{"_id":"59368ee14f1c1b16508b4583","slug":"punjab-haryana-highcourt-decision-for-government-employees","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्घटना मुआवजा राशि से नहीं काटे जा सकते मृतक के सर्विस लाभ: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्घटना मुआवजा राशि से नहीं काटे जा सकते मृतक के सर्विस लाभ: हाईकोर्ट
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 Jun 2017 04:46 PM IST
विज्ञापन
Demo Pic
- फोटो : google
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने देश भर के सरकारी कर्मचारियों व उनके परिवार को मृतक कर्मी के सेवा लाभों से जुड़ी बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन दुर्घटना के क्लेम में से मृतक कर्मचारी के सेवा लाभों की कटौती नहीं की जा सकती है। पीएफ, ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन व अन्य लाभ तो कर्मचारी की सामान्य मौत की स्थिति में भी मिलने ही हैं। ऐसे में दुर्घटना की स्थिति में हुई मौत पर इसे सामान्य परिस्थिति की मौत नहीं माना जा सकता है और एक्सीडेंट क्लेम में से इन लाभों की कटौती नहीं हो सकती है।
मामला पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल की वाहन दुर्घटना में हुई मौत से जुड़ा हुआ है। इस मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 7 मार्च 1998 में कांस्टेबल की आय 3434 रुपये मानते हुए उसके आश्रितों को 3,84,000 रुपये बतौर मुआवजा भुगतान करने के आदेश दिए थे। पंजाब सरकार ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के 7 मार्च 1998 के इस फैसले को चुनौती दी थी। पंजाब सरकार ने कहा था कि मृतक की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है और उसे फैमिली पेंशन के तौर पर 875 रुपये भुगतान किया जाता है।
साथ ही मृतक के फंड आदि भी पत्नी को दे दिए गए हैं। ऐसे में मुआवजे के रूप में जो राशि देनी है, उसे इन सभी लाभ को हटाने के बाद जोड़ा जाए। पंजाब सरकार की इस याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पंजाब सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि मृतक की पत्नी को नौकरी के लिए वेतन और फैमिली पेंशन का भुगतान हो रहा है। ऐसे में यह राशि काट कर क्लेम की राशि तय की जानी चाहिए।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यदि हेड कांस्टेबल की मौत एक्सीडेंट में न होकर अन्य प्रकार से होती तो भी यह हित जारी किए जाते। इस मामले में एक्सीडेंट की परिस्थिति का लाभ क्लेम के माध्यम से दिया गया है। इस क्लेम राशि से कोई भी सरकारी लाभ काट कर इसका भुगतान करना सही नहीं होगा।
विज्ञापन
मामला पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल की वाहन दुर्घटना में हुई मौत से जुड़ा हुआ है। इस मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 7 मार्च 1998 में कांस्टेबल की आय 3434 रुपये मानते हुए उसके आश्रितों को 3,84,000 रुपये बतौर मुआवजा भुगतान करने के आदेश दिए थे। पंजाब सरकार ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के 7 मार्च 1998 के इस फैसले को चुनौती दी थी। पंजाब सरकार ने कहा था कि मृतक की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है और उसे फैमिली पेंशन के तौर पर 875 रुपये भुगतान किया जाता है।
विज्ञापन
साथ ही मृतक के फंड आदि भी पत्नी को दे दिए गए हैं। ऐसे में मुआवजे के रूप में जो राशि देनी है, उसे इन सभी लाभ को हटाने के बाद जोड़ा जाए। पंजाब सरकार की इस याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पंजाब सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि मृतक की पत्नी को नौकरी के लिए वेतन और फैमिली पेंशन का भुगतान हो रहा है। ऐसे में यह राशि काट कर क्लेम की राशि तय की जानी चाहिए।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यदि हेड कांस्टेबल की मौत एक्सीडेंट में न होकर अन्य प्रकार से होती तो भी यह हित जारी किए जाते। इस मामले में एक्सीडेंट की परिस्थिति का लाभ क्लेम के माध्यम से दिया गया है। इस क्लेम राशि से कोई भी सरकारी लाभ काट कर इसका भुगतान करना सही नहीं होगा।