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आंदोलनरत किसानों से बात करेगी पंजाब सरकार, मंत्रियों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित

Sun, 11 Oct 2020 01:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 11 Oct 2020 01:18 PM IST
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Punjab Government Formed a three member committee to talk with Farmers
पंजाब में किसानों का आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

कृषि कानूनों को लेकर रेलवे ट्रैक पर बैठे किसानों को मनाने के लिए पंजाब सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसमें तीनों कैबिनेट स्तर के मंत्रियों को शामिल किया गया है। कमेटी में शामिल कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया सरकार की ओर से किसानों से बातचीत करेंगे। साथ ही उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर कैप्टन से चर्चा की जाएगी।

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पंजाब में किसान आंदोलन को लगभग 16 दिन हो गए हैं। सड़कों के साथ ही रेलवे ट्रैक पर भी किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए जमे हुए हैं। इसमें महिलाएं भी किसानों का साथ दे रही हैं। रेलवे ट्रैक बंद होने के कारण राज्य में कोयले के साथ ही अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई नहीं हो पा रही है। कोयले की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण राज्य के थर्मल प्लांटों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। 
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कुछ थर्मल प्लांट बंद हो गए हैं और कुछ कोयले के अभाव में बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। राज्य में बिगड़ते हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री भी किसानों से बाधित रेलवे ट्रैक को खोलने की अपील कर चुके हैं। अब सरकार किसानों से बातचीत करने जा रही है, इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है। इसमें तीनों कैबिनेट मंत्रियों को शामिल किया गया है।

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प्लांटों में खत्म होने लगा है कोयला

सरकार ने कोयले के स्टॉक की स्थिति को गंभीर करार दिया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एनपीएल के पास 6.05 दिनों के लिए 1.05 लाख मीट्रिक टन कोयला स्टॉक, 2.79 दिनों के लिए टीएसपीएल 93,949 मीट्रिक टन, 0.62 दिनों के लिए जीवीके 4341, 6.16 दिनों के लिए जीजीएसटीटीपी रोपड़ 85,618 की आपूर्ति है और जीएचटीपी लेहरा मोहब्बत 59,143, 4.22 दिनों के लिए कोयला बचा हुआ है।

यूरिया: जरूरत है 13.5 लाख टन, है सिर्फ 1.7 लाख टन
किसानों के विरोध प्रदर्शन के एक हिस्से के रूप में रेलवे यातायात का व्यवधान राज्य के यूरिया और डीएपी की भी कमी होने लगी है। सूबे में यूरिया की वर्तमान आवश्यकता 13.5 लाख टन है, जबकि अब तक की उपलब्धता  केवल 1.7 लाख टन है। इसी तरह, डीएपी की 6 लाख मीट्रिक टन आवश्यकता के अनुरूप इसकी उपलब्धता अभी सिर्फ 4.6 लाख मीट्रिक टन है। किसान के आंदोलन के कारण खाद्यान्नों की आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे 10 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न प्रभावित हुआ है।

दिल्ली-मुरादाबाद में फंसा बारदाना
दिल्ली और मुरादाबाद में 24,480 बारदाना फंसा हुआ है। जिसमें 22800 राज्य एजेंसियों और 1680 एफसीआई का है। कोलकाता से भेजी जाने वाली बारदाना की 7480 आपूर्ति भी फंसने की संभावना है। राज्य में पहले से ही बारदाना की कमी है। बारदाना नहीं मिलने से तरनतारन, मानसा, फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों में स्थिति प्रभावित होगी।

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