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किसानों को कर्ज से उबारने के लिए सरकार ने शुरू की विशेष कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Jul 2016 12:46 PM IST
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सीएम बादल
- फोटो : amar ujala
आए दिन हो रही सुसाइड के मामलों को देखते हुए सरकार ने कर्ज से किसानों को उबारने के लिए विशेष कवायद शुरू की है। सरकार ने पंजाब सेटलमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इनडेटनेस बिल का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसी साल मार्च में हुए सेशन के दौरान विधानसभा में यह बिल पास किया गया था। ऐसा एक्ट लाने वाला पंजाब देश का पहला राज्य है। सरकार ने किसानों को गैर बैंक कर्ज से छुटकारा दिलाने के लिए एक्ट का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इसके साथ ही एक्ट के तहत राज्य और जिला स्तर पर बनने वाले फोरम गठित करने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। सरकार 15 अगस्त से पहले सारी प्रक्रिया पूरी करना चाहती है, क्योंकि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए सरकार की कोशिश है कि 15 जुलाई तक जिलास्तरीय फोरम गठित कर दिए जाएं। उसके बाद राज्यस्तरीय फोरम भी गठित हो जाए। जिलास्तरीय फोरम के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके चेयरमैन रिटायर्ड जिला व सेशन जज या एडिशनल जिला व सेशन जज होंगे। जबकि मेंबरों में एक आढ़ती और एक किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे।
वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को राज्यस्तरीय फोरम का चेयरमैन बनाया जाए। इसमें भी एक-एक किसान व आढ़ती प्रतिनिधि होंगे। जिलास्तरीय फोरम बनने के बाद जिलों की अदालतों में चल रहे कर्ज से संबंधित सभी केस फोरम को ट्रांसफर हो जाएंगे। यह फोरम 15 लाख तक के कर्ज की सुनवाई कर सकेंगे। इनके फैसले के खिलाफ राज्यस्तरीय फोरम में अपील की जा सकेगी।
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कर्ज देने वालों के लिए भी होंगे नियम
इस एक्ट के तहत रकम कर्ज के रूप में देने वालों के लिए भी नियम बनाए गए हैं। उन्हें पासबुक जारी करनी होगी, जिसमें कर्ज की रकम और किसान की ओर से लौटाई राशि दर्ज करना जरूरी होगा। हालांकि अभी तक ब्याज दर पर सभी पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है।
पंजाब सेटलमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इनडेटनेस बिल का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। अगले हफ्ते बैठक बुलाई गई है, जिसमें जिला अदलतों में चल रहे केसों को फोरम को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
- तोता सिंह, खेतीबाड़ी मंत्री, पंजाब
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इसके साथ ही एक्ट के तहत राज्य और जिला स्तर पर बनने वाले फोरम गठित करने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। सरकार 15 अगस्त से पहले सारी प्रक्रिया पूरी करना चाहती है, क्योंकि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए सरकार की कोशिश है कि 15 जुलाई तक जिलास्तरीय फोरम गठित कर दिए जाएं। उसके बाद राज्यस्तरीय फोरम भी गठित हो जाए। जिलास्तरीय फोरम के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके चेयरमैन रिटायर्ड जिला व सेशन जज या एडिशनल जिला व सेशन जज होंगे। जबकि मेंबरों में एक आढ़ती और एक किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को राज्यस्तरीय फोरम का चेयरमैन बनाया जाए। इसमें भी एक-एक किसान व आढ़ती प्रतिनिधि होंगे। जिलास्तरीय फोरम बनने के बाद जिलों की अदालतों में चल रहे कर्ज से संबंधित सभी केस फोरम को ट्रांसफर हो जाएंगे। यह फोरम 15 लाख तक के कर्ज की सुनवाई कर सकेंगे। इनके फैसले के खिलाफ राज्यस्तरीय फोरम में अपील की जा सकेगी।
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कर्ज देने वालों के लिए भी होंगे नियम
इस एक्ट के तहत रकम कर्ज के रूप में देने वालों के लिए भी नियम बनाए गए हैं। उन्हें पासबुक जारी करनी होगी, जिसमें कर्ज की रकम और किसान की ओर से लौटाई राशि दर्ज करना जरूरी होगा। हालांकि अभी तक ब्याज दर पर सभी पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है।
पंजाब सेटलमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इनडेटनेस बिल का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। अगले हफ्ते बैठक बुलाई गई है, जिसमें जिला अदलतों में चल रहे केसों को फोरम को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
- तोता सिंह, खेतीबाड़ी मंत्री, पंजाब