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शिक्षक जिसने खुद में शैतान जगा लिया और मासूम की जान ले ली उसके लिए रहम नहीं: हाईकोर्ट

Sun, 19 May 2019 02:52 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 19 May 2019 02:52 PM IST
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Punjab Haryana High Court Rejected Lady Teacher Petition, who Killed little child
सांकेतिक तस्वीर
महिला शिक्षक की लुधियाना जिला अदालत द्वारा 5 साल की सजा के खिलाफ की गई अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह कैसी शिक्षक जिसने खुद में शैतान जागने दिया जो एक मासूम की जिंदगी निगल गया।
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याचिका दाखिल करते हुए महिला शिक्षक की ओर से बताया गया कि जुलाई 2002 में जगरूप सिंह गिर गया था। उसे अस्पताल ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई और मौत प्रकृतिक है। मृतक के पिता ने पैसा वसूलने के लिए एक कहानी बनाई जिसके अनुसार याची ने जगरूप को धूप में मुर्गा बनाया था और सिर में डंडा मारा था।
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याची ने कहा कि इस मामले में एक ही गवाह है जो मृतक की बहन है और उसकी गवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि याची और शिकायतकर्ता के बीच कोई आपसी विवाद नहीं था जो याची को जानबूझकर फंसाए। हाईकोर्ट ने याची को निर्दोष मानने से इनकार करते हुए यह मांग खारिज कर दी।
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कोर्ट ने आदेश में लिखा कि शिक्षक का काम बच्चों को इस प्रकार तैयार करना होता है जो समाज में स्वीकार हों। शिक्षण कार्य में करुणा, देखभाल और अनुशासन होता है जो महिला शिक्षक भूल गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में रक्षक की भक्षक बन गई जबकि शिक्षकों को दूसरा अभिभावक माना जाता है।

हाईकोर्ट ने सजा में दी कुछ राहत

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याची 75 वर्ष की है और एक हाथ से 90 प्रतिशत दिव्यांग भी। उसकी इस हालत पर विचार करते हुए उसकी बाकी की सजा को माफ किया जाता है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाना जरूरी है और ऐसे में याची मृतक के आश्रितों को 50 हजार रुपये का भुगतान करेगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो याची को अपनी बाकी की बची सजा भी पूरी करनी होगी।
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