चंडीगढ़ : किसान नेता रूलदू सिंह ने कहा- दिल्ली अब हमारा मायका, आज 12 घंटे होगा भारत बंद, रेल भी रोकेंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन शुक्रवार को 12 घंटे भारत बंद में शरीक होंगे। इस दौरान किसान संगठन रेल भी रोकेंगे। पंजाब किसान यूनियन के प्रधान रूलदू सिंह मानसा ने कहा कि पंजाब के किसानों की यह दूसरी आजादी की जंग है, जो केंद्र सरकार की जिद के कारण शुरू हुई है। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि अब तो किसानों के लिए दिल्ली मायके जैसी हो गई है।
चंडीगढ़ सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र ने हमारे ऊपर हमले करने में कोई कसर नहीं छोड़ा है लेकिन किसान संगठनों की सूझबूझ के कारण कृषि कानूनों के विरोध में उनका आंदोलन अभी भी अच्छी तरह चल रहा है।
शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान हमने किया है, जबकि यह पहली बार नहीं है लेकिन आज होने वाला भारत बंद कुछ अलग होने वाला है। इस बार बंद 12 घंटे का रखा गया है। इसे अलग-अलग संगठन व ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन देने का एलान किया है। बंद सुबह 6 से शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान किसान विरोध में रेल पटरियों पर भी जाएंगे और रेल यातायात को ठप करेंगे। पंजाब किसान यूनियन के प्रधान ने कहा कि भारत बंद एक महीने का होना चाहिए।
26 जनवरी की घटना के बाद किसान आंदोलन एक मजबूत दिशा में आगे बढ़ा है, जो निश्चित ही सफल होकर रहेगा। अब किसान आंदोलन को पंजाब की पंचायतों और खाप पंचायतों का भी समर्थन मिल रहा है। आंदोलन में शामिल होने के लिए किसी पंचायत से 10 तो कहीं से 5 किसान शामिल हो रहे हैं। पंजाब के हर गांव से किसान आंदोलन को समर्थन मिल रहा है।
लक्खा सिधाना पर हो चुका है फैसला
पंजाब किसान यूनियन के प्रधान मानसा ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली हिंसा के आरोपी लक्खा सिधाना पर फैसला ले चुका है। अब वह आंदोलन के मंच से भाषण देगा। दीप सिद्धू को लेकर अभी कोई फैसला किसान संगठनों ने नहीं लिया है।
‘कैप्टन ने ठेके क्यों नहीं किए बंद’
कोरोना संक्रमण को लेकर पंजाब में स्कूलों को बंद किए जाने पर मानसा ने कैप्टन के फैसले पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने स्कूलों को तो बंद कर दिया लेकिन शराब के ठेकों को नहीं। यह फैसला न्यायोचित नहीं है।