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समान स्थिति वाले एक कर्मी को नियमित करना, दूसरे को न करना समानता के अधिकार का उल्लंघन: हाईकोर्ट

Thu, 19 Sep 2024 06:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 06:40 AM IST
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Regularizing one employee with similar status and not regularizing another is a violation of the right to equality: High Court
-कर्मचारी की सेवा 2003 से नियमित करने का आदेश देते हुए हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि अन्य कर्मचारियों को समान लाभ देने के बावजूद किसी कर्मचारी की सेवा को नियमित न करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन होगा।

गुरुग्राम निवासी राजेश कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि 1995 में पीडब्ल्यूडी में माली व चौकीदार के रूप में नियुक्त हुआ था। 1997 में बर्खास्त कर दिया गया था। 2001 में श्रम न्यायालय ने उसे बहाल करने का आदेश देते हुए बर्खास्तगी की अवधि के लिए वेतन जारी करने का भी आदेश दिया। सरकार ने आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और हाईकोर्ट ने वेतन वसूली पर रोक लगा दी थी, लेकिन बहाली का आदेश जारी रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने एक अप्रैल 1997 से तीन फरवरी 2004 तक काम नहीं किया है, इसलिए वह बकाया वेतन के 25 प्रतिशत का हकदार है। हाईकोर्ट को बताया गया था कि सरकार ने 2003 में अधिसूचना जारी कर 30 सितंबर 2003 को तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके तदर्भ/अनुबंध/दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया था। भले ही छह महीने का सेवा में ब्रेक रहा हो। अधिसूचना में कहा गया कि यदि ऐसा ब्रेक कर्मचारी के कारण नहीं है, तो 31 जनवरी 1996 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, बशर्ते वे अन्य शर्तें पूरी करते हों। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि समान स्थिति वाले कर्मचारियों को नियमित किया गया और पात्रता मानदंड पूरा करने के बावजूद याचिकाकर्ता को समान लाभ नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने माना कि याची की सेवा को नियमित करना सरकारी नीति के अंतर्गत आता है। हाईकोर्ट ने कहा कि कुमार के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और याचिकाकर्ता की सेवा को एक अक्टूबर 2003 से नियमित करने का निर्देश दिया है। साथ ही तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता को सभी लाभ जारी करने का सरकार को आदेश दिया।
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