Highcourt: एचएमटी पिंजौर बंद करने पर लगी मुहर, जेलों के बदतर हालात पर हरियाणा, पंजाब और यूटी से जवाब तलब
हाईकोर्ट को बताया गया कि एचएमटी पिंजौर से 800 से ज्यादा कर्मियों ने वीआरएस ले ली थी लेकिन बड़ी संख्या में कर्मियों ने वीआरएस लेने से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए भारत सरकार के फैसले को सही करार दिया।
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एचएमटी पिंजौर को बंद करने के भारत सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत सरकार के फैसले पर मोहर लगा दी है। याचिका दाखिल करते हुए एचएमटी पिंजौर के तत्कालीन कर्मचारियों ने हाईकोर्ट को बताया कि भारत सरकार ने एचएमटी को बंद करते हुए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं को जबरन वीआरएस देना ठीक नहीं है। उच्च अधिकारियों को वीआरएस देते हुए उन्हें मोटी राशि दी गई जबकि कर्मियों को मामूली राशि दी गई।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें एचएमटी पिंजौर की जगह किसी अन्य यूनिट में भेज देना चाहिए था जबकि ऐसा नहीं किया गया। हाईकोर्ट को बताया गया कि एचएमटी पिंजौर से 800 से ज्यादा कर्मियों ने वीआरएस ले ली थी लेकिन बड़ी संख्या में कर्मियों ने वीआरएस लेने से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए भारत सरकार के फैसले को सही करार दिया। कोर्ट ने कहा कि एचएमटी में बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार का है और केंद्र सरकार ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद एचएमटी को बंद करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका दिया है। एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संचालक विजय बंसल ने कहा कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई में कर्मियों का साथ देंगे।
बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर मांगा जवाब
जेलों में कैदियों की अप्राकृतिक मृत्यु, बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य बदहालियों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से जवाब तलब कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में कैदियों की बदहाल स्थिति के मामले में दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए देश के सभी हाईकोर्ट को इस मामले में संज्ञान लेने के आदेश दिएथे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा था कि सभी हाईकोर्ट उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली जेलों में सुधार के लिए सुनवाई करें। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा था कि जेलों में कैदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामले सामने आ रहे हैं। जेलों की हालत ऐसी है कि कई कैदी इससे परेशान होकर आत्महत्या तक कर रहे हैं। ऐसे कैदियों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने महसूस किया है कि जेलों में कैदियों को निचले स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जबकि स्वास्थ्य सुविधाएं प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। कोर्ट ने कहा था कि जेलों का माहौल सुधारे जाने की जरूरत है। सिर्फ जेल का नाम बदल कर सुधार गृह कर देने से कुछ भी नहीं बदलेगा, बल्कि जेलों में सुधार भी नजर आना जरूरी है। शिमला और दिल्ली में ओपन जेल का कॉन्सेप्ट काफी हद तक सफल रहा है, लिहाजा इस दिशा में काम किया जाना चाहिए। इसके बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से जवाब तलब कर लिया है।