पंजाब : सुखबीर बादल का किसानों ने किया घेराव, पथराव में तीन अकाली कार्यकर्ता जख्मी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में सोमवार को नतमस्तक होने पहुंचे शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल को किसानों के जबरदस्त आक्रोश का सामना करना पड़ा। किसानों ने सुखबीर बादल की गाड़ी का घेराव कर नारेबाजी की। इस पर पुलिस उन्हें दूसरे रास्ते से ले गई। इसके बाद किसानों को समझाने पहुंचे अकाली नेताओं से धक्कामुक्की की गई। इस दौरान अकाली दल के जिला प्रधान जगदीप सिंह चीमा की पगड़ी उतर गई। इसके बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया जिसमें अकाली दल के तीन सदस्य जख्मी हो गए।
शहीदी सभा के समापन के एक दिन बाद सोमवार को सुखबीर बादल गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब पहुंचे। यहां माथा टेकने के बाद वे गुरुद्वारे के बैठक हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान बाहर बड़ी संख्या में किसान इकट्ठे हो गए और नारेबाजी करने लगे। सुखबीर के सुरक्षाकर्मी ने उन्हें इसकी जानकारी दी। इस पर सुखबीर तुरंत वहां से निकल पड़े।
किसानों ने उनके काफिले को काले झंडे दिखाए। किसानों ने काफिले का घेराव कर नारेबाजी की। इससे पहले कि प्रदर्शनकारी सुखबीर बादल की गाड़ी तक पहुंचते, हालात को भांपते हुए पुलिस आनन-फानन उन्हें दूसरे रास्ते से निकाल ले गई। इस घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान जगदीप सिंह चीमा, एसजीपीसी सदस्य अवतार सिंह रया और अन्य अकाली नेता व कार्यकर्ता किसानों को माता गुजरी लंगर हाल के पास समझाने पहुंचे। इस पर स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। धक्कामुक्की के दौरान जगदीप सिंह चीमा की पगड़ी उतर गई। अवतार सिंह रया समेत अन्य लोगों को किसानों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। इस दौरान पथराव भी हुआ। इसमें तीन लोग जख्मी हो गए।
किसान बोले- अकाली-भाजपा नेताओं का विरोध जारी रहेगा
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल भाजपा का दूसरा रूप है। अकाली और भाजपा ने मिलकर किसानों से धोखा किया है, इसीलिए विरोध किया जा रहा है। अकाली-भाजपा नेताओं का विरोध आगे भी जारी रहेगा।
कोई पुलिस कार्रवाई नहीं करना चाहते : चीमा
शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान जगदीप सिंह चीमा का कहना है कि जो लोग गुरुघर में मर्यादा का उल्लंघन कर विरोध प्रदर्शन करते हैं, वे सिख नहीं हो सकते। उनकी दस्तार उछालने के सवाल पर चीमा ने कहा कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, मैं बिल्कुल ठीक हूं और न ही कोई पुलिस कार्रवाई करना चाहता हूं।
केंद्र सरकार को किसानों की परवाह नहीं : सुखबीर
प्रेस वार्ता के दौरान सुखबीर बादल ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की सीमा पर बुजुर्ग किसान, माताएं-बहनें अपने बच्चों के साथ ठंड में बैठी हैं। केंद्र सरकार को उनकी कोई परवाह नहीं है। आंदोलन में करीब 50 किसान शहीद हो गए हैं। केंद्र सरकार के कई मंत्री मान चुके हैं कि कृषि कानूनों में 90 फीसदी कमियां हैं फिर भी केंद्र सरकार कानून रद्द नहीं कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अकाली दल की पीठ पर छुरा मारा है। अकाली दल किसान आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए संबंधित जिलों में अखंड पाठ करवाएगा और किसान आंदोलन की जीत के लिए अरदास करेगा। पहला अखंड पाठ तलवंडी साबो में दो जनवरी को रखा जाएगा।