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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court asked administration to reply on privatization of Chandigarh Electricity department

चंडीगढ़ बिजली विभाग का निजीकरण: हाईकोर्ट का यूटी प्रशासन से सवाल... नीति को अधिसूचित किए बिना कैसे शुरू की निजीकरण की प्रक्रिया 

Tue, 29 Mar 2022 04:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 29 Mar 2022 04:09 PM IST
सार

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 17 अप्रैल, 2020 को बिजली विभाग के निजीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे थे। 5 जून, 2020 को याचिकाकर्ता ने सुझाव देकर कहा था कि विभाग का काम अच्छा चल रहा है और इसके निजीकरण की आवश्यकता नहीं है।

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Punjab-Haryana High Court asked administration to reply on privatization of Chandigarh Electricity department
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण मामले में नीति की नोटिफिकेशन से पहले ही निजीकरण की तरफ बढ़ने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से जवाब तलब कर लिया है। सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही इस मामले में जवाब के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के वकील पेश हुए। उनके कुछ बोलने से पहले ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में जवाब चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ही देंगे। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर उन्हें हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि हलफनामा आने के बाद ही आगे निर्देश दिए जा सकते हैं। 

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यूटी पावरमैन यूनियन की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अश्वनी चोपड़ा ने अपनी दलील रखते हुए बताया कि जिस नीति के तहत निजीकरण होने जा रहा है वह तो अभी अधिसूचित ही नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि यदि निजीकरण करना ही है तो पुडुचेरी बिजली विभाग का करना चाहिए क्योंकि वह घाटे में है। चंडीगढ़ का बिजली विभाग लाभ में चल रहा है तो उसके निजीकरण की क्या जरूरत है। हाईकोर्ट ने इस पर जवाब मांगा तो प्रशासन ने इसके लिए मोहलत मांग ली। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई स्थगित कर दी। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हो गया कि प्रशासन ने यूनियन के साथ समझौता किया है जिसके तहत इस याचिका पर फैसला आने तक निजीकरण को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।

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यह है मामला

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 17 अप्रैल, 2020 को बिजली विभाग के निजीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे थे। 5 जून, 2020 को याचिकाकर्ता ने सुझाव देकर कहा था कि विभाग का काम अच्छा चल रहा है और इसके निजीकरण की आवश्यकता नहीं है। 10 जून, 2020 को केंद्र सरकार ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली विभाग के निजीकरण के लिए ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। यूनियन ने 6 जुलाई, 2020 को प्रधानमंत्री को मांग पत्र देकर विरोध दर्ज करवाया था। इसके बाद 17 जुलाई, 2020 को ऊर्जा सचिव को भी मांग पत्र सौंपा गया। इसके बाद जुलाई और फिर 2 सितंबर, 2020 को फिर मांग पत्र दिया गया। इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन ने 10 नवंबर, 2020 को एक पब्लिक नोटिस जारी कर शहर के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए निजी कंपनियों से बोली मंगवा ली। हाईकोर्ट निजीकरण की प्रक्रिया पर दो बार रोक लगा चुका है और यूटी प्रशासन की अपील पर सुप्रीम कोर्ट दो बार रोक हटा चुका है। अब निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर याचिका विचाराधीन है और प्रशासन व यूनियन के बीच समझौते के चलते याचिका लंबित रहने तक निजीकरण नहीं होगा।

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