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पंजाब इंडस्ट्री को बिजली, पुरानी बढ़ोतरी का आधा बोझ उठाएगी सरकार

Wed, 20 Dec 2017 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 20 Dec 2017 09:37 AM IST
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Punjab government on electricity for industries
बिजली - फोटो : FILE PHOTO
इंडस्ट्री को सस्ती बिजली देने का वादा करके फंसी सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश के बाद मंगलवार शाम को कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मोहाली गेस्ट हाउस में मीटिंग करीब डेढ़ घंटे बैठक की। जिसमें उद्योगों की तीन प्रमुख मांगों पर विचार-विमर्श करने के बाद बीच का रास्ता निकाल लिया गया।
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इंडस्ट्री की सबसे पहली मांग थी कि बिजली दरें अप्रैल 2017 से लागू की गई हैं, इसमें उन्हें छूट दी जाए। अप्रैल से दिसंबर 2017 तक अतिरिक्त बिजली दरों से करीब छह सौ करोड़ का बोझ पड़ना है। सरकार इस बात पर राजी हो गई कि वह इसमें से आधा (300 करोड़) वहन करेगी।
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साथ ही इंडस्ट्री को यह राहत दी गई कि इस राशि को वह बारह महीनों में दे सकती है। दूसरा मुद्दा जिस पर पेंच फंसा था, कई उद्योगों को आशंका थी कि टू-पार्ट टैरिफ से उनका बिजली का बिल बहुत ज्यादा आ जाएगा। जिनमें खासतौर पर ऑटो मोबाइल और आईटी इंडस्ट्री शामिल हैं। सरकार ने इस बात पर सहमति जताई कि उनके लिए अधिकतम टैरिफ का एक कैप लगेगा।
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बिजली रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा निर्धारित अधिकतम दर से ज्यादा उनका बिल नहीं आ सकेगा। तीसरा मुद्दा पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली का था। जिसमें आखिरकार इस बात पर समझौता हुआ कि इंडस्ट्री को पांच रुपये के साथ रेगुलेरटरी अथॉरिटी द्वारा तय फिक्स्ड कॉस्ट देनी पड़ेगी। जिससे अब इंडस्ट्री को बिजली साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट के करीब मिलेगी। जबकि, सरकार ने वादा पांच रुपये प्रति यूनिट का किया था। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सारे मुद्दे निपटने के बाद अब एक जनवरी से नई बिजली दरें लागू होने की पूरी तैयारी है।


वाक आउट करने लगे थे उद्यमी
बैठक में पूरे पंजाब से विभिन्न औद्योगिक संगठनों के करीब पचास प्रतिनिधि आए थे। सरकार ने जो वादे किए थे, उन पर खरा न उतरते देख कई उद्यमी नाराज हो गए। एक समय स्थिति ऐसी हो गई कि कई उद्यमी वाक आउट करके जाने लगे। तब पीएचडी चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के पदाधिकारियों ने बीचबचाव किया। आखिर में उद्यमियों की समझ में आ गया कि सरकार की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह बहुत ज्यादा रियायतें दे सके। ऐसे में जितना मिल रहा है, उतना ही लेकर विवाद निपटाने में ही बेहतरी है।
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