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हाईकोर्ट ने पीजीआई को दिए महिला का सुरक्षित गर्भपात करवाने के आदेश, गंभीर बीमारी से ग्रस्त है भ्रूण
Sat, 25 Apr 2020 02:43 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 25 Apr 2020 02:43 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला के गर्भपात की इजाजत दे दी है और साथ ही पीजीआई को जल्द से जल्द सुरक्षित गर्भपात करवाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस सुधीर मित्तल ने यह आदेश महिला के गर्भ की जांच करने वाले पीजीआई के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर दिए हैं।
बता दें की पंजाब की एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके बताया था कि पीजीआई में जांच में सामने आया था कि उसके गर्भ में पल रहा शिशु डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रस्त है। अगर उसका यह बच्चा पैदा हुआ तो वह शारीरिक और मानसिक तौर पर अक्षम होगा। इसलिए महिला को गर्भपात करवाने का सुझाव दिया गया था।
लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन एंड प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत अगर गर्भ 20 सप्ताह से ज्यादा का हो गया हो तो जांच के लिए मेडिकल बोर्ड और गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की इजाजत अनिवार्य होती है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को मेडिकल बोर्ड का गठन कर महिला के गर्भ की जांच कराने और उसकी सीलबंद रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
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पीजीआई के मेडिकल बोर्ड द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि गर्भ में पल रहा शिशु डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रसित है। अगर वह पैदा हुआ तो शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम रह जाएगा और सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा। इस रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को तत्काल महिला का गर्भपात करने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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बता दें की पंजाब की एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके बताया था कि पीजीआई में जांच में सामने आया था कि उसके गर्भ में पल रहा शिशु डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रस्त है। अगर उसका यह बच्चा पैदा हुआ तो वह शारीरिक और मानसिक तौर पर अक्षम होगा। इसलिए महिला को गर्भपात करवाने का सुझाव दिया गया था।
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लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन एंड प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत अगर गर्भ 20 सप्ताह से ज्यादा का हो गया हो तो जांच के लिए मेडिकल बोर्ड और गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की इजाजत अनिवार्य होती है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को मेडिकल बोर्ड का गठन कर महिला के गर्भ की जांच कराने और उसकी सीलबंद रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
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पीजीआई के मेडिकल बोर्ड द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि गर्भ में पल रहा शिशु डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रसित है। अगर वह पैदा हुआ तो शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम रह जाएगा और सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा। इस रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को तत्काल महिला का गर्भपात करने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।