सिख कैदियों की रिहाई के लिए SC पहुंची पंजाब सरकार
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पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से प्रदेश की जेलों में बंद उम्रकैदियों के रिहाई संबंधी आवेदनों पर विचार करने और उन पर फैसला लेने की इजाजत मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के उम्रकैदियों को माफी देने संबंधी अधिकार पर रोक लगा रखी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन कैदियों की रिहाई के मुद्दे पर काफी गंभीर हैं। राज्य सरकार ने 8 जनवरी को अपने वकील जगजीत सिंह छाबड़ा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर किया है।
कानून की नजर से ऐसे कई मामले हैं, जिनमें उम्रकैदी माफी के योग्य हैं लेकिन अदालती आदेश की वजह से पंजाब सरकार संबंधित केसों पर विचार नहीं कर सकती और न ही इन्हें आगे राज्यपाल को भेजा जा सकता है।
कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए पंजाब सरकार के वकील ने कहा है कि अदालत पंजाब सरकार को उम्रकैदियों के इन आवेदनों पर विचार करने और फैसला लेने की आज्ञा दे, जो कानून के तहत अग्रिम रिहाई प्राप्त करना चाहते हैं। इस वक्त पंजाब की जेलों में 182 ऐसे उम्रकैदी हैं जो अग्रिम रिहाई से संबंधित न्यूनतम कैद काट चुके हैं।
पिछले साल लगाई गई थी सुप्रीम कोर्ट ने रोक
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 432 व 433 के अधीन पंजाब सरकार के पास कैदियों को माफी देने संबंधी प्रभुसत्ता संपन्न शक्ति है।
उम्र कैदी को माफी के आधार पर अग्रिम रिहाई के लिए इसका प्रयोग किया जाता है लेकिन 9 जुलाई, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने इस शक्ति के प्रयोग पर रोक लगा दी थी। इसलिए राज्य सरकार को यह आवेदन दायर करना पड़ा है।