{"_id":"631da96ea1cfec577b2c61aa","slug":"punjab-haryana-high-court-asked-center-how-person-who-cannot-vote-can-be-given-the-right-to-contest-elections","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का सवाल: जिसे वोट देने का अधिकार नहीं, उसे चुनाव लड़ने का अधिकार कैसे? केंद्र को देना होगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का सवाल: जिसे वोट देने का अधिकार नहीं, उसे चुनाव लड़ने का अधिकार कैसे? केंद्र को देना होगा जवाब
Sun, 11 Sep 2022 02:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 11 Sep 2022 02:55 PM IST
सार
याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि दोषी करार दिए गए और सजा पाने वाले किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसा न करना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि जो व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता उसे चुनाव लड़ने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है। गणेश खेमका ने जनहित याचिका के माध्यम से यह मुद्दा हाईकोर्ट के समक्ष उठाया है।
याचिका में खेमका ने कहा कि किसी भी अपराध के दोषी और सजा पाने वाले सभी लोगों को चुनाव लडने के लिए अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। फिलहाल यह प्रावधान है कि जिस व्यक्ति को सजा मिलती है उसका वोट डालने का अधिकार तो छिन जाता है लेकिन वह चुनाव लड़ सकता है। केंद्र सरकार ने 2013 में जनप्रतिनिधि एक्ट में संशोधन कर ऐसा प्रावधान कर दिया कि दोषी करार व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता लेकिन चुनाव लड़ जरूर सकता है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि दोषी करार दिए गए और सजा पाने वाले किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसा न करना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि कैसे अपराध करने वालों को वोट डालने का अधिकार नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ने का है। साथ ही एक्ट में संशोधन करने को जिन आधार पर चुनौती दी गई है उस पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई पर इस बारे में केंद्र सरकार को उनका पक्ष रखना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका में खेमका ने कहा कि किसी भी अपराध के दोषी और सजा पाने वाले सभी लोगों को चुनाव लडने के लिए अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। फिलहाल यह प्रावधान है कि जिस व्यक्ति को सजा मिलती है उसका वोट डालने का अधिकार तो छिन जाता है लेकिन वह चुनाव लड़ सकता है। केंद्र सरकार ने 2013 में जनप्रतिनिधि एक्ट में संशोधन कर ऐसा प्रावधान कर दिया कि दोषी करार व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता लेकिन चुनाव लड़ जरूर सकता है।
विज्ञापन
याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि दोषी करार दिए गए और सजा पाने वाले किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसा न करना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि कैसे अपराध करने वालों को वोट डालने का अधिकार नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ने का है। साथ ही एक्ट में संशोधन करने को जिन आधार पर चुनौती दी गई है उस पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई पर इस बारे में केंद्र सरकार को उनका पक्ष रखना होगा।
विज्ञापन
सहजधारी सिखों के मताधिकार को खत्म करने पर एसजीपीसी से मांगा जवाब
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव में सहजधारी सिखों के मताधिकार को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सिख गुरुद्वारा एक्ट में 2016 में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।सहजधारी सिख पार्टी ने 2017 में याचिका दाखिल करते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन को चुनौती दी थी। सितंबर 2019 में हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके बाद कोरोना के कहर के चलते याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब याचिका सुनवाई के लिए पहुंची तो हाईकोर्ट ने एसजीपीसी को फिर से इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश जारी किया है।