नाराज भाजपाइयों का अमित शाह को अल्टीमेटम
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भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र शर्मा के कार्यकर्ताओं ने पूंडरी में मीटिंग कर उन्हें आजाद चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया।
इससे पहले बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर अपनी भड़ास निकाली और कहा कि भाजपा ने जीत दिलाने वाले उम्मीदवार को दरकिनार कर बिना जनाधार के नेताओं को टिकट थमाने का काम किया है।
कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री से कहा कि वे केवल आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भर दें, अगला काम वे खुद करके दिखा देंगे। कार्यकर्ताओं ने बैठक के दौरान हाथ उठाकर पूर्व मंत्री को एकजुटता का परिचय दिया और कहा कि वे आज से अपने-अपने गांव में जाकर फिर से उनके पक्ष में माहौल तैयार करने का काम करेंगे।
मंच पर भावुक हो गए नरेंद्र शर्मा
बैठक के दौरान जब पूर्व मंत्री नरेंद्र शर्मा मंच पर आए तो अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। हालांकि कार्यकर्ताओं के दबाव में वे चुनाव लड़ने से तो मना नहीं कर पाए लेकिन वे भाजपा पर तीखा हमला करने से बचते रहे।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनके भरोसे को तोड़ने का काम किया है। भाजपा नेता टिकट आवंटन से पहले भी और अब भी उन्हें भरोसा देने में लगे हैं, इसीलिए वे भी पार्टी को 26 सितंबर तक का अल्टीमेटम देते हैं।
यदि पार्टी ने फैसला नहीं बदला तो वे 27 को आजाद उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरेंगे। पूर्व मंत्री ने कहा कि कार्यकर्ता ही उनकी असली ताकत हैं। वे कार्यकर्ताओं का कहना नहीं टाल सकते।
दलबदलुओं से निपटने में छूट रहा पसीना
हरियाणा में चुनाव से ठीक पहले अपनी ही पार्टी में उठ रहे विरोध को शांत करने में पार्टी के नेताओं को पसीना आ रहा है। बगावत के भंवर में फंसी भाजपा से उनके अपनों का ही मोह भंग होना शुरू हो गया है।
इसके अलावा दलबदलुओं ने भी पार्टी से किनारा करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व मंत्री बहादुर सिंह ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर लोहारू से हजकां के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे,
जबकि अंबाला से भाजपा टिकट की उम्मीद लगाए पूर्व विधायक जसबीर मलौर ने भी पार्टी के प्रदेश सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है मलौर किसी अन्य पार्टी के टिकट पर या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं
डैमेज कंट्रोल में जुटा शीर्ष नेतृत्व
फिलहाल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है और पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी से लेकर वरिष्ठ नेताओं की टीम नाराज नेताओं को मनाने में लग गई है।
भाजपा की पहली सूची आने के बाद भी विरोध के यह स्वर मुखर हुए थे, लेकिन दूसरी सूची में एडजस्ट करने की बात कह कर विरोध शांत कर दिया गया था। दूसरी सूची आते ही बगावत की चिंगारी एक बार फिर से भड़क गई है।
बगावत की इस स्थिति से निपटने के लिए पार्टी ने हरियाणा के सातों सांसदों की भी जिम्मेदारी रूठे हुए नेताओं को मनाने में लगा दी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं की नाराजगी ही सांसदों से है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को बीच का रास्ता निकालने के लिए कहा गया है।