फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Reality Check of Mauli jagran Chandigarh

ये कैसा भेदभाव... चंडीगढ़ में 1568 परिवारों के लिए न स्कूल है, न डिस्पेंसरी और न ही मार्केट

Wed, 12 Aug 2020 04:47 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 12 Aug 2020 04:47 PM IST
विज्ञापन
Reality Check of Mauli jagran Chandigarh
मौलीजागरां चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
यूटी प्रशासन ने वर्ष 2015 में शहर की विभिन्न कॉलोनियों से 1568 परिवारों को मौलीजागरां पार्ट-2 में शिफ्ट कर दिया। लोगों को मकान अलॉट हुए अब पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इलाके में इन लोगों के लिए न तो स्कूल है, न डिस्पेंसरी और न ही मार्केट है। यहां रहने वाले हजारों लोग अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
विज्ञापन


यूटी प्रशासन ने सालों पहले शहर की विभिन्न कॉलोनियों से लोगों का पुनर्वास शुरु कर दिया था, जो अभी भी जारी है। चंडीगढ़ में पुनर्वास योजना के तहत सबसे पहले वर्ष 2009 में लोगों को मकान देने की प्रक्रिया शुरू की थी। मौलीजागरां पार्ट-2 के 1568 परिवारों अभी भी चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन की अनदेखी झेल रहे हैं।
विज्ञापन


इलाके में पूरी तरह से अव्यवस्था है। सड़के टूटी हुई हैं। सभी पार्कों की स्थिति बदहाल है। इलाके में न मार्केट है, न डिस्पेंसरी। लोगों ने बताया कि मकान मिले अभी सिर्फ पांच साल ही हुए हैं, लेकिन अभी से मकान की सीढ़ियों से सीमेंट टूट-टूट कर गिरने लगा है। इसके अलावा बालकनी में भी दरार आ गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाके में पार्कों के इर्द-गिर्द लगाए ग्रिल टूट चुके हैं। इनको समय पर ठीक नहीं किया, इसलिए अब लोग पार्किंग में खाड़ी न खड़ी कर पार्क में गाड़ी खड़ी करते हैं। लोगों की हरकत को लेकर इलाके के कुछ लोगों ने अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन कोई भी अधिकारी व कर्मचारी जांच करने नहीं आया।

किश्त जमा कराने के लिए टूटती है दिहाड़ी

स्थानीय लोगों ने बताया कि वह इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले मकान की किश्त जमा कराने के लिए उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता था। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का एक कर्मचारी हर महीने की 15 तारीख के बाद मौलीजागरां पार्ट-2 में बैठता था, जहां पर लाइन लगाकर वह मकान की किश्त भरते थे। लेकिन अब हाउसिंग बोर्ड ने इस व्यवस्था को बंद कर दिया है।

इससे लोगों को दिहाड़ी तोड़ कर हाउसिंग बोर्ड व सेक्टर-9 के बैंक जाना पड़ता है। लोगों ने कहा कि यहां पर करीब 60 प्रतिशत लोग मजदूरी का काम करते हैं, ऐसे में उन्हें ऑनलाइन किश्त भरने की जानकारी नहीं है। न ही इलाके में हाउसिंग बोर्ड का कोई व्यक्ति है, जो ऑनलाइन किश्त जमा करता है। ऐसे में उन्हें बहुत समस्या आ रही है। लोगों ने मांग की है कि हाउसिंग बोर्ड फिर से अपना कोई कर्मचारी यहां बिठाए, जिससे उन्हें मकान का किराया भरने के लिए दिहाड़ी न तोड़नी पड़े।

स्वास्थ्य सुविधाएं जीरो, मरीज को लेकर पड़ता है भटकना
मौलीजागरां पार्ट-2 के छह हजार लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं इलाके में जीरो हैं। लोगों ने बताया कि छोटी बीमारी के लिए भी मरीज को लेकर इधर-उधर भटकना पड़ता है। प्रशासन ने पहले इलाके में डिस्पेंसरी बनाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक यहां पर कुछ नहीं बना है।

लोगों ने कहा कि इन स्मॉल फ्लैट्स में गरीब व मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं इसलिए जानबूझ कर यहां कोई काम नहीं किया जाता। सड़कें टूटी हुई हैं, सभी कर्मचारी व अधिकारी इसी रास्ते से होकर स्मॉल फ्लैट्स में आते हैं बावजूद इसके सड़क कभी नहीं बनी। लोगों ने कहा कि इलाके की विभिन्न समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

पार्कों में ही गाड़ियां खड़ी करते हैं लोग
यहां पर कई तरह की समस्याएं है। पार्किंग होने के बावजूद लोग अपनी गाड़ियां पार्कों में ही खड़ी करते हैं। मकानों के साथ में कबाड़ी मार्केट है, जो रात में कबाड़ जलाते हैं। सभी लोगों के घरों में धुंआ जाता है। कोई इन्हें रोकने वाला नहीं है। - बबलू यादव

बारिश में टपकती है मकानों की छत
बारिश होती है तो छत टपकने लग जाती है। पार्कों की ग्रिल टूट चुकी है। मकानों की छत पर जहां टंकियां लगी हैं, वहां पर बड़ी-बड़ी घास उग आई हैं। पेड़ पनपने लगे हैं। इससे बिल्डिंग को खतरा पैदा हो गया है। - दर्शन लाल

समस्याएं कई..  सुनने वाला कोई नहीं
इलाके में समस्या ही समस्या है। न सड़कें ठीक हैं, न ही पार्कों की हालत सुधरी। कई बार इसको लेकर अधिकारियों के सामने गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। मकान की किश्त भरवाने के लिए लोगों को अपनी दिहाड़ी तोड़नी पड़ती है। मकानों की हालत भी खराब हो गई है। - शशि शंकर तिवारी, कांग्रेस नेता

इलाके की सभी सड़कें टूटीं
प्रशासन के अधिकारी यहां के लोगों के बारे में सोचते ही नहीं है। इलाके की सभी सड़कें टूटी हुई हैं। बारिश में स्थिति और भी खराब हो जाती है। न खेलने के मैदान बचे हैं, न ही पार्क। बच्चे बाहर निकलते हैं तो उसमें भी डर लगता है।
- उमा शंकर यादव

मूलभूत सुविधाओं के लिए तरह रहे लोग
यहां पर लोगों को बसाते वक्त चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ प्रशासन ने कई तरह के वादे किये थे, लेकिन कोई भी पूरा नहीं किया गया। मकान अलॉट किये पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन यहां के लोग अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरह रहे हैं। - अरविंद कुमार

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed