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कच्चे कर्मियों के रेगुलराइजेशन पर लटकी तलवार, हाईकोर्ट ने पूछा- क्यों न पॉलिसी पर रोक लगा दें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Mar 2017 10:09 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
पंजाब सरकार की ओर से कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक और अस्थायी तौर पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहे कर्मियों को रेगुलर करने के लिए बनाया गया एक्ट अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निशाने पर है। यह एक्ट विधानसभा चुनाव से ऐन पहले दिसंबर माह में विस के विशेष सत्र में बनाया गया था।
हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इस नीति पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब हजारों कच्चे कर्मियों के रेगुलराइजेशन पर तलवार लटक गई है। केस की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
लुधियाना की अनिका गुप्ता और फतेहगढ़ साहिब के दीदार सिंह ने एडवोकेट आरएस बैंस के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक और अस्थायी तौर कर रहे कर्मियों को रेगुलर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 24 दिसंबर को विधानसभा में ‘द पंजाब एडहॉक, डेली वेज, टेंपरेरी, वर्क चार्जड एंड ऑउटसोर्स वेलफेयर एक्ट-2016’ बनाया है।
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हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इस नीति पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब हजारों कच्चे कर्मियों के रेगुलराइजेशन पर तलवार लटक गई है। केस की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
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लुधियाना की अनिका गुप्ता और फतेहगढ़ साहिब के दीदार सिंह ने एडवोकेट आरएस बैंस के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक और अस्थायी तौर कर रहे कर्मियों को रेगुलर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 24 दिसंबर को विधानसभा में ‘द पंजाब एडहॉक, डेली वेज, टेंपरेरी, वर्क चार्जड एंड ऑउटसोर्स वेलफेयर एक्ट-2016’ बनाया है।
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रेगुलराइजेशन पॉलिसी को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है याचिका
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
याची ने कहा कि यह एक्ट पूरी तरह से असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट के 2006 में उमा देवी केस में दिए गए निर्देशों के खिलाफ है। एक्ट विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बना ग्रुप-ए, बी, सी और डी सहित कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक और अस्थायी तौर पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहे हजारों कर्मियों को रेगुलर किए जाने को लेकर बनाया गया।
इसका उद्देश्य चुनाव में फायदा पाना था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सरकार ने ऐसा कर संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 का उल्लंघन किया है। संविधान में सभी को सामान अवसर का अधिकार दिया गया है। साथ ही इस एक्ट में आरक्षण के लिए भी कोई गुंजाइश नहीं रही है।
इस एक्ट के चलते कई युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसर बंद हो गए हैं। प्रत्येक राज्य में लोक सेवा आयोग का गठन किया जाता है, जिसका कार्य सरकारी पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा का आयोजन करना होता है। एक्ट के चलते एक तरह से राज्य में लोक सेवा आयोग की भूमिका को ही समाप्त किया जा रहा है। याची ने इस एक्ट को रद्द करने की अपील की है।
इसका उद्देश्य चुनाव में फायदा पाना था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सरकार ने ऐसा कर संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 का उल्लंघन किया है। संविधान में सभी को सामान अवसर का अधिकार दिया गया है। साथ ही इस एक्ट में आरक्षण के लिए भी कोई गुंजाइश नहीं रही है।
इस एक्ट के चलते कई युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसर बंद हो गए हैं। प्रत्येक राज्य में लोक सेवा आयोग का गठन किया जाता है, जिसका कार्य सरकारी पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा का आयोजन करना होता है। एक्ट के चलते एक तरह से राज्य में लोक सेवा आयोग की भूमिका को ही समाप्त किया जा रहा है। याची ने इस एक्ट को रद्द करने की अपील की है।