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Chandigarh News: घर खरीदार की रकम नहीं लौटाई, रियल एस्टेट कंपनी के एमडी को तीन साल जेल
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया, न देने पर 15 दिन अतिरिक्त कारावास
चंडीगढ़। घर खरीदार को रकम लौटाने के राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश की लगातार अनदेखी करना रियल एस्टेट कंपनी के प्रबंध निदेशक गुरप्रीत सिंह सिद्धू को भारी पड़ गया। चंडीगढ़ स्थित राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इमरजिंग वैली प्राइवेट लिमिटेड के एमडी सिद्धू को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। आयोग ने उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर 15 दिन अतिरिक्त जेल में रहना होगा। आयोग ने कहा कि सिद्धू ने वर्ष 2021 में दिए गए आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया। आदेश को विफल करने और देनदारी से बचने की मंशा भी स्पष्ट दिखाई दी।
2021 में खरीदार के पक्ष में आया था आदेश
मामला मोहाली के सेक्टर-115 के खरड़-लांडरा रोड पर इमरजिंग वैली की आवासीय परियोजना से जुड़ा है। घर खरीदार रश्मि ठाकुर की शिकायत पर 29 अक्तूबर 2021 को राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी और जिम्मेदार व्यक्तियों को जमा रकम 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। मानसिक परेशानी और शारीरिक उत्पीड़न के लिए एक लाख और मुकदमे के खर्च के 33 हजार रुपये देने के भी निर्देश थे। दो महीने में आदेश की पालना होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
फरार हुआ, 2024 में घोषित हुआ भगोड़ा
कार्यवाही के दौरान सिद्धू को धारा 72 के तहत तलब किया गया। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे की मांग की लेकिन बाद में फरार हो गया। 21 मार्च 2024 को उसे भगोड़ा घोषित किया गया और 20 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान 12 मार्च 2026 को सिद्धू ने डिमांड ड्राफ्ट से रश्मि ठाकुर को दो लाख रुपये दिए। आयोग की गणना के अनुसार 28 फरवरी 2022 तक करीब 54 लाख रुपये बकाया थे और उस पर ब्याज भी बनता रहा। इसके बाद कोई भुगतान नहीं किया गया। आर्थिक तंगी का हवाला देकर राहत मांगने पर आयोग ने कहा कि उसे आदेश पालन के पर्याप्त अवसर मिले थे।
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संपत्ति विवाद में तीसरी सजा
सिद्धू को संपत्ति से जुड़े मामलों में यह तीसरी सजा है। 15 जनवरी 2026 को मोहाली जिला उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट का कब्जा न देने या रकम वापस न करने के मामले में उसे दो साल की जेल दी थी। 25 अप्रैल 2026 को राज्य उपभोक्ता आयोग ने आदेश की पालना न करने पर दो साल की जेल और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। आयोग ने मौजूदा सजा में पहले से जेल में बिताई अवधि समायोजित करने का निर्देश भी दिया है।
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चंडीगढ़। घर खरीदार को रकम लौटाने के राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश की लगातार अनदेखी करना रियल एस्टेट कंपनी के प्रबंध निदेशक गुरप्रीत सिंह सिद्धू को भारी पड़ गया। चंडीगढ़ स्थित राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इमरजिंग वैली प्राइवेट लिमिटेड के एमडी सिद्धू को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। आयोग ने उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर 15 दिन अतिरिक्त जेल में रहना होगा। आयोग ने कहा कि सिद्धू ने वर्ष 2021 में दिए गए आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया। आदेश को विफल करने और देनदारी से बचने की मंशा भी स्पष्ट दिखाई दी।
2021 में खरीदार के पक्ष में आया था आदेश
मामला मोहाली के सेक्टर-115 के खरड़-लांडरा रोड पर इमरजिंग वैली की आवासीय परियोजना से जुड़ा है। घर खरीदार रश्मि ठाकुर की शिकायत पर 29 अक्तूबर 2021 को राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी और जिम्मेदार व्यक्तियों को जमा रकम 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। मानसिक परेशानी और शारीरिक उत्पीड़न के लिए एक लाख और मुकदमे के खर्च के 33 हजार रुपये देने के भी निर्देश थे। दो महीने में आदेश की पालना होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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फरार हुआ, 2024 में घोषित हुआ भगोड़ा
कार्यवाही के दौरान सिद्धू को धारा 72 के तहत तलब किया गया। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे की मांग की लेकिन बाद में फरार हो गया। 21 मार्च 2024 को उसे भगोड़ा घोषित किया गया और 20 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान 12 मार्च 2026 को सिद्धू ने डिमांड ड्राफ्ट से रश्मि ठाकुर को दो लाख रुपये दिए। आयोग की गणना के अनुसार 28 फरवरी 2022 तक करीब 54 लाख रुपये बकाया थे और उस पर ब्याज भी बनता रहा। इसके बाद कोई भुगतान नहीं किया गया। आर्थिक तंगी का हवाला देकर राहत मांगने पर आयोग ने कहा कि उसे आदेश पालन के पर्याप्त अवसर मिले थे।
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संपत्ति विवाद में तीसरी सजा
सिद्धू को संपत्ति से जुड़े मामलों में यह तीसरी सजा है। 15 जनवरी 2026 को मोहाली जिला उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट का कब्जा न देने या रकम वापस न करने के मामले में उसे दो साल की जेल दी थी। 25 अप्रैल 2026 को राज्य उपभोक्ता आयोग ने आदेश की पालना न करने पर दो साल की जेल और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। आयोग ने मौजूदा सजा में पहले से जेल में बिताई अवधि समायोजित करने का निर्देश भी दिया है।