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हाईकोर्ट की टिप्पणी- शादी अवैध हो या हुई ही न हो, सुरक्षा देने से इंकार नहीं किया जाना चाहिए
Wed, 01 Jan 2020 01:40 PM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 01 Jan 2020 01:40 PM IST
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा का अधिकार अन्य सभी अधिकारों से ऊपर है। कोर्ट ने कहा कि लड़का-लड़की की शादी अवैध हो या शादी ही न हो तो भी सुरक्षा से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने मानसा के एसएसपी को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। रन अवे कपल ने मानसा में विवाह किया था।
इसके बाद उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। कपल की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि लड़की की उम्र 18 साल है जबकि लड़के की 20 साल है। दोनों के परिवार वाले उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। सुरक्षा देने की मांग के विरोध में लड़की के परिजनों ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार लड़का शादी की न्यूनतम उम्र से भी छोटा है।
ऐसे में उनकी शादी वैध नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ने सुरक्षा का अधिकार दिया है जो अन्य अधिकारों से बड़ा है। इस मामले में भले ही लड़का शादी की न्यूनतम उम्र को पार नहीं कर पाया है, लेकिन इससे उसकी सुरक्षा का अधिकार नहीं छिन जाता।
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कोर्ट ने कहा कि भले ही दोनों की शादी अवैध हो, अमान्य हो या शादी न हो तो भी सुरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने मानसा के एसएसपी को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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इसके बाद उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। कपल की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि लड़की की उम्र 18 साल है जबकि लड़के की 20 साल है। दोनों के परिवार वाले उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। सुरक्षा देने की मांग के विरोध में लड़की के परिजनों ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार लड़का शादी की न्यूनतम उम्र से भी छोटा है।
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ऐसे में उनकी शादी वैध नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ने सुरक्षा का अधिकार दिया है जो अन्य अधिकारों से बड़ा है। इस मामले में भले ही लड़का शादी की न्यूनतम उम्र को पार नहीं कर पाया है, लेकिन इससे उसकी सुरक्षा का अधिकार नहीं छिन जाता।
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कोर्ट ने कहा कि भले ही दोनों की शादी अवैध हो, अमान्य हो या शादी न हो तो भी सुरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने मानसा के एसएसपी को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।