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Chandigarh News: चंडीगढ़ रॉयल सिटी मामले में बिल्डरों को राहत, हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

Fri, 02 Oct 2026 02:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:51 AM IST
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Relief for builders in Chandigarh Royal City case; High Court grants interim bail
चंडीगढ़। पंजाब के बनूड़ के पास स्थित चंडीगढ़ रॉयल सिटी परियोजना से जुड़े मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बिल्डरों को राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि यदि निवेशकों से प्राप्त राशि परियोजना के लिए जमा की गई थी और बिल्डर के अनुसार गमाडा ने अपना काम शुरू नहीं किया तो इस रकम को अपराध से अर्जित आय कैसे माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने बिल्डरों को 16 नवंबर 2026 तक अंतरिम जमानत दी है। उन्हें संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड भरने होंगे।
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निवेशकों की रकम बढ़कर 47.89 करोड़ रुपये हुई
मामला चंडीगढ़ रॉयल सिटी परियोजना में निवेश करने वाले लोगों की रकम से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, निवेशकों ने प्लॉट और घर खरीदने के लिए करीब 14.86 करोड़ रुपये जमा कराए थे। ब्याज सहित यह रकम बढ़कर 47.89 करोड़ रुपये हो गई। आरोप है कि यह राशि गमाडा को नहीं दी गई और कंपनी के खातों में जमा रही। बिल्डर की ओर से दावा किया गया है कि उसने अपनी तरफ से निर्धारित शर्तों का पालन किया, लेकिन गमाडा ने परियोजना से संबंधित काम शुरू नहीं किया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि रकम परियोजना के लिए प्राप्त हुई थी, तो इसे अपराध की कमाई मानने का आधार क्या है। अदालत के समक्ष यह भी विचारणीय है कि धनशोधन के आरोपों के लिए अपराध से अर्जित आय की पहचान किस तरह की गई।
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चेक बाउंस मामले और एफआईआर पर भी सवाल
मामले में गमाडा की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी और पहले हुई चेक बाउंस की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गमाडा ने पहले चेक बाउंस के संबंध में मुकदमा दायर किया था, जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा। हाईकोर्ट अब इस पहलू पर भी विचार कर रहा है कि क्या उसी विवाद को दोबारा प्राथमिकी का आधार बनाकर ईडी की जांच आगे बढ़ाना उचित है। अदालत के सवालों का संबंध प्राथमिकी के कानूनी आधार और धनशोधन के आरोपों से है। हालांकि, अंतरिम जमानत को आरोपों से अंतिम मुक्ति नहीं माना जा सकता। मामले में अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है। अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी, जिसमें जांच की वैधता और संबंधित पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों की रकम, गमाडा की भूमिका और ईडी की कार्रवाई के आधार पर आगे की सुनवाई में चर्चा होगी।
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