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पंजाब मेडिकल काउंसिल और डाक्टरों में ठनी
जालंधर।
Updated Wed, 05 Nov 2014 11:03 PM IST
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पंजाब मेडिकल काउंसिल (पीएमसी) की ओर से पटियाला के दो डॉक्टरों के खिलाफ की गई पुलिस शिकायत का नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) ने विरोध किया है। नीमा का कहना है कि पीएमसी पहले अपने गिरेबान में झांके फिर उनपर उंगली उठाए।
पीएमसी ने पुलिस में शिकायत दी थी किडॉक्टर सुदीप सिंह व डॉक्टर मनप्रीत कौर एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जो गैरकानूनी है। बुधवार को जालंधर में पत्रकार वार्ता में नीमा पंजाब प्रधान अनिल जोशी, जालंधर के प्रधान विशाल भनोट, उप प्रधान पीके गुगलानी ने बताया कि पंजाब में जीएमएस व बीएमएस डॉक्टरों को कानूनी अधिकार मिला हुआ है कि वो एलोपैथिक दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने पीएमसी के रजिस्ट्रार संजीव गोयल से बात की थी। इसमें उन्होंने कहा कि एलोपैथिक दवा का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई के लिए सिफारिश तो की गई है लेकिन इस सिफारिश को रद्द किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि एमसी को इन डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है। उनकी अपनी एसोसिएशन बनी हुई है जो किसी डॉक्टर के बारे में फैसला ले सकती है।
काउंसिल को उनके डॉक्टरों की शिकायत करने की बजाय झोलाछाप डॉक्टरों व उन केमिस्टों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो बिना डिग्री लोगों को दवा दे रहे हैं। इस कार्रवाई को बंद नहीं किया गया तो उनकी एसोसिएशन पीएमसी के खिलाफ संघर्ष करने को मजबूर होगी।
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पीएमसी ने पुलिस में शिकायत दी थी किडॉक्टर सुदीप सिंह व डॉक्टर मनप्रीत कौर एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जो गैरकानूनी है। बुधवार को जालंधर में पत्रकार वार्ता में नीमा पंजाब प्रधान अनिल जोशी, जालंधर के प्रधान विशाल भनोट, उप प्रधान पीके गुगलानी ने बताया कि पंजाब में जीएमएस व बीएमएस डॉक्टरों को कानूनी अधिकार मिला हुआ है कि वो एलोपैथिक दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने पीएमसी के रजिस्ट्रार संजीव गोयल से बात की थी। इसमें उन्होंने कहा कि एलोपैथिक दवा का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई के लिए सिफारिश तो की गई है लेकिन इस सिफारिश को रद्द किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि एमसी को इन डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है। उनकी अपनी एसोसिएशन बनी हुई है जो किसी डॉक्टर के बारे में फैसला ले सकती है।
काउंसिल को उनके डॉक्टरों की शिकायत करने की बजाय झोलाछाप डॉक्टरों व उन केमिस्टों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो बिना डिग्री लोगों को दवा दे रहे हैं। इस कार्रवाई को बंद नहीं किया गया तो उनकी एसोसिएशन पीएमसी के खिलाफ संघर्ष करने को मजबूर होगी।