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स्थापना दिवसः हरियाणा ने 53 साल में हर क्षेत्र में गढ़े कीर्तिमान, यहां पढ़ें पूरी गौरवगाथा

Fri, 01 Nov 2019 01:00 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 01 Nov 2019 01:00 AM IST
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हरियाणा दिवस - फोटो : अमर उजाला

पंजाब से अलग होकर हरियाणा प्रदेश बने हुए 53 साल पूरे हो गए हैं। एक नवंबर 1966 को हरियाणा का गठन होने के बाद प्रदेश के युवाओं ने विश्व पटल पर अपनी प्रतिभाओं से खेल, शिक्षा, सुरक्षा समेत तमाम क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पढ़े-लिखे किसानों की बदौलत खेती में भी काफी बदलाव देखा गया है, हालांकि पराली के धुएं का संकट अभी बरकरार है। 

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बढ़ते उद्योग धंधों के बावजूद बेरोजगारी की चुनौतियां भी बाकी हैं। लिंगानुपात तो चिंताजनक है ही, कई जिलों में समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार है। जानकार बताते हैं कि यदि अनुभवी लोगों का हरियाणा की उन्नति और विकास में इस्तेमाल हो तो प्रदेश का कायापलट हो जाएगा। तीन दशक पहले गांव में लैंप की रोशनी के सहारे ही लोग जीवन बिता रहे थे। 
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अब हर गांव और शहर में बिजली की सुविधा है। यातायात सुविधाओं के क्षेत्र में भी प्रदेश ने काफी तरक्की की है। मगर चिंता की बात यह है कि युवा नशा की चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश गठन की यादों को ताजा करते हुए 74 वर्षीय सुमेर सिंह बताते हैं कि उस समय उनकी उम्र 21 साल थी और वह भी इस मुहिम का हिस्सा बने थे। पहले लोग संयुक्त परिवार में रहते थे। आपस में प्यार-प्रेम होता था और बड़े-छोटों की इज्जत होती थी। दूध-दही का खाना ही हमारी पहचान होता था, लेकिन अब चाट-पकौड़ियों के पीछे देसी खाना खत्म हो गया। 

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इसी तरह 85 साल के बुजुर्ग रामकिशन सिंह ने बताया कि पंजाब से जब हरियाणा अलग हुआ उस समय मेरी उम्र 25 साल थी। प्रोफेसर शमशेर सिंह और चौधरी रणबीर सिंह की अगुवाई में जत्थे में झंडे उठाकर दिल्ली संसद भवन पहुंचते थे और हरियाणा को पंजाब से अलग करने की मांग करते हुए धरना देते थे। उन्होंने बताया कि पंजाब से अलग होने के बाद यहां सुधार हुए हैं। पहले सारा पैसा सरकार पंजाब में आने वाले शहरों में ही लगाती थी। आज हर बच्चा कान्वेंट स्कूल में अंग्रेजी मीडियम में पढ़ता है। 

भिवानी : तीन मुख्यमंत्री दिए, फिर भी बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ा  
54वें वर्ष पहुंच रहे भिवानी ने हरियाणा को तीन-तीन मुख्यमंत्री ने दिए। पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल को तो हरियाणा का जनक कहा जाता है। यहां के मुक्केबाजों बिजेंद्र, जितेंद्र, विकास यादव, परमजीत समोता, दिलबाग सिंह, बेटियां पूजा, कविता, मीना कुमारी ने अपने मुक्कों से हरियाणा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। हालांकि भिवानी जिला आज स्वास्थ्य, उद्योग, मूलभूत सुविधाओं के मामलों में अन्य जिलों से पिछड़ा नजर आ रहा है। भिवानी में बना हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड हर साल लाखों बच्चों का भविष्य तय करता है। भिवानी का प्लास्टिक उद्योग देशभर में अलग पहचान बनाए है। 

रेवाड़ी में एम्स की दरकार, रैपिड मेट्रो पकड़ेगी रफ्तार

30 साल के इस जिले में सबसे बड़ा बदलाव औद्योगिक क्षेत्र में आया है। यहां के उद्योगों में करीब 10 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। दिल्ली से गुड़गांव व धारूहेड़ा होकर अलवर तक रैपिड मेट्रो ट्रेन का प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह रेवाड़ी होकर दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर बन रहा है। 

