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पंजाब की एक्साइज पॉलिसी को हाईकोर्ट का बड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 10 Jun 2016 01:05 PM IST
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की एक्साइज पालिसी में किए गए नए प्रावधान को लेकर करारा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की वर्ष 2016-17 की एक्साइज पालिसी के तहत लागू एल1ए लाइसेंस के प्रावधान को गैरकानूनी और अवैध करार देते हुए रद करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को यह मौका भी दिया कि वह अपनी पालिसी में जरूरी संशोधन कर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।
जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस राज राहुल गर्ग की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में दायर विभिन्न याचिकाओं पर गत 10 मई को सुरक्षित किया गया फैसला वीरवार को सुना दिया। फैसले में डिवीजन बेंच ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से एक्साइज पालिसी में किया गया प्रावधान किसी पूर्व निर्धारित नीति के तहत नहीं है और सरकार का यह प्रावधान पूरी तरह गलत है। हाईकोर्ट में एक्साइज पालिसी के इस प्रावधान के खिलाफ कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिनमें एल1ए लाइसेंसिंग को रद करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि पंजाब सरकार नई एक्साइज पालिसी में एल1ए का प्रावधान कर कुछ खास लोगों को शराब के कारोबार में एकाधिकार का अवसर प्रदान कर रही है। याचिकाओं में कहा गया कि एल1ए लाइसेंसिंग के तहत यह व्यवस्था की गई है कि जिस व्यक्ति या कंपनी के पास एल1ए लाइसेंस होगा, केवल वही किसी भी शराब निर्माता कंपनी से शराब खरीद सकेगा और प्रदेश के एल1 लाइसेंसधारकों को एल1ए लाइसेंसधारक से शराब खरीदकर आगे बेचने का अधिकार होगा।
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इस प्रावधान से पहले प्रदेश में एल1 लाइसेंसधारक भी सीधे शराब निर्माता कंपनी से शराब खरीद सकते थे। सरकार के इसी फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाओं में कहा गया कि यह प्रावधान न सिर्फ पंजाब की एक्साइज पालिसी-2014 का उल्लंघन है बल्कि पंजाब लिकर लाइसेंस रूल्स-1956 का प्रावधानों के विरुद्ध भी है। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर यह भी बताया गया कि पंजाब में चार कंपनियों के पास बीते वर्ष शराब कारोबार का 90 फीसदी मार्केट शेयर था।
इस जवाब पर याचिकाकर्ता के वकील मोहन जैन से सवाल उठाया था कि जब पूरे राज्य में शराब की बिक्री में चार कंपनियों का वर्चस्व है तो यही कंपनियां अब एल1ए लाइसेंस हासिल करेंगी, जिससे आगे भी इन्हीं चार कंपनियों का शराब के कारोबार पर एकाधिकार बना रहेगा। सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने भी पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह लाइसेंसधारकों द्वारा स्टॉक उठाने पर रोक लगाए, नहीं तो इस मामले में अगर कारोबारियों को कोई नुकसान हुआ तो इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।
तब पंजाब के एक्साइज अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि विभाग की ओर से अब तक किसी भी एल1ए लाइसेंस धारक को परमिट या स्टॉक जारी नहीं किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे कि इस मामले में अगले आदेश तक सरकार कोई और एल1ए लाइसेंस जारी न करे और जिन्हें लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, वह भी शराब की बिक्री शुरू न करें।
वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि जब राज्य में किसी को परमिट दिया नहीं गया तो एक अप्रैल के बाद से राज्य में बिक रही शराब कहां से आ रही है। हाईकोर्ट ने मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस राज राहुल गर्ग की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में दायर विभिन्न याचिकाओं पर गत 10 मई को सुरक्षित किया गया फैसला वीरवार को सुना दिया। फैसले में डिवीजन बेंच ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से एक्साइज पालिसी में किया गया प्रावधान किसी पूर्व निर्धारित नीति के तहत नहीं है और सरकार का यह प्रावधान पूरी तरह गलत है। हाईकोर्ट में एक्साइज पालिसी के इस प्रावधान के खिलाफ कई याचिकाएं दायर हुई थीं, जिनमें एल1ए लाइसेंसिंग को रद करने की मांग की गई थी।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि पंजाब सरकार नई एक्साइज पालिसी में एल1ए का प्रावधान कर कुछ खास लोगों को शराब के कारोबार में एकाधिकार का अवसर प्रदान कर रही है। याचिकाओं में कहा गया कि एल1ए लाइसेंसिंग के तहत यह व्यवस्था की गई है कि जिस व्यक्ति या कंपनी के पास एल1ए लाइसेंस होगा, केवल वही किसी भी शराब निर्माता कंपनी से शराब खरीद सकेगा और प्रदेश के एल1 लाइसेंसधारकों को एल1ए लाइसेंसधारक से शराब खरीदकर आगे बेचने का अधिकार होगा।
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इस प्रावधान से पहले प्रदेश में एल1 लाइसेंसधारक भी सीधे शराब निर्माता कंपनी से शराब खरीद सकते थे। सरकार के इसी फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाओं में कहा गया कि यह प्रावधान न सिर्फ पंजाब की एक्साइज पालिसी-2014 का उल्लंघन है बल्कि पंजाब लिकर लाइसेंस रूल्स-1956 का प्रावधानों के विरुद्ध भी है। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर यह भी बताया गया कि पंजाब में चार कंपनियों के पास बीते वर्ष शराब कारोबार का 90 फीसदी मार्केट शेयर था।
इस जवाब पर याचिकाकर्ता के वकील मोहन जैन से सवाल उठाया था कि जब पूरे राज्य में शराब की बिक्री में चार कंपनियों का वर्चस्व है तो यही कंपनियां अब एल1ए लाइसेंस हासिल करेंगी, जिससे आगे भी इन्हीं चार कंपनियों का शराब के कारोबार पर एकाधिकार बना रहेगा। सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने भी पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह लाइसेंसधारकों द्वारा स्टॉक उठाने पर रोक लगाए, नहीं तो इस मामले में अगर कारोबारियों को कोई नुकसान हुआ तो इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।
तब पंजाब के एक्साइज अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि विभाग की ओर से अब तक किसी भी एल1ए लाइसेंस धारक को परमिट या स्टॉक जारी नहीं किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे कि इस मामले में अगले आदेश तक सरकार कोई और एल1ए लाइसेंस जारी न करे और जिन्हें लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, वह भी शराब की बिक्री शुरू न करें।
वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि जब राज्य में किसी को परमिट दिया नहीं गया तो एक अप्रैल के बाद से राज्य में बिक रही शराब कहां से आ रही है। हाईकोर्ट ने मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।