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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court refused to consider sending child beggars to shelter home as illegal custody

High Court News: भीख मांगने वाले बच्चों को आश्रय गृह में रखना अवैध हिरासत नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की बच्चों के पिता की दलील

Sun, 05 Jun 2022 11:20 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 05 Jun 2022 11:20 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया कि वह याची और उसके बच्चों को राजस्थान ले जाने की व्यवस्था करें। राजस्थान में उन्हें केंद्र सरकार के क्वार्टर में रखा जाए और उनके भोजन आदि की उचित व्यवस्था की जाए।

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Punjab-Haryana High Court refused to consider sending child beggars to shelter home as illegal custody
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ सेक्टर 17 के प्लाजा से भीख मांगने वाले तीन नाबालिग बच्चों को आश्रय गृह भेजने के समाज कल्याण विभाग के निर्णय को अवैध हिरासत मानने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आश्रय गृह में बच्चे बंदी नहीं होते हैं बल्कि वहां पर वह पूरी तरह से संरक्षित होते हैं।

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याचिका दाखिल करते हुए मलोया निवासी पबुदन ने हाईकोर्ट को बताया कि अप्रैल माह में समाज कल्याण विभाग ने बच्चों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया था। इस दौरान याची के दो बेटों और एक बेटी को भीख मांगते हुए पाया। इसके बाद विभाग ने तीनों बच्चों का मेडिकल करवाया। मेडिकल के बाद दोनों लड़कों को मलोया के स्नेहालय और बेटी को सेक्टर 15 के आशियाना में भेज दिया गया। याची पिता ने कहा कि वह तीनों बच्चों का पिता है और ऐसे में उसे तीनों बच्चे सौंपे जाएं। 
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हाईकोर्ट में याची अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर कोई सबूत पेश नहीं कर पाया। इसके बाद उसने कहा कि वह अपने मूल स्थान राजस्थान जाना चाहता है। कोर्ट ने कहा कि एक ओर जहां बच्चों के लिए अच्छा भोजन, शिक्षा व अन्य बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं तो दूसरी ओर उन्हें पिता के प्यार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि बच्चों को आश्रय गृह में रखा गया तो यह उनके अभिभावकों के मौजूद होने के बावजूद उन्हें अनाथ करना होगा। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया कि वह याची और उसके बच्चों को राजस्थान ले जाने की व्यवस्था करें। राजस्थान में उन्हें केंद्र सरकार के क्वार्टर में रखा जाए और उनके भोजन आदि की उचित व्यवस्था की जाए। यह सभी सुविधाएं तब तक जारी रखी जाएं जब तक इस प्रकार के परिवारों के पुनर्वास की योजना के तहत उन्हें घर मुहैया न करवा दिया जाए।

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