{"_id":"5f0e825924145267983ee1ae","slug":"punjab-haryana-high-court-against-anticipatory-bail","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष को उत्पीड़न से बचाना है, इसे देने का ट्रेंड सही नहीं: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष को उत्पीड़न से बचाना है, इसे देने का ट्रेंड सही नहीं: हाईकोर्ट
Wed, 15 Jul 2020 09:43 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 15 Jul 2020 09:43 AM IST
सार
- हाईकोर्ट हर तरह के मामलों में नियमित रूप से अग्रिम जमानत देने पर सख्त
- कहा- केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जानी चाहिए अग्रिम जमानत
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष व्यक्तियों को उत्पीड़न से बचाना है और यह केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जानी चाहिए। लेकिन आजकल अग्रिम जमानत नियमित रूप से देना ट्रेंड बन गया है। इससे दोषी को कानून से बचने की ढाल मिल रही है, जो नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस मदान ने फरीदाबाद निवासी गगन इंदर सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची के खिलाफ एनआईटी फरीदाबाद में एक प्रसिद्ध सैलून की मालकिन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है, जिसके तहत उस पर मुकदमा दर्ज किया गया। सैलून मालकिन ने 15 जून को फरीदाबाद में बीपीटीपी पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं जिसने युवा महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना जांच एजेंसी को सही जांच से वंचित करना है, जो जांच पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा सेक्टर आठ की एक 63 वर्षीय महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस मदान ने फरीदाबाद निवासी गगन इंदर सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची के खिलाफ एनआईटी फरीदाबाद में एक प्रसिद्ध सैलून की मालकिन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है, जिसके तहत उस पर मुकदमा दर्ज किया गया। सैलून मालकिन ने 15 जून को फरीदाबाद में बीपीटीपी पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
विज्ञापन
बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं जिसने युवा महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना जांच एजेंसी को सही जांच से वंचित करना है, जो जांच पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा सेक्टर आठ की एक 63 वर्षीय महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
लड़की का आरोपित के साथ संबंध था
शिकायत के अनुसार, उसकी 39 वर्षीय बेटी अविवाहित थी और वह एनआईटी, फरीदाबाद के पास ब्यूटी पार्लर चला रही थी। शिकायत के अनुसार लड़की का आरोपित के साथ संबंध था और वह अक्सर उससे मिलती थी। 15 जून को बेटी के दोस्त ने सूचित किया कि वह आत्महत्या करने जा रही है। जब तक महिला बीपीटीपी पुल पर पहुंची, तब तक बेटी पुल से कूद कर जान दे चुकी थी।
आरोपी और उसके परिवार को ठहराया था जिम्मेदार
पुलिस को दिए अपने बयान में शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि उसकी बेटी ने अपने दोस्त के नंबर पर एक संदेश भेजा था कि उसकी मौत के लिए आरोपी और उसका परिवार जिम्मेदार है। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले फरीदाबाद की स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 29 जून को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इसलिए अब याची ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
आरोपी और उसके परिवार को ठहराया था जिम्मेदार
पुलिस को दिए अपने बयान में शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि उसकी बेटी ने अपने दोस्त के नंबर पर एक संदेश भेजा था कि उसकी मौत के लिए आरोपी और उसका परिवार जिम्मेदार है। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले फरीदाबाद की स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 29 जून को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इसलिए अब याची ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।