पेट्रोल पंपों पर लगेगी हाथ धोने वाली मशीन, लुधियाना से 200 मजदूर रवाना, बरनाला में 60 कश्मीरी फंसे
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कोरोना महामारी को रोकने के प्रयासों के तहत पंजाब सरकार ने पेट्रोल पंप प्रबंधकों और ऑपरेटरों को फीलिंग स्टेशनों को साफ, स्वच्छ और विषाणु मुक्त रखने के निर्देश जारी किए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि पेट्रोल पंप पर सिर्फ जरूरी स्टाफ की तैनाती की जाए या स्टाफ को शिफ्टों में बुलाया जाए। तेज बुखार/ खांसी/छींक/सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित कर्मचारी को स्वेच्छा से इसकी रिपोर्ट पेट्रोल पंप के मैनेजर को देनी चाहिए और डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
पेट्रोल पंप के मालिकों को जारी सलाह के अनुसार, वह स्टाफ और आने वाले ग्राहक के लिए पैर से चलने वाली हाथ धोने की मशीन का बंदोबस्त करें। सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए हाथ धोने की मशीनों के आगे निर्धारित दूरी के मुताबिक घेरे लगाए जाए, ताकि कम से कम 1 मीटर की दूरी बरकरार रखी जा सके। अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर पेट्रोल पंप उपलब्ध हो। इस दौरान कपड़े का मास्क पहनना भी अनिवार्य है।
शाहपुर कंडी डैम का निर्माण कार्य शुरू
शाहपुर कंडी डैम का निर्माण कार्य गुरुवार को कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ शुरू कर दिया गया। यह निर्माण कार्य लॉकडाउन के चलते रोक दिया गया था। इस मौके पर प्रमुख सचिव (जल स्रोत) ए. वेनू प्रसाद मौजूद रहे। राष्ट्रीय स्तर का यह डैम प्रोजेक्ट पंजाब सरकार द्वारा 2700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से रावी नदी पर बनाया जा रहा है।
डैम के मुकम्मल होने से जहां पाकिस्तान की तरफ जाने वाला पानी का बहाव कम हो जाएगा, वहीं इसका पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों राज्यों को फायदा होगा। प्रवक्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री और जल स्रोत मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल को जारी दिशा-निर्देशों के बाद जिला प्रशासन पठानकोट को इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की संभावना तलाशने के आदेश दिए थे।
जिला प्रशासन ने स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसने मंगलवार को मौके का जायजा लिया और पाया कि डैम वाली जगह पर ही शेडों में मजदूर ठहरे हुए हैं। इसके अलावा प्रवेश का एक ही रास्ता है, जिसे बैरीकेड किया हुआ है। इसके बाद निर्माण शुरू करने की हरी झंडी दी गई।
गांव लौटने के लिए कश्मीरियों ने सौंपा ज्ञापन
बरनाला में फंसे 60 कश्मीरियों ने अपने गांव जाने के लिए सहायक कमिश्नर रविंदर सिंह अरोड़ा को ज्ञापन सौंपकर उनके गांव जाने का बंदोबस्त करने की गुहार लगाई। इस अवसर पर रशीद गोजरी, इम्तयाज गोजरी, अबदुल अहमद, जावेद अहमद, नजीर अहमद व मोहम्मद रमजान ने कहा कि उन्हें बरनाला में फंसे एक माह से अधिक हो गया है। जबकि परिवार जम्मू कश्मीर में हैं, जिनकी उनको चिंता हो रही है व उनके पास जाना चाहते हैं लेकिन जम्मू कश्मीर की सरकार न जाने क्यों उनको बुलाने का कोई प्रयास नहीं कर रही।
वह कई बार जिला प्रबंधकीय अधिकारियों को मिलकर उनको अवगत भी करवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनको राशन नहीं मिलने के कारण भी बेहद परेशान होना पड़ रहा है। सिविल प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा। जबकि पुलिस प्रशासन की तरफ से एसएसपी संदीप गोयल उनकी मदद जरूर करके गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक गांव जाने का कोई बंदोबस्त नहीं होता तब तक उनको जिला प्रशासन राशन का प्रबंध करे।
अबोहर से भी यूपी-बिहार जाने को तैयार हैं प्रवासी मजदूर
राजस्थान सहित अन्य राज्यों में फंसे पंजाब के मजदूरों को वापस लाए जाने के बाद अब अबोहर में फंसे उत्तर प्रदेश और बिहार आदि राज्यों के मजदूरों ने भी जिला प्रशासन से उनके राज्यों तक पहुंचाने की मांग उठाई है। स्थानीय श्रीगंगानगर रोड मोहल्ला जसवंत नगर व आसपास क्षेत्रों में रहने वाले यह मजदूर शादी विवाह में कैटरिंग व वेटर आदि का कार्य करते हैं, जबकि कुछ मजदूर पत्थर रगड़ाई व रंग रोगन करने वाले हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने उन्हें अपने-अपने घरों तक पहुंचाने का प्रबंध न किया तो वे भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं।
यूपी के जिला बहराइच, बलरामपुर, रायबरेली, आजमगढ़ और श्रावस्ती आदि से आकर पिछले कई वर्षों से यहां मजदूरी करने वाले बिलायती राम, लक्ष्मण, सोमनाथ, रामखिलावन, श्याम सिंह, सुनील, संतराम, प्रेमदास, विनोद, सियाराम, मनोज, जगमोहन, सुरजीत, रमेश तथा बालेश्वर आदि ने बताया कि उनके मोहल्ले में करीब 100 मजदूर पिछले कई वर्षों से शहर में किराए पर रहकर शादी विवाह में कैटरिंग, वेटर व पत्थर आदि की रगड़ाई का कार्य करते हैं।
इसी तरह बिहार के लोग भी काम न मिलने से फंस गए हैं। लॉकडाउन के कारण कारोबार बंद हो गया है। इन लोगों का कहना है कि अगर जुलाई अगस्त तक कोरोना संक्रमण का प्रभाव रहता है तो शादी आदि में भीड़ एकत्रित करने पर अगले कई महीनों तक पाबंदी रह सकती है। ऐसे में भविष्य में उनका कारोबार चलने की संभावना नहीं है।
लुधियाना में प्रवासियों का पलायन जारी
प्रदेश चाहे इंडस्ट्री खोलने में राहत देने की बात हो या फिर कंस्ट्रक्शन साइट चला कर सैकड़ों मजदूरों को रोजगार देने के दावे हो लेकिन असलियत यह है कि पंजाब से प्रवासियों का पलायन लगातार जारी है। बुधवार को रात लगभग 10:30 बजे लुधियाना के शेरपुर चौक से लगभग 200 प्रवासी लोग यूपी के लिए पैदल निकल चुके हैं।
इसमें जालंधर और लुधियाना दोनों शहरों के प्रवासी मजदूर शामिल थे। हैरानी की बात है कि इसमें कुछ प्रवासी अपने पूरे परिवार को साथ लेकर पैदल निकले। साथ में बच्चे भी थे। प्रवासी मजदूरों के लगातार पलायन के पीछे एक ही कारण बताया जा रहा है भूख। अगर यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में औद्योगिक शहर लुधियाना में कारोबारियों को मजदूरों के लाले पड़ सकते हैं।