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Chandigarh News: रणजीत चौटाला का विधायक पद से इस्तीफा मंजूर, मंत्री पद से नहीं छोड़ा
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हिसार लोकसभा सीट से भाजपा के हैं उम्मीदवार
कहा-लोकसभा चुनाव के बाद लेंगे मंत्री पद पर निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हिसार से भाजपा उम्मीदवार रणजीत चौटाला का विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा मंजूर हो गया है। वह रानियां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक थे। उनका इस्तीफा 24 मार्च से ही मंजूर हुआ है। वह अगले पांच महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह अभी बिजली व जेल मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद फैसला करेंगे।
बीती 24 मार्च को भाजपा में शामिल होते ही रणजीत चौटाला ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा किसी के हाथ से विधानसभा स्पीकर के पास भिजवाया था। नियमों के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफे का सत्यापन करते हैं। उसके लिए विधायक का मौजूद रहना अनिवार्य होता है। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने रणजीत चौटाला को 23 अप्रैल को विधानसभा में बुलाया था, मगर किसी कारणवश नहीं आ सके। उन्हें फिर 30 अप्रैल को बुलाया गया। रणजीत चौटाला मंगलवार को विधानसभा पहुंचे और त्यागपत्र की पुष्टि की।
चौटाला के इस्तीफा देने के बाद अब विधानसभा में सदस्यों की संख्या 88 हो गई है। चौटाला से पहले पूर्व सीएम मनोहर लाल ने करनाल विधानसभा से इस्तीफा दिया था। पत्रकारों से बातचीत में रणजीत चौटाला ने कहा कि यह उनका दूसरी बार इस्तीफा हुआ है। 1989 में जब वह राज्यसभा के लिए चुने गए थे तब भी विधानसभा से इस्तीफा दिया था। हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी विधायक का इस्तीफा स्वीकार करने में 36 दिन लगे हों।
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कहा-लोकसभा चुनाव के बाद लेंगे मंत्री पद पर निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हिसार से भाजपा उम्मीदवार रणजीत चौटाला का विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा मंजूर हो गया है। वह रानियां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक थे। उनका इस्तीफा 24 मार्च से ही मंजूर हुआ है। वह अगले पांच महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह अभी बिजली व जेल मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद फैसला करेंगे।
बीती 24 मार्च को भाजपा में शामिल होते ही रणजीत चौटाला ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा किसी के हाथ से विधानसभा स्पीकर के पास भिजवाया था। नियमों के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफे का सत्यापन करते हैं। उसके लिए विधायक का मौजूद रहना अनिवार्य होता है। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने रणजीत चौटाला को 23 अप्रैल को विधानसभा में बुलाया था, मगर किसी कारणवश नहीं आ सके। उन्हें फिर 30 अप्रैल को बुलाया गया। रणजीत चौटाला मंगलवार को विधानसभा पहुंचे और त्यागपत्र की पुष्टि की।
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चौटाला के इस्तीफा देने के बाद अब विधानसभा में सदस्यों की संख्या 88 हो गई है। चौटाला से पहले पूर्व सीएम मनोहर लाल ने करनाल विधानसभा से इस्तीफा दिया था। पत्रकारों से बातचीत में रणजीत चौटाला ने कहा कि यह उनका दूसरी बार इस्तीफा हुआ है। 1989 में जब वह राज्यसभा के लिए चुने गए थे तब भी विधानसभा से इस्तीफा दिया था। हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी विधायक का इस्तीफा स्वीकार करने में 36 दिन लगे हों।
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