फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Questions on invalidity session of Punjab Assembly by Governor Banwarilal Purohit, lawyers believe otherwise

Punjab: गवर्नर ने पंजाब विधानसभा सत्र की वैधता पर उठाए थे सवाल, अब कानूनविद बोले-कानूनी था विशेष सेशन

Wed, 19 Jul 2023 10:25 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 19 Jul 2023 10:25 AM IST
सार

पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने 22 मार्च 2022 को सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद 1 अप्रैल 2022 को सदन की बैठक बुला ली थी। एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि सत्रावसान का मतलब भारत के संविधान के तहत आदेश जारी करके राज्यपाल द्वारा सदन की बैठकों को औपचारिक रूप से समाप्त करना है

विज्ञापन
Questions on invalidity session of Punjab Assembly by Governor Banwarilal Purohit, lawyers believe otherwise
सीएम भगवंत मान और गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा गत 19 और 20 जून को राज्य सरकार द्वारा बुलाए गए पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की वैधता को गलत ठहराने पर सवाल उठने लगे हैं।

विज्ञापन


हालांकि राज्यपाल ने इस मामले में भारत के अटार्नी जनरल से राय लेने का फैसला किया है लेकिन कानूनविदों का मानना है कि 19 और 20 जून के बुलाया गया सत्र पूरी तरह कानूनी था और इस सत्र को बुलाने में कानून या प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है।

विज्ञापन

 

यह भी पढ़ें: Haryana Flood: पांच साल में बाढ़ नियंत्रण के लिए जारी किए बीस अरब रुपये, नदियों के तटबंध आज भी कच्चे

विज्ञापन
विज्ञापन


नया नहीं था दो दिवसीय सत्र
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने इस मामले में कहा कि बेशक 19 और 20 जून 2023 को उपरोक्त दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाने से पहले, भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के तहत आवश्यक पंजाब के राज्यपाल के हस्ताक्षर और मुहर के तहत कोई समन आदेश जारी नहीं किया गया था, लेकिन तथ्य यह है कि इसकी आवश्यकता नहीं थी क्योंकि वह दो दिवसीय सत्र कोई नया सत्र नहीं था, बल्कि वास्तव में राज्य विधानसभा के बजट सत्र की निरंतरता थी, जिसे राज्यपाल द्वारा उपरोक्त अनुच्छेद 174(1) के तहत 3 मार्च 2023 से विधिवत बुलाया गया था।


भारतीय संविधान और इस बजट सत्र का आज तक राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार की सिफारिश पर, भारत के संविधान के अनुच्छेद 174(2)(ए) के तहत सत्रावसान किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सदन के पीठासीन अधिकारी (स्पीकर) कुलतार सिंह संधवां, जिन्होंने इस बजट सत्र के दौरान सदन को दो बार- पहले 22 मार्च 2023 को और फिर 20 जून 2023 को, अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया था, राज्यपाल की मंजूरी के बिना सत्र बुलाने के लिए सक्षम हैं।

2022 में भी ऐसे ही बुलाया था सत्र
गौरतलब है कि मार्च-अप्रैल, 2022 में भी ऐसा ही हुआ था, जब पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने 22 मार्च 2022 को सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद 1 अप्रैल 2022 को सदन की बैठक बुला ली थी। एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि सत्रावसान का मतलब भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (ए) के तहत एक आदेश जारी करके राज्य के राज्यपाल द्वारा सदन की बैठकों को औपचारिक रूप से समाप्त करना है, जो सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि सदन को भारत के संविधान के क्रमशः अनुच्छेद 174(1) और अनुच्छेद 174(2)(ए) के तहत राज्यपाल द्वारा बुलाया और स्थगित किया जाता है, लेकिन वास्तव में इस तरह के आह्वान और सत्रावसान का निर्णय राज्य सरकार द्वारा अनुमोदन के बाद मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल को एक सिफारिश करने पर ही होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed