के चलते काम से गैरमौजूद नहीं रह सकते। इससे पीजीआई की स्वच्छता और सफाई व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। पीजीआई उत्तर क्षेत्र का बेहतरीन संस्थान है और इस हड़ताल से उसकी बदनामी हो रही है। 1947 के अनिवार्य सेवा एक्ट के तहत कर्मचारियों की हड़ताल पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण दिखाई नहीं देता कि पीजीआई और यूटी प्रशासन काम पर न लौटने वालों पर कार्रवाई न करें। ऐसे में हाईकोर्ट ने कर्मियों को काम पर लौटने का आदेश दिया। साथ ही कर्मचारी यूनियनों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
राहत : पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल स्थगित
सबहेड
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब वीरवार को अनुबंधकर्मियों के भी काम पर लाैटने की उम्मीद
अनुबंधकर्मी लाैटे तो ओपीडी में नए मरीजों को आज से मिलने लगेगा इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से की गई हड़ताल बुधवार को स्थगित कर दी गई। सूचना के बाद से रेजिडेंट डॉक्टर ओपीडी में पहुंच गए और फॉलोअप मरीजों का इलाज किया। राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संगठनों से वार्ता के बाद एसोसिएशन ने हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे पीजीआई प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि रेजिडेंट डॉक्टर की हड़ताल से ओपीडी में फॉलोअप मरीजों का भी इलाज प्रभावित होने लगा था।
उधर, अनुबंधकर्मियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। इससे सिर्फ फॉलोअप मरीजों को ही इलाज मिल पाया। नए मरीज सातवें दिन भी निराश होकर लौटे। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, वीरवार को भी ओपीडी में सिर्फ फॉलोअप मरीज ही देखे जाएंगे। इसके लिए सुबह 8 से 10 बजे तक पंजीकरण होगा। पंजीकरण की संख्या भी सीमित रहेगी। ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट भी रद्द रहेंगे। वैकल्पिक प्रवेश और सर्जरी भी स्थगित कर दी गईं हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुबंध कर्मचारियों के भी वीरवार से काम पर लौटने की उम्मीद है, अगर अनुबंधकर्मी काम पर लाैट आए तो स्थिति को देखते हुए पुरानी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
चिकित्सा अधीक्षक ने भी वाइपर लेकर की सफाई
इमरजेंसी ट्रॉमा समेत अन्य विभागों में गंदगी को देखते हुए बुधवार को पीजीआई में अफसरों ने भी कमान संभाल ली। पीजीआई की नर्सिंग इंस्टीट्यूट की एनएसएस छात्राओं के साथ पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल, प्रो. नवीन पांडे भी हाथों में ग्लव्स पहनकर वाइपर चलाते दिखे। प्रो. विपिन कौशल ने तो शौचालय तक साफ किया। उन्होंने कहा कि अपने संस्थान के लिए किसी भी तरह का कार्य करने में उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं। ऐसे में संकट की घड़ी में सबको एक दूसरे का हाथ थामकर स्थिति को संभालने के लिए आगे आना होगा। विभिन्न संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने भी झाड़ू और वाइपर लेकर सफाई की।
बॉक्स
जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी के तीनों फ्लोर फुल
पीजीआई में सात दिनों से चल रही हड़ताल के कारण रेफर मरीजों को न भेजने की अपील के बाद जीएमसीएच-32 ने मरीजों को पीजीआई भेजना बंद कर दिया है। ऐसी स्थिति में जीएमसीएच-32 में हमेशा फर्स्ट फ्लोर तक फुल रहने वाली इमरजेंसी के तीनों फ्लोर मरीजों से भर गए हैं। डॉक्टर और कर्मचारियों को कहना है कि बेहद गंभीर मरीजों को भी पीजीआई रेफर न कर पाने के कारण स्थिति बेहद जटिल हो गई है। जीएमसीएच-32 प्रशासन का कहना है कि पीजीआई की अपील के बाद से उनका प्रयास है कि वह मरीजों को अगला आदेश तक रेफर न करें ताकि पीजीआई में भर्ती मरीजों का इलाज सुचारु रूप से चल सके।
बॉक्स
नो वर्क नो पे से बढ़ी कर्मचारियों की चिंता
हड़ताल कर रहे कर्मचारी पीजीआई प्रशासन की ओर से लागू नो वर्क नो पे नियम के निर्देश के बाद बेहद तनाव में दिखे। सुबह से ही कर्मचारी यूनियन नेता से हड़ताल के दौरान पैसे काटे जाने की बात को लेकर बातें करते नजर आए। ज्यादातर कर्मचारियों ने तो काम पर लौटने का मन भी बना लिया था लेकिन हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद निर्णय लेने की बात पर वे रुक गए।
बीते दो दिन में किस विभाग में कितने मरीजों को मिला इलाज
विभाग
15 अक्तूबर 16 अक्तूबर
ओपीडी
4852
5442
इमरजेंसी ओपीडी
148
160
ट्रामा ओपीडी
22
14
कैथ लैब
12
16
डिलिवरी
5
5
डे केयर कीमोथेरेपी
152
140
आपातकालीन
314
309
एडवांस ट्रॉमा सेंटर
227
227