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पंजाब: निकायों की जमीनों पर काबिज लोग बनेंगे मालिक, बस ये शर्त जरूरी
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 29 Oct 2017 09:05 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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नगर निगमों, काउंसिलों और पंचायतों की जमीनों पर बीस वर्षों से काबिज लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय निकाय विभाग इन लोगों से मार्केट रेट के हिसाब से जगह की कीमत लेकर इन्हें मालिकाना हक देगा। विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
पंजाब में बड़ी संख्या में लोग वर्षों से निकायों की जमीनों पर काबिज हैं। बहुत से मामलों में कोर्ट केस चल रहे हैं। कहीं निकायों को मामूली किराया मिल रहा है, तो कहीं केस के कारण किराया भी नहीं मिल रहा। इसे देखते हुए निकाय विभाग ने यह नीति बनाई है। नगर निगमों की सीमा में 120-150 वर्ग गज की रिहायशी इकाई और 40-50 वर्ग गज की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू और उसका 25 प्रतिशत देना होगा। 120 वर्ग गज से कम की रिहायशी इकाई और 40 वर्ग गज से कम की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू के बराबर रकम देनी होगी। नगर काउंसिलों व पंचायतों में 160-200 वर्ग गज की रिहायशी इकाई और 40-50 वर्ग गज की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू और उसका 25 फीसदी देना होगा।
वहीं, 160 वर्ग गज से कम की रिहायशी इकाई और 40 वर्ग गज से कम की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू के बराबर रकम देनी होगी। आवेदकों को 31 मार्च 2018 तक समर्थ अधिकारी को अर्जी देनी होगी। साथ ही सीवरेज-पानी, बिजली बिल या अन्य दस्तावेज देने होंगे, जो यह साबित करें कि वह बीस साल से उस जगह पर काबिज है। पड़ताल के बाद अथॉरिटी द्वारा उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया जाएगा। लेटर जारी होने के 30 दिन में कुल रकम का एक चौथाई जमा करवाना होगा। बाकी रकम तीन बराबर ब्याज रहित सालाना किस्तों में देनी होगी। अगर कोई पूरी रकम तीस दिन में देता है तो उसे पांच फीसदी की छूट मिलेगी।
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पंजाब में बड़ी संख्या में लोग वर्षों से निकायों की जमीनों पर काबिज हैं। बहुत से मामलों में कोर्ट केस चल रहे हैं। कहीं निकायों को मामूली किराया मिल रहा है, तो कहीं केस के कारण किराया भी नहीं मिल रहा। इसे देखते हुए निकाय विभाग ने यह नीति बनाई है। नगर निगमों की सीमा में 120-150 वर्ग गज की रिहायशी इकाई और 40-50 वर्ग गज की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू और उसका 25 प्रतिशत देना होगा। 120 वर्ग गज से कम की रिहायशी इकाई और 40 वर्ग गज से कम की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू के बराबर रकम देनी होगी। नगर काउंसिलों व पंचायतों में 160-200 वर्ग गज की रिहायशी इकाई और 40-50 वर्ग गज की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू और उसका 25 फीसदी देना होगा।
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वहीं, 160 वर्ग गज से कम की रिहायशी इकाई और 40 वर्ग गज से कम की अन्य इकाइयों के लिए मार्केट वैल्यू के बराबर रकम देनी होगी। आवेदकों को 31 मार्च 2018 तक समर्थ अधिकारी को अर्जी देनी होगी। साथ ही सीवरेज-पानी, बिजली बिल या अन्य दस्तावेज देने होंगे, जो यह साबित करें कि वह बीस साल से उस जगह पर काबिज है। पड़ताल के बाद अथॉरिटी द्वारा उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया जाएगा। लेटर जारी होने के 30 दिन में कुल रकम का एक चौथाई जमा करवाना होगा। बाकी रकम तीन बराबर ब्याज रहित सालाना किस्तों में देनी होगी। अगर कोई पूरी रकम तीस दिन में देता है तो उसे पांच फीसदी की छूट मिलेगी।
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मिलेंगे करोड़ो, प्रॉपर्टी टैक्स भी लगेगा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
पिछली सरकार ने बनाई थी नीति, दस माह लटकाई
अकाली-भाजपा सरकार ने दिसंबर 2016 में यह नीति बनाई थी। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद यह अटक गई। चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आई तो इसे रोक दिया गया। कांग्रेस ने कई महीने तक इसे लटकाए रखा। अब उसी पुरानी नीति को सरकार ले आई है।
मिलेंगे करोड़ो, प्रॉपर्टी टैक्स भी लगेगा
पुरानी जायदाद कलेक्टर रेट पर देने से जहां निकाय विभाग को करोड़ों रुपये की आय होगी। वहीं, एक नई आमदन का साधन भी शुरू होगा। मालिकाना हक देने के बाद निकाय विभाग इन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगा सकेगा। जिससे निकायों को सालाना आय का एक और साधन मिलेगा। इसके अलावा बड़ी संख्या में चल रहे कोर्ट केस भी खत्म होंगे जिससे खर्च भी बचेगा।
अकाली-भाजपा सरकार ने दिसंबर 2016 में यह नीति बनाई थी। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद यह अटक गई। चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आई तो इसे रोक दिया गया। कांग्रेस ने कई महीने तक इसे लटकाए रखा। अब उसी पुरानी नीति को सरकार ले आई है।
मिलेंगे करोड़ो, प्रॉपर्टी टैक्स भी लगेगा
पुरानी जायदाद कलेक्टर रेट पर देने से जहां निकाय विभाग को करोड़ों रुपये की आय होगी। वहीं, एक नई आमदन का साधन भी शुरू होगा। मालिकाना हक देने के बाद निकाय विभाग इन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगा सकेगा। जिससे निकायों को सालाना आय का एक और साधन मिलेगा। इसके अलावा बड़ी संख्या में चल रहे कोर्ट केस भी खत्म होंगे जिससे खर्च भी बचेगा।