कपास की खेती की शुरू होने से किसानों की खुशहाली बढ़ी है। रेवाड़ी के रामपुरा गांव से राव बिरेंद्र सिंह रूप में प्रदेश को दूसरा मुख्यमंत्री मिला था। केंद्रीय कृषि मंत्री से लेकर कई मंत्री रेवाड़ी ने दिए हैं। दक्षिण हरियाणा में एम्स बनने की घोषणा वर्ष 2014 में बावल में हुई थी, लेकिन लोग अब भी एम्स के लिए संघर्ष कर रहे हैं।   

शिक्षा का हब बना महेंद्रगढ़
आजादी के बाद 1948 में महेंद्रगढ़ जिला अस्तित्व में आया था। तब महेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय की जंग लड़ रहा है। अब भी जिला मुख्यालय नारनौल में है। फिर भी महेंद्रगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा हब बन चुका है। बाजरा, सरसों उत्पादन में प्रदेश में महेंद्रगढ़ सबसे अव्वल जिला है। 2018 में महेंद्रगढ़ जिले के प्रथम कौशिक ने सिविल सर्विस परीक्षा में पांचवां स्थान हासिल किया।

महेंद्रगढ़ के गांव सुरहेती पिलानिया निवासी संदीप पूनिया ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि भूजल स्तर गिरने से पूरा जिला डार्क जोन में आ चुका है। खास बात यह कि महेंद्रगढ़ शहर में कचरा उठाने के लिए किसी मोटर वाहन का उपयोग नहीं होता, यहां अब भी ऊंट गाड़ी कचरा उठाने आती है।

हर क्षेत्र में जींद के युवाओं ने बनाई पहचान

स्थापना के समय हरियाणवी खानपान और पहनावा, साइकिल की सवारी, कुछ दुकानों का शहर और मैट्रिक तक के स्कूलों से ही जींद की पहचान थी। आज लग्जरी गाड़ियां, बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम, खचाखच भरे बाजार, भीड़भाड़ वाली सड़कें, विकसित होते सेक्टर और मल्टीप्लेक्स जींद के विकास की कहानी बयां रहे हैं। युवाओं ने देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर एवरेस्ट को फतह करने, खेल, शिक्षा, खेती, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में नाम रोशन किया।

बदल गया झज्जर का स्वरूप
स्थापना के बाद झज्जर ने स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी तरक्की की है। पहले यहां पर केवल एक पीएचसी होता था। एक्सरे के लिए भी रोहतक जाना पड़ता था। वहीं अब यहां पर प्रदेश के एकमात्र एम्स के साथ-साथ कैंसर इंस्टीट्यूट भी स्थापित है। वर्तमान में झज्जर जिले में मेट्रो, ट्रेन व बसों का काफी बढ़िया यातायात का साधन है।

जिले को दूसरे जिलों से जोड़ने वाली सड़कें अब हाईवे का रूप ले चुकी हैं। बहादुरगढ़ में बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया विकसित हो चुका है। वहीं झज्जर के दादरी तोए में भी रिलांयस एसईजेड खड़ा हो चुका है। जहां पर पैनासोनिक, डैंसो व फ्लिपकार्ट जैसी नामी कंपनियां अपना प्लांट लगा चुकी हैं।

पांच दशक में हिसार ने हर क्षेत्र में बनाई अलग पहचान

 पांच दशक के सफर में हिसार जिलावासियों ने हर क्षेत्र में खूब पसीना बहाया है। कहा जाता है कि 1960 के दशक में हिसार की प्रति व्यक्ति आय भारत में सर्वाधिक थी। गेहूं व कपास यहां की प्रमुख फसलें हैं। स्टील की जिंदल इंडस्ट्री, हिसार मेटल, डीसीएम, धागा मिल भी हैं। हिसार रेलवे स्टेशन से माल ढोने के लिए रेलवे लाइन बिछाई गई थी, जो बठिंडा से कोलकाता तक ले जाया जाता था। 

