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Chandigarh News: 42 अभ्यर्थियों का रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं, पूर्व की नियुक्ति भी जांच के दायरे में
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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में नर्सिंग ऑफिसर्स की नियुक्ति मामले में 42 चयनित अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट का ऑनलाइन रिकार्ड उपलब्ध न होने से पूर्व की चयन प्रक्रिया पर भी जांच की सुई घूमने लगी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने मौजूदा नियुक्तियों के साथ ही पूर्व की नियुक्तियों की रिपोर्ट भी तलब की है। इस संबंध में नियुक्ति करने वाली कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वे इससे पूर्व की तीन नियुक्तियों का भी ब्यौरा शीघ्र उपलब्ध कराएं जिससे यह साफ हो सके कि इस बार जिस तरह की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है, वैसा कहीं पहले की नियुक्तियों में भी तो नहीं रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो एक बड़े पैमाने पर धांधली का पर्दाफाश होगा।
बता दें कि अमर उजाला ने 6 मई के अंक में नर्सिंग ऑफिसर बनना है...डियर 6000 लगेंगे, पेपर भी हम दे देंगे शीर्षक के साथ फर्जी कंप्यूटर सर्टिफिकेट के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मामले में दोबारा जांच कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। दोबारा गठित कमेटी ने चयनित अभ्यर्थियों के सभी रिकार्ड पुन: जांचने शुरू किए हैं। इसी क्रम में 42 नर्सिंग अफसरों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट न मिलने की पुष्टि हुई है।
बॉक्स
चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
दोबारा गठित कमेटी ने जांच के दौरान 118 में से 76 अभ्यर्थियों के कंप्यूटर कोर्स के सर्टिफिकेट ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य 42 के उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन 42 अभ्यर्थियों को अपने सर्टिफिकेट और अन्य रिकार्ड के साथ कॉलेज बुलाया गया है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो वे अभ्यर्थी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने में देर नहीं करेंगे क्योंकि यूट्यूब पर उन्हें आसानी से सर्टिफिकेट प्राप्त करने की तकनीक पहले से पता है। मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज में यह भी चर्चा है कि फर्जी अभ्यर्थियों को पकड़ने के लिए साइबर एक्सपर्ट का होना बेहद जरूरी है जिससे वे अपने तकनीक का प्रयोग कर फर्जी सर्टिफिकेट के साथ उसकी सच्चाई भी सामने ला सके।
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कोट-
जिन चयनित अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट का ऑनलाइन रिकार्ड नहीं मिला है उसकी बारीकी से जांच की जाएगी। कोशिश की जा रही है कि मामले में पूर्व के रिकार्ड भी दोबारा चेक किए जा सके जिससे नर्सिंग अफसर नियुक्ति के मामले की पूरी हकीकत सामने आ सके।
-डॉ. जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमचीएच-32
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बता दें कि अमर उजाला ने 6 मई के अंक में नर्सिंग ऑफिसर बनना है...डियर 6000 लगेंगे, पेपर भी हम दे देंगे शीर्षक के साथ फर्जी कंप्यूटर सर्टिफिकेट के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मामले में दोबारा जांच कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। दोबारा गठित कमेटी ने चयनित अभ्यर्थियों के सभी रिकार्ड पुन: जांचने शुरू किए हैं। इसी क्रम में 42 नर्सिंग अफसरों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट न मिलने की पुष्टि हुई है।
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चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
दोबारा गठित कमेटी ने जांच के दौरान 118 में से 76 अभ्यर्थियों के कंप्यूटर कोर्स के सर्टिफिकेट ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य 42 के उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन 42 अभ्यर्थियों को अपने सर्टिफिकेट और अन्य रिकार्ड के साथ कॉलेज बुलाया गया है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो वे अभ्यर्थी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने में देर नहीं करेंगे क्योंकि यूट्यूब पर उन्हें आसानी से सर्टिफिकेट प्राप्त करने की तकनीक पहले से पता है। मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज में यह भी चर्चा है कि फर्जी अभ्यर्थियों को पकड़ने के लिए साइबर एक्सपर्ट का होना बेहद जरूरी है जिससे वे अपने तकनीक का प्रयोग कर फर्जी सर्टिफिकेट के साथ उसकी सच्चाई भी सामने ला सके।
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जिन चयनित अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सर्टिफिकेट का ऑनलाइन रिकार्ड नहीं मिला है उसकी बारीकी से जांच की जाएगी। कोशिश की जा रही है कि मामले में पूर्व के रिकार्ड भी दोबारा चेक किए जा सके जिससे नर्सिंग अफसर नियुक्ति के मामले की पूरी हकीकत सामने आ सके।
-डॉ. जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमचीएच-32