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पंजाब: बिना कस्टम ड्यूटी दिए कन्साइनमेंट किया जारी, एल्युमीनियम बता सिगरेट इंपोर्ट की, हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी जांच
Thu, 14 Oct 2021 07:48 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Oct 2021 07:48 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि दोषियों को सजा दिलाने के स्थान पर दो विभाग आपस में लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए 30 दिन में प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक कन्साइनमेंट को बिना फिजिकल जांच और कस्टम ड्यूटी वसूले क्लीयरेंस देने के मामले में दाखिल जमानत याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि दो विभाग जिम्मेदारी तय करने के लिए इस कदर लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने अब इस घोटाले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है और 30 दिन में प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी सुनील दत्त ने हाईकोर्ट को बताया कि एक कंपनी ने दुबई से एल्युमीनियम मंगवाने के लिए एक कस्टम इंस्पेक्टर के माध्यम से याची से संपर्क किया था। याची जी कार्ड होल्डर है जो कस्टम क्लीयरेंस तथा कस्टम ड्यूटी असेसमेंट के लिए फाइलों को क्लीयर करवाने में मदद करता है। जब यह कन्साइनमेंट पहुंचा तो बिना कस्टम ड्यूटी अदा किए इसे क्लीयर कर दिया गया।
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याची ने बताया कि वह सीजीएसटी लुधियाना कमिश्नरेट का खबरी है और उसने कस्टम ड्यूटी की बगैर अदायगी और फिजिकल वेरिफिकेशन के बिना क्लीयरेंस देने की जानकारी सीजीएसटी कमिश्नरेट को दे दी। इसके बाद जब कन्साइनमेंट देखा गया तो उसकी सील बंद थी और जब खोला गया तो उसमें एल्युमीनियम के स्थान पर 360000 सिगरेट मौजूद थी। जब कस्टम विभाग ने जांच शुरू की तो कस्टम एक्ट में याची को नोटिस जारी कर पेश होने को कहा। याची ने कहा कि उसने बड़े घोटाले को उजागर किया है। कन्साइनमेंट को क्लीयरेंस देते समय जांच अधिकारी तत्कालीन पोर्ट इंचार्ज था।
सीजीएसटी कमिश्नरेट लुधियाना की ओर से कोर्ट में एक गुप्त नोट देकर बताया गया कि याची उनका खबरी है और विभाग की तरफ से उसे क्लीन चिट दे दी। याचिका में बताया गया कि कई कस्टम अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है और याची को भी पेश होने का नोटिस दिया गया है। हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि दोषियों को सजा दिलाने के स्थान पर दो विभाग आपस में लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए 30 दिन में प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।