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मोहाली मेयर पर पंजाब सरकार के आरोप, बोले- कई गुना मंहगे दाम पर खरीदीं मशीनें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:39 PM IST
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Mayor Kulwant Singh
- फोटो : File Photo
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मेयर कुलवंत सिंह द्वारा उन्हें हटाने के पंजाब सरकार के निर्णय को चुनौती देते हुए दाखिल की गई याचिका पर पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा कि सभी नियम ताक पर रख कुलवंत सिंह के इशारे पर छह से सात गुना महंगी मशीन खरीदी गई। इसके लिए न तो टेंडर मांगे गए और न मशीन का ट्रायल हुआ। हाईकोर्ट ने पंजाब के जवाब को रिकार्ड पर लेकर सुनवाई टाल दी।
सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से स्थानीय निकाय विभाग के अंडर सेक्रेटरी बलबीर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि रीच मूवर कम ट्री प्रूनिंग मशीन की खरीद का प्रस्ताव मेयर कुलवंत सिंह ने शुरू किया था। जिस कंपनी से मशीन की खरीद की गई उसने टेंडर जारी होने से पहले ही मशीन की खरीद के लिए आवेदन दे दिया था। निगम की ओर से कंपनी को बताया तक नहीं गया था कि किस प्रकार की मशीन की जरूरत है और न ही किसी विशेषज्ञ की सलाह ली गई। हाई कोर्ट को बताया गया कि मशीन की खरीद की यह भी शर्त थी कि उस मशीन का सर्विस सेंटर शहर के 50 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबकि इस मामले में ऐसा नहीं था।
खरीद तय होने के बाद प्रस्ताव आठ महीनों तक रोका गया ताकि निगम कमिश्नर का तबादला हो जाए। तबादला होते ही तुरंत सहमति ली गई और खरीद कर ली गई। इस मामले में तत्कालीन निगम कमिश्नर राजेश धीमान को चार्जशीट किया जा चुका है और एक्सईएन नरेश के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डीसीएफए विनायक को चार्जशीट कर निलंबित किया जा चुका है और एसीई मोहिंदर पाल और जेई सुरिंदर गोयल को भी चार्जशीट किया गया है। सरकार ने कहा कि मेयर ने याचिका में कई तथ्य छिपाए हैं और ऐसे में याचिका को रद्द किया जाए।
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सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से स्थानीय निकाय विभाग के अंडर सेक्रेटरी बलबीर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि रीच मूवर कम ट्री प्रूनिंग मशीन की खरीद का प्रस्ताव मेयर कुलवंत सिंह ने शुरू किया था। जिस कंपनी से मशीन की खरीद की गई उसने टेंडर जारी होने से पहले ही मशीन की खरीद के लिए आवेदन दे दिया था। निगम की ओर से कंपनी को बताया तक नहीं गया था कि किस प्रकार की मशीन की जरूरत है और न ही किसी विशेषज्ञ की सलाह ली गई। हाई कोर्ट को बताया गया कि मशीन की खरीद की यह भी शर्त थी कि उस मशीन का सर्विस सेंटर शहर के 50 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबकि इस मामले में ऐसा नहीं था।
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खरीद तय होने के बाद प्रस्ताव आठ महीनों तक रोका गया ताकि निगम कमिश्नर का तबादला हो जाए। तबादला होते ही तुरंत सहमति ली गई और खरीद कर ली गई। इस मामले में तत्कालीन निगम कमिश्नर राजेश धीमान को चार्जशीट किया जा चुका है और एक्सईएन नरेश के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डीसीएफए विनायक को चार्जशीट कर निलंबित किया जा चुका है और एसीई मोहिंदर पाल और जेई सुरिंदर गोयल को भी चार्जशीट किया गया है। सरकार ने कहा कि मेयर ने याचिका में कई तथ्य छिपाए हैं और ऐसे में याचिका को रद्द किया जाए।
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