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ऐतिहासिक पुस्तक का विमोचन: श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के गंगा सागर का दस्तावेजी वर्णन
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कंवरपाल
हलवारा। आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने के बाद रायकोट पहुंचे श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने तत्कालीन नवाब राय कल्ला और उनके परिवार की निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए उन्हें पवित्र गंगा सागर, खंडा और रिहाल भेंट किए थे। इस ऐतिहासिक उपहार और सेवा से जुड़ी उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक दशमेश पिता बख्शीश: पवित्र गंगा सागर – सच्ची सेवा संभाल का विमोचन 2 जनवरी को रायकोट जोड़ मेले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी करेंगे।
पुस्तक लेखक और इतिहासकार प्रो. गुरदेव सिंह सिद्धू ने लिखी है और इसमें गुरु जी के रायकोट आगमन, राय कल्ला परिवार की अतुलनीय सेवा, और 17वीं शताब्दी के पवित्र गंगा सागर के आध्यात्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत वर्णन है। प्रस्तावना प्रो. गुरभजन गिल ने लिखी है। वर्तमान में राय कल्ला के उत्तराधिकारी राय अजीज उल्लाह खान और उनके पुत्र राय मोहम्मद अली इसे श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित रख रहे हैं।
राय अजीज उल्लाह खान और उनके पुत्र ने पुस्तक तैयार करने में योगदान देने वाले प्रो. गुरदेव सिंह सिद्धू, प्रो. गुरभजन गिल और पंजाबी लोक विरासत अकादमी का आभार व्यक्त किया। रायकोट जोड़ मेले में दोनों ने सिख समुदाय को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया।
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इस पुस्तक का उद्देश्य श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा व्यक्त किए गए साहस, सेवा, धर्मनिरपेक्ष सद्भाव और न्याय के मूल्यों को जीवित रखना है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सदस्य जत्थेदार जगजीत सिंह तलवंडी, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अमनदीप सिंह गिल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने राय अजीज उल्लाह खान का आभार जताया। पंजाबी लोक विरासत अकादमी के अध्यक्ष प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने पंजाब सरकार और स्थानीय सांसद से अपील की है कि राय कल्ला की निस्वार्थ सेवा को यादगार बनाने के लिए रायकोट में पुस्तकालय जैसी स्मृति स्थली स्थापित की जाए।
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हलवारा। आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने के बाद रायकोट पहुंचे श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने तत्कालीन नवाब राय कल्ला और उनके परिवार की निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए उन्हें पवित्र गंगा सागर, खंडा और रिहाल भेंट किए थे। इस ऐतिहासिक उपहार और सेवा से जुड़ी उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक दशमेश पिता बख्शीश: पवित्र गंगा सागर – सच्ची सेवा संभाल का विमोचन 2 जनवरी को रायकोट जोड़ मेले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी करेंगे।
पुस्तक लेखक और इतिहासकार प्रो. गुरदेव सिंह सिद्धू ने लिखी है और इसमें गुरु जी के रायकोट आगमन, राय कल्ला परिवार की अतुलनीय सेवा, और 17वीं शताब्दी के पवित्र गंगा सागर के आध्यात्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत वर्णन है। प्रस्तावना प्रो. गुरभजन गिल ने लिखी है। वर्तमान में राय कल्ला के उत्तराधिकारी राय अजीज उल्लाह खान और उनके पुत्र राय मोहम्मद अली इसे श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ संरक्षित रख रहे हैं।
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राय अजीज उल्लाह खान और उनके पुत्र ने पुस्तक तैयार करने में योगदान देने वाले प्रो. गुरदेव सिंह सिद्धू, प्रो. गुरभजन गिल और पंजाबी लोक विरासत अकादमी का आभार व्यक्त किया। रायकोट जोड़ मेले में दोनों ने सिख समुदाय को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया।
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इस पुस्तक का उद्देश्य श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा व्यक्त किए गए साहस, सेवा, धर्मनिरपेक्ष सद्भाव और न्याय के मूल्यों को जीवित रखना है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सदस्य जत्थेदार जगजीत सिंह तलवंडी, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अमनदीप सिंह गिल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने राय अजीज उल्लाह खान का आभार जताया। पंजाबी लोक विरासत अकादमी के अध्यक्ष प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने पंजाब सरकार और स्थानीय सांसद से अपील की है कि राय कल्ला की निस्वार्थ सेवा को यादगार बनाने के लिए रायकोट में पुस्तकालय जैसी स्मृति स्थली स्थापित की जाए।