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Chandigarh News: शिक्षा सत्र के बीच में सेवानिवृत्त होने वाले नियमित और अतिथि अध्यापकों को दोबारा दी जाएगी नौकरी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के स्कूलों में शिक्षा सत्र के बीच में सेवानिवृत्त होने वाले नियमित और अतिथि अध्यापकों को अब हरियाणा सरकार दोबारा से नौकरी पर रखेगी। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। संबंधित अध्यापक को सत्र पूरा होने तक 31 मार्च तक अपनी सेवाएं देनी होंगी। इसके बदले सरकार 2016 के नियमों के तहत री-इम्पलाइमेंट के तहत वेतन देगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने आदेश जारी किए हैं।
हरियाणा में अप्रैल से मार्च तक शिक्षा सत्र होता है। इससे पहले, बीच में सेवानिवृत्त होने पर विद्यार्थियों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ता था और उनको बिना अध्यापक के ही काम चलाना पड़ता था। हरियाणा सरकार ने मामला संज्ञान में आने के बाद यह फैसला लिया है। सत्र के बीच में सेवानिवृत्ति को लेकर हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन ने आपत्ति जताई थी। साथ ही अपने सुझाव भी दिए थे। इस बारे में हसला के राज्य प्रधान सतपाल संधू का कहना है कि सत्र के बीच में बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव पड़ता था, ये नियम बनने से बच्चों पूरा सत्र अध्यापक मिल सकेंगे। सरकार का यह सराहनीय कदम है। इसके अलावा, खाली पदों को भरने के लिए भी सरकार गंभीरता दिखाए।
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चंडीगढ़। हरियाणा के स्कूलों में शिक्षा सत्र के बीच में सेवानिवृत्त होने वाले नियमित और अतिथि अध्यापकों को अब हरियाणा सरकार दोबारा से नौकरी पर रखेगी। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। संबंधित अध्यापक को सत्र पूरा होने तक 31 मार्च तक अपनी सेवाएं देनी होंगी। इसके बदले सरकार 2016 के नियमों के तहत री-इम्पलाइमेंट के तहत वेतन देगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने आदेश जारी किए हैं।
हरियाणा में अप्रैल से मार्च तक शिक्षा सत्र होता है। इससे पहले, बीच में सेवानिवृत्त होने पर विद्यार्थियों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ता था और उनको बिना अध्यापक के ही काम चलाना पड़ता था। हरियाणा सरकार ने मामला संज्ञान में आने के बाद यह फैसला लिया है। सत्र के बीच में सेवानिवृत्ति को लेकर हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन ने आपत्ति जताई थी। साथ ही अपने सुझाव भी दिए थे। इस बारे में हसला के राज्य प्रधान सतपाल संधू का कहना है कि सत्र के बीच में बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव पड़ता था, ये नियम बनने से बच्चों पूरा सत्र अध्यापक मिल सकेंगे। सरकार का यह सराहनीय कदम है। इसके अलावा, खाली पदों को भरने के लिए भी सरकार गंभीरता दिखाए।
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