स्वच्छता सर्वेक्षणः पंजाब के छोटे शहरों ने कायम की बड़ी मिसाल, बड़े शहरों ने किया निराश
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सफाई के मामले में पंजाब के बड़े शहर जहां फिसड्डी रहे, वहीं छोटे शहरों ने बड़ी मिसाल कायम की। कई नगर काउंसिलों और पंचायतों ने सूबे का नाम रौशन किया। नॉर्थ जोन में इस बार कई खिताब पंजाब के नाम रहे।
नवांशहर में सौ फीसदी घरों से इकट्ठा होता है कूड़ा
एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में नॉर्थ जोन में सबसे साफ शहर का खिताब नवांशहर को यूं ही नहीं मिल गया। यहां सौ फीसदी कूड़ा घरों से इकट्ठा किया जाता है। अलग करने के बाद 80 प्रतिशत गीले और साठ प्रतिशत सूखे कूड़े का ट्रीटमेंट होता है। सफाई कर्मियों को सुरक्षा उपकरण, मेडिकल सुविधा, ट्रेनिंग दी जाती है।
हर माह सर्वश्रेष्ठ वर्कर को सम्मानित किया जाता है। सौ प्रतिशत सीवरेज, सार्वजनिक शौचालय की लोकेशन गूगल मैप पर अपलोड हैं। इनमें 90 फीसदी सुबह चार से रात दस बजे तक खुलते हैं। सर्वे में रिहायशी, व्यापारिक और सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट स्टेशन के आस-पास के इलाके साफ मिले। सौ फीसदी लोगों को पता था कि शहर सर्वेक्षण में हिस्सा ले रहा है और 98 प्रतिशत सफाई से संतुष्ट मिले। शॉर्ट मूवी और जिंगल के जरिए लोगों को जागरूक किया गया।
रोपड़ के 96 फीसदी लोग सफाई से संतुष्ट
रोपड़ को 50000 से एक लाख आबादी वाले शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यहां 95 प्रतिशत घरों से कूड़ा इकट्ठा होता है। सैनिटरी स्टाफ की मॉनिटरिंग है। शौचालयों में पानी, बिजली, सफाई और वेंटिलेशन थी। बस स्टेशन साफ था, दुकानों पर डस्टबिन लगे थे। सिटीजन फीडबैक में 96 फीसदी लोगों ने सफाई पर संतुष्टि जताई। 85 प्रतिशत ने कहा कि अब बाजारों में आसानी से कूड़ेदान मिल जाते हैं।
दिड़बा एक साल में 774 से 115 पर पहुंचा
संगरूर के दिड़बा कस्बे को फास्टेस्ट मूवर्स का खिताब मिला है, इसकी जोनल रैंकिंग एक साल में 774 से 115 पर पहुंच गई। यहां सारे बाजारों में ट्विन-बिन की सुविधा है। 280 लोगों का फीडबैक लिया गया, जिनका मानना था कि एक साल में सफाई में काफी सुधार हुआ है। लोग कूड़ेदान का प्रयोग कर रहे हैं, शौचालय साफ मिले। 80 फीसदी से ज्यादा रिहायशी और व्यापारिक इलाका सौ प्रतिशत साफ मिला।
जीरा के सिर बंधा सेहरा
फिरोजपुर जिले के जीरा कस्बे को 25-50 हजार आबादी वाले शहरों में सिटीजन फीडबैक में बेस्ट माना गया है। यहां की 36732 आबादी 16 वार्डों में रहती है। सभी को पता था कि शहर सर्वे में हिस्सा ले रहा है और वे सफाई से संतुष्ट थे। 99.74 फीसदी ने कहा कूड़ेदान आसानी से मिल जाते हैं, 99.47 ने कहा बाजारों में यूरिनल हैं। 98.50 प्रतिशत रिहायशी और व्यापारिक इलाका साफ मिला। 1453 लोगों ने स्वच्छता एप डाउनलोड किया था।
भोगपुर ने मारी लंबी छलांग
जालंधर जिले की भोगपुर नगर पंचायत की जोनल रैंकिंग पिछले साल की 514 से बढ़ कर 123 हो गई। यहां 3802 घर हैं और 99 प्रतिशत लोग जानते थे कि पंचायत सर्वेक्षण में हिस्सा ले रही है। लोग सफाई और शौचालयों की स्थिति से संतुष्ट थे। 99.5 फीसदी ने कहा कि बाजारों में कूड़ेदान और यूरिनल हैं। 83 प्रतिशत रिहायशी और व्यापारिक इलाका साफ मिला।
भाई रूपा की खाद की हर तरफ डिमांड
बठिंडा जिले की रामपुरा फूल सब-डिवीजन की भाई रूपा नगर पंचायत को 25000 से कम आबादी वाले शहरों में इनोवेशंस और बेस्ट प्रैक्टिस के लिए खिताब मिला है। यहां लोगों को डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन और कूड़े को अलग करने के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए खास कैंपेन चलाया गया। गीले कूड़े से खाद बनाने और सूखे कूड़े को री-साइकिल करने के बारे में बताने को वर्कशॉप आयोजित की गई।
सारे शहर का गीला कूड़ा एक जगह इकट्ठा किया जाता है। फिर सारे वार्डों से इकट्ठा किया गया गोबर इस पर डाला जाता है। 90 दिन में इसकी बेहतरीन खाद तैयार हो जाती है। आसपास के किसानों में भाई रूपा की खाद की डिमांड बढ़ रही है।