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Chandigarh News: राधा ही श्री कृष्णा है श्री कृष्णा ही राधा - आचार्य सुखदेव
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मोहाली। श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य सुखदेव ने राधा-श्रीकृष्ण का प्रेम प्रसंग सुनाया। आचार्य ने कहा कि राधा-श्रीकृष्ण अलग नहीं है। जो राधा हैं वह ही श्रीकृष्ण हैं और जो श्रीकृष्ण हैं वह ही राधा हैं। ऐसा माना जाता है कि राधा-श्रीकृष्ण एक ही हैं। राधा श्रीकृष्ण का स्त्री रूप माना जाता है। राधा को श्रीकृष्ण की प्रेमिका और पत्नी दोनों माना जाता है।
सेक्टर-68 में स्थित मां दुर्गा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सुखदेव महाराज ने राधा-श्रीकृष्णा का प्रेम प्रसंग सुनाया। आचार्य ने इसके बाद श्रीकृष्ण और रुक्मिणि के विवाह का प्रसंग भी सुनाया। भगवान के विवाह का उत्सव श्रद्धालुओं ने बड़े धूमधाम से मनाया। मंदिर कमेटी के प्रधान मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कथा के बाद अटूट लंगर चलाया गया।
भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की कथा सुनाई
महाराज ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की गुरुकुल में मित्रता की कथा सुनाई। एक दिन सुदामा की पत्नी ने कहा की तुम्हारे मित्र तो भगवान हैं क्यों नहीं एक दिन उनके पास जाओ तो सुदामा ने कई बार मना किया। लेकिन अपनी पत्नी के न मानने पर सुदामा एक दिन श्रीकृष्ण को मिलने जब द्वारका पहुंचते हैं तो भगवान जब सुदामा का नाम सुनते हैं तो दौड़ कर आते हैं और सुदामा को गले लगाते हैं। उसी दिन से सुदामा की सभी दरिद्रता दूर हो जाती है।
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सेक्टर-68 में स्थित मां दुर्गा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सुखदेव महाराज ने राधा-श्रीकृष्णा का प्रेम प्रसंग सुनाया। आचार्य ने इसके बाद श्रीकृष्ण और रुक्मिणि के विवाह का प्रसंग भी सुनाया। भगवान के विवाह का उत्सव श्रद्धालुओं ने बड़े धूमधाम से मनाया। मंदिर कमेटी के प्रधान मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कथा के बाद अटूट लंगर चलाया गया।
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भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की कथा सुनाई
महाराज ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की गुरुकुल में मित्रता की कथा सुनाई। एक दिन सुदामा की पत्नी ने कहा की तुम्हारे मित्र तो भगवान हैं क्यों नहीं एक दिन उनके पास जाओ तो सुदामा ने कई बार मना किया। लेकिन अपनी पत्नी के न मानने पर सुदामा एक दिन श्रीकृष्ण को मिलने जब द्वारका पहुंचते हैं तो भगवान जब सुदामा का नाम सुनते हैं तो दौड़ कर आते हैं और सुदामा को गले लगाते हैं। उसी दिन से सुदामा की सभी दरिद्रता दूर हो जाती है।
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