Punjab: गवर्नर ने पंजाब विधानसभा सत्र की वैधता पर उठाए थे सवाल, अब कानूनविद बोले-कानूनी था विशेष सेशन
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने 22 मार्च 2022 को सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद 1 अप्रैल 2022 को सदन की बैठक बुला ली थी। एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि सत्रावसान का मतलब भारत के संविधान के तहत आदेश जारी करके राज्यपाल द्वारा सदन की बैठकों को औपचारिक रूप से समाप्त करना है
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पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा गत 19 और 20 जून को राज्य सरकार द्वारा बुलाए गए पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की वैधता को गलत ठहराने पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि राज्यपाल ने इस मामले में भारत के अटार्नी जनरल से राय लेने का फैसला किया है लेकिन कानूनविदों का मानना है कि 19 और 20 जून के बुलाया गया सत्र पूरी तरह कानूनी था और इस सत्र को बुलाने में कानून या प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है।
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नया नहीं था दो दिवसीय सत्र
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने इस मामले में कहा कि बेशक 19 और 20 जून 2023 को उपरोक्त दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाने से पहले, भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के तहत आवश्यक पंजाब के राज्यपाल के हस्ताक्षर और मुहर के तहत कोई समन आदेश जारी नहीं किया गया था, लेकिन तथ्य यह है कि इसकी आवश्यकता नहीं थी क्योंकि वह दो दिवसीय सत्र कोई नया सत्र नहीं था, बल्कि वास्तव में राज्य विधानसभा के बजट सत्र की निरंतरता थी, जिसे राज्यपाल द्वारा उपरोक्त अनुच्छेद 174(1) के तहत 3 मार्च 2023 से विधिवत बुलाया गया था।
भारतीय संविधान और इस बजट सत्र का आज तक राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार की सिफारिश पर, भारत के संविधान के अनुच्छेद 174(2)(ए) के तहत सत्रावसान किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सदन के पीठासीन अधिकारी (स्पीकर) कुलतार सिंह संधवां, जिन्होंने इस बजट सत्र के दौरान सदन को दो बार- पहले 22 मार्च 2023 को और फिर 20 जून 2023 को, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया था, राज्यपाल की मंजूरी के बिना सत्र बुलाने के लिए सक्षम हैं।
2022 में भी ऐसे ही बुलाया था सत्र
गौरतलब है कि मार्च-अप्रैल, 2022 में भी ऐसा ही हुआ था, जब पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने 22 मार्च 2022 को सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद 1 अप्रैल 2022 को सदन की बैठक बुला ली थी। एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि सत्रावसान का मतलब भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (ए) के तहत एक आदेश जारी करके राज्य के राज्यपाल द्वारा सदन की बैठकों को औपचारिक रूप से समाप्त करना है, जो सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि सदन को भारत के संविधान के क्रमशः अनुच्छेद 174(1) और अनुच्छेद 174(2)(ए) के तहत राज्यपाल द्वारा बुलाया और स्थगित किया जाता है, लेकिन वास्तव में इस तरह के आह्वान और सत्रावसान का निर्णय राज्य सरकार द्वारा अनुमोदन के बाद मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल को एक सिफारिश करने पर ही होता है।