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दक्षिण एशिया में सबसे पावरफुल बना भारत, अब नहीं टिक पाएंगे चीन के जे-20 और पाकिस्तान के एफ-16
Thu, 30 Jul 2020 03:33 AM IST
ajay kumar
उमेश भार्गव, अमर उजाला, अंबाला (हरियाणा)
उमेश भार्गव, अमर उजाला, अंबाला (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 30 Jul 2020 03:33 AM IST
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राफेल
राफेल के आने से अब भारत की शक्ति कई गुना बढ़ गई है। 4.5 जनरेशन का यह लड़ाकू विमान अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। नई जनरेशन और स्टील्थ तकनीक का कोई भी लड़ाकू विमान दक्षिण एशिया में किसी देश के पास नहीं है। यहां तक कि चीन, रूस और पाकिस्तान के पास भी ऐसा कोई लड़ाकू विमान नहीं है। चीन के पास सबसे आधुनिक विमान जे-20 और पाकिस्तान के पास एफ-16 है। दोनों ही नए राफेल के सामने कहीं नहीं ठहरते। राफेल एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। यानी प्रति सेकेंड 300 मीटर। यह हैमर मिसाइल से लैस होंगे।
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शक्ति संतुलन के तौर पर आया राफेल
राफेल में और भी कई खूबियां हैं जो इसे चीन के जे-20 और पाकिस्तान के एफ-16 से बेहतर बनाती हैं। राफेल के भारत में आगमन को दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है। राफेल की खेप ऐसे समय में भारत पहुंचना और भी अधिक महत्वपूर्ण है, जब भारत का गलवां घाटी में चीन के साथ टकराव बरकरार है।
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10 मिनट में पहुंच सकता है सीमा पर
वायुसेना के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इन पांचों विमानों को ऑपरेशनल बनाने के लिए वायुसेना के एक्सपर्ट दिन रात काम करेंगे। आने वाले कुछ दिनों में पांचों नए अत्याधुनिक राफेल विमान ऑपरेशनल हो जाएंगे। इस लिहाज से अंबाला एयरबेस पाकिस्तान और चीन की सीमा तक मिनटों में मारक क्षमता के साथ तैनात रहेंगे।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की सीमा अंबाला एयरबेस से लगभग 225 किलोमीटर है, जबकि चीन की सीमा करीब 300 किलोमीटर पर है। जबकि राफेल की रफ्तार 1920 किलोमीटर प्रति घंटा है। यानी 7 से 10 मिनट के बीच यह अपने दोनों शत्रुओं की सीमा तक पहुंचने में सक्षम है।
हर वक्त स्टैंडबाय रहेंगे राफेल
विशेष विंग कमांडर हरकीरत समेत कई अन्य पायलेट राफेल का प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं। अंबाला एयरबेस पर यह विमान लगभग हर समय स्टैंडबाय रहेंगे। कमांड मिलते ही राफेल दुश्मन पर टूट पड़ेंगे।