आज इस स्टेशन से लगभग प्रत्येक स्थान के लिए रेलगाड़ियां चलती हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू हो चुका है। जिले में गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अलावा संस्थानों में राष्ट्रीय अश्व शोध केंद्र और केंद्रीय भैंस शोध संस्थान शामिल हैं। 

हिसार की साइना नेहवाल, गीतिका जाखड़, ललिता सहरावत, एकता भ्याण, अनीता कुंडू, कृष्णा पूनिया और शिवांगी पाठक ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। हिसार पर्यटन का आकर्षक स्थल है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल आदमपुर से थे। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल सिवानी हलके के निवासी हैं। कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा हिसार से हैं। 

बुनियादी जरूरतों से महरूम फतेहाबाद
फतेहाबाद जिला 24 साल का युवा है। विकास कार्यों के बावजूद बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से फतेहाबाद जिला विकास की उड़ान नहीं भर सका है। फतेहाबाद में नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग बनाने की घोषणा दस साल पुरानी है। दो-दो मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद अभी तक इसकी ड्राइंग तक मंजूर नहीं हो सकी है। यही हाल बैंक स्कवायर और कचरा प्रबंधन प्लांट का है। 

जिले में लगातार घूमता रहा विकास का पहिया 

हरियाणा प्रदेश बनने के छह साल बाद सोनीपत को जिला बनाया गया था। जिला बनने के बाद जहां शिक्षा को बढ़ावा मिला, वहीं खेलों में विदेशों तक झंडे गाड़े गए हैं। उद्योग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक सबकुछ शिखर पर पहुंच रहा है। सोनीपत के विकास में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नजदीक होना भी काफी अहम रहा है। 

राजधानी के अंदर से वाहनों का भार कम करने के लिए जिन एक्सप्रेस वे को बनाया जा रहा है, उनकी शुरुआत भी सोनीपत से होती है और सड़कों का जाल भी यहां बड़े स्तर पर बिछाया गया है। जिले में 5 औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें सोनीपत, बड़ी, मुरथल, राई व कुंडली शामिल है। 

करीब 7000 फैक्ट्रियों में लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यहां की पूनम मलिक आईपीएस बनकर लोगों की सेवा में जुटी हैं। वहीं खेलों में दीपा मलिक, सरिता मोर, पूनम मलिक, प्रीतम सिवाच, नेहा गोयल, सीमा आंतिल भी देश का नाम रोशन कर रही हैं। 
 
कब कौन से जिले से बने
रोहतक, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, हिसार, जींद, अंबाला और करनाल - 1 नवंबर, 1966  
सोनीपत, भिवानी-22 दिसंबर, 1972 
कुरुक्षेत्र-23 जनवरी, 1973
सिरसा- 26 अगस्त,  1975 
यमुनानगर, रेवाड़ी, पानीपत, कैथल- 1 नवंबर, 1989  
पंचकूला 15 अगस्त,  1995
फरीदाबाद- 15 अगस्त, 1997  
झज्जर, फतेहाबाद- 15 जुलाई, 1997  
नूंह- 4 अप्रैल, 2005 
पलवल-15 अगस्त, 2008
चरखी दादरी- 1 दिसंबर,  2016

हरियाणा दिवस पर गवर्नर ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने हरियाणा दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। साथ ही प्रदेशवासियों के सुखी और समृद्ध जीवन की मंगल कामना की है। आर्य ने कहा कि आज हरियाणा विभिन्न क्षेत्रों में देश में प्रथम स्थान पर है और वे कामना करते हैं कि भविष्य में भी प्रदेश प्रगति के पथ पर ऐसे ही बढ़ता रहे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रदेशवासियों के कठोर परिश्रम एवं सहयोग से हरियाणा विकास की नई बुलंदियों को छुएगा।

इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने गठन के 53 वर्ष की अवधि में हरियाणा ने सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। लोगों की कड़ी मेहनत एवं लगन से राज्य ने कृषि के साथ-साथ उद्योग व खेल जगत में भी विश्व में एक अमिट छाप छोड़ी है। 

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में हरियाणा प्रगति की नई बुलंदियों को हासिल करेगा। वहीं उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आज का हरियाणा किसान व मजदूर की मेहनत, उद्योगपति के उद्यम और व्यापारी की लगन का परिणाम है। 

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