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जांच पड़तालः 500 सिखों को बेदखल करने के मामले में मध्य प्रदेश जाएगी पंजाब सरकार की टीम
Sat, 11 Jan 2020 10:22 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 11 Jan 2020 10:22 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातीय ब्लॉक से 500 सिखों को बेदखल करने के मामले की जांच के लिए पंजाब सरकार की टीम मध्य प्रदेश जाएगी। चिंता जाहिर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को इस मामले का पता लगाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश भेजने का फैसला किया और यह भी यकीनी बनाने को कहा कि बेदखल किये सिख बेघर न हों या उनको कोई परेशानी पेश न आए। कैप्टन ने इस मुद्दे पर टेलिफोन के जरिये मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से बातचीत की और उन्हें अपने फैसले की जानकारी भी दी।
पंजाब के राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के नेतृत्व में मध्य प्रदेश जाने वाली प्रतिनिधिमंडल में विधायक कुलदीप वैद और हरमिंदर सिंह गिल शामिल होंगे। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में कमिश्नर पटियाला डिविजन दीपिंदर सिंह, डायरेक्टर (लैंड रिकॉर्ड) कैप्टन करनैल सिंह, राजस्व कंसलटेंट नरिंदर सिंह संघा भी शामिल होंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन ने उन्हें 500 सिखों के पुनर्वास संबंधी वैकल्पिक प्रबंध करने की विनती की।
उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय जमीनी सुरक्षा और कानूनों के कारण अगर इन सिखों का उसी क्षेत्र में पुनर्वास करना संभव नहीं है, जहां वह पिछले दो दशकों से रह रहे हैं, तो उनके पुनर्वास के लिए उपयुक्त ज़मीन मुहैया करवाई जानी चाहिए। प्रवक्ता ने बताया कि कमलनाथ ने कैप्टन को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार यह यकीनी बनाने के लिए हरसंभव यत्न करेगी कि सिखों को उनका बनता हक मिले और उनको किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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यह समस्या मध्य प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और नाजायज कब्जों के खिलाफ मौजूदा मुहिम के नतीजे के तौर पर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि यह सिख शीओपुर जिले की करहल तहसील के नोटीफाईड कबीले के ब्लॉक में जमीन पर नाजायज कब्जा करके रह रहे थे, लेकिन वास्तव में पंजाब और हरियाणा के निवासी यह सिख इस जमीन पर नाजायज कब्जे करने के आरोपों से इन्कार करते हुए कहते हैं कि उन्होंने यह जमीन, कृषि प्लॉटों समेत नब्बे के दशक में खरीदी थी।
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पंजाब के राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के नेतृत्व में मध्य प्रदेश जाने वाली प्रतिनिधिमंडल में विधायक कुलदीप वैद और हरमिंदर सिंह गिल शामिल होंगे। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में कमिश्नर पटियाला डिविजन दीपिंदर सिंह, डायरेक्टर (लैंड रिकॉर्ड) कैप्टन करनैल सिंह, राजस्व कंसलटेंट नरिंदर सिंह संघा भी शामिल होंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन ने उन्हें 500 सिखों के पुनर्वास संबंधी वैकल्पिक प्रबंध करने की विनती की।
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उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय जमीनी सुरक्षा और कानूनों के कारण अगर इन सिखों का उसी क्षेत्र में पुनर्वास करना संभव नहीं है, जहां वह पिछले दो दशकों से रह रहे हैं, तो उनके पुनर्वास के लिए उपयुक्त ज़मीन मुहैया करवाई जानी चाहिए। प्रवक्ता ने बताया कि कमलनाथ ने कैप्टन को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार यह यकीनी बनाने के लिए हरसंभव यत्न करेगी कि सिखों को उनका बनता हक मिले और उनको किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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यह समस्या मध्य प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और नाजायज कब्जों के खिलाफ मौजूदा मुहिम के नतीजे के तौर पर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि यह सिख शीओपुर जिले की करहल तहसील के नोटीफाईड कबीले के ब्लॉक में जमीन पर नाजायज कब्जा करके रह रहे थे, लेकिन वास्तव में पंजाब और हरियाणा के निवासी यह सिख इस जमीन पर नाजायज कब्जे करने के आरोपों से इन्कार करते हुए कहते हैं कि उन्होंने यह जमीन, कृषि प्लॉटों समेत नब्बे के दशक में खरीदी थी।