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शराब विवाद से लड़खड़ाने लगी पंजाब सरकार, कैप्टन के अपने ही मंत्री और विधायकों ने खोला मोर्चा

Fri, 15 May 2020 01:36 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 15 May 2020 01:36 AM IST
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Punjab government, Excise policy, Congress minister and MLA, Curfew in Punjab
सांकेतिक तस्वीर।

मुख्य सचिव और मंत्रियों के बीच आबकारी नीति को लेकर छिड़ा विवाद अब पंजाब में शराब के कारोबार में राज्य सरकार को निरंतर हो रहे घाटे की तरफ मुड़ गया है। मुख्य सचिव को हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पर दबाव बना रहे राज्य के कांग्रेसी मंत्री और विधायक अब घाटे के कारणों की जांच की मांग करने लगे हैं। 

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जाहिर है, मंत्री-विधायकों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने का नया रास्ता ढूंढ लिया है। हालांकि इन मंत्री-विधायकों के सुर बगावती नहीं हैं, इसलिए मुख्यमंत्री या राज्य की कांग्रेस सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है। शराब का यह कारोबार पूरी सरकार को लड़खड़ाता दिखाई दे रहा है। 
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गुरुवार को राज्यसभा सदस्य और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान शमशेर सिंह दूलो ने भी कर्फ्यू-लॉकडाउन के दौरान राज्य में खुलेआम शराब की सप्लाई और तीन साल के दौरान शराब पर राजस्व घाटे की जांच सीबीआई या पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मौजूदा जज से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कई सालों से खन्ना के निकट एक डिस्टलरी चलती रही। 

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यह किसके इशारे पर हुआ, जिससे पंजाब को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई। इसकी जांच होनी चाहिए कि आखिर इस धांधली के पीछे कौन है। दूलो ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री को खन्ना के निकट चल रही अवैध डिस्टलरी के मालिकों को जनता के सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनेताओं, पुलिस और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से ही अवैध शराब की सप्लाई होती है। दूलो ने इस मामले में लापरवