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सुखना का संकट: झमाझम बरसें बदरा तभी लौटेगा सुखना का ‘सुख’

आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 22 May 2017 09:23 AM IST
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सुखना झील
सुखना झील - फोटो : अमर उजाला

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अगले कुछ दिनों में सुखना पूरी तरह से सूख जाएगी। सुखना को भरने में बारिश ही एक मात्र विकल्प है। कम से कम 839 मिलीमीटर पानी बरसना चाहिए। तब जाकर सुखना के पानी का स्तर मेंटेन हो पाएगा। चिंता की बात यह है कि पिछले कुछ सालों से बारिश कम हो रही है। पिछले साल तो सिर्फ 605.8 एमएम बारिश दर्ज की गई। करीब 46 फीसदी कम। जबकि इस बार सामान्य मानसून की बात कही थी।
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  अब सवाल यह है कि पिछले साल की तरह इस साल भी इतनी बारिश होती है तो सुखना को कैसे भरा जाएगा? ये आंकड़े तो पूरे साल के हैं। जुलाई से लेकर सितंबर की बात की जाए तो करीब 450-550 एमएम के आसपास बारिश दर्ज की जाती है। यदि इतनी या इससे कम बारिश होती है तो उस स्थिति में मानसून के बाद भी सुखना में पानी का संकट रह सकता है। ऐसी स्थिति में यही उम्मीद की जानी चाहिए कि बारिश अच्छी हो और चंडीगढ़ प्रशासन गाद निकालने का काम तेजी से शुरू करे।


25 जून के बाद सूख जाएगी सुखना
विशेषज्ञों का कहना है कि 25 जून के आसपास सूखना पूरी तरह से सूख जाएगी। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, उतनी तेजी से पानी का स्तर कम होगा। रविवार को पानी का स्तर (समुद्र के तल से) 1151 फीट दर्ज किया गया। बोटिंग वाले एरिया में करीब चार फीट के आसपास पानी बचा होगा। जबकि बाकी एरिया में डेढ़ फीट के आसपास। रेग्युलेटरी एंड के आसपास तो पानी सूख गया है।
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गाद निकालने के लिए प्रशासन के पास सिर्फ 39 दिन का समय

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