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Highcourt: विशेष समुदाय नहीं, सभी के पूज्य हैं महर्षि वाल्मीकि, पब्लिकेशन हाउस के खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज

Tue, 18 Apr 2023 02:38 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 18 Apr 2023 02:38 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा सिर्फ सनसनी पैदा करने के लिए एक कहानी गढ़ी गई है। न्यायालय यह समझने में विफल रहा है कि याचिकाकर्ताओं की पुस्तक में महर्षि वाल्मीकि के पूर्व जीवन के संदर्भों से कैसे एक उग्र रूप का अपमान किया गया है।

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Punjab-Haryana High Court ordered cancellation of FIR registered against publication house
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

महर्षि वाल्मीकि के जीवन परिवर्तन व इससे पूर्व के जीवन के संदर्भ को पुस्तक का हिस्सा बनाने को धार्मिक भावनाएं आहत करने वाला बताते हुए कपूरथला में दर्ज एफआईआर व इससे जुड़ी कार्रवाई को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के किसी विशेष समुदाय या संप्रदाय से संबंधित होने की कल्पना करना ही गलत है और वह सबके लिए पूज्य हैं।

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याचिका दाखिल करते हुए पब्लिकेशन हाउस और उनके साझेदार की ओर से बताया गया कि उन्होंने पवित्र पुस्तक का प्रकाशन किया था। इस पुस्तक के प्रकाशित होने के कई वर्ष बाद अचानक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज कर लिया गया। याची ने बताया कि गुरुग्रंथ साहिब में भी यह जिक्र है कि महर्षि वाल्मीकि परिवर्तित हुए थे।
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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उनकी मंशा किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी और ऐसे में उन्होंने शिकायतकर्ता को जिस हिस्से से आपत्ति थी, उसे भी हटा दिया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि ऐतिहासिक पुस्तकों और प्राचीन शास्त्रों के अनुसार महर्षि वाल्मीकि ध्यानपूर्ण तपस्या में रहे और ऐसे ही युग बीत गए। अनंत और समाधि में रहते हुए वह उस चींटी की पहाड़ी से भी बेखबर रहे जिसने उनके पूरे शरीर को घेर लिया था। इसी के चलते उन्हें वाल्मीकि का नाम मिला। महर्षि वाल्मीकि के किसी विशेष समुदाय या संप्रदाय से संबंधित होने की कल्पना करना गलत है। वह एक संप्रदाय य समुदाय के नहीं हैं बल्कि सभी के लिए पूजनीय हैं।
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यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा सिर्फ सनसनी पैदा करने के लिए एक कहानी गढ़ी गई है। न्यायालय यह समझने में विफल रहा है कि याचिकाकर्ताओं की पुस्तक में महर्षि वाल्मीकि के पूर्व जीवन के संदर्भों से कैसे एक उग्र रूप का अपमान किया गया है। उनके पिछले जीवन का संदर्भ न केवल लोकप्रिय विश्वास का विषय है बल्कि विभिन्न धार्मिक और साहित्यिक विषय भी हैं। न्यायालय हुए महर्षि वाल्मीकि के पहले के जीवन के संदर्भ में कुछ भी अपमानजनक देखने में विफल रहा है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए एफआईआर को खारिज कर दिया।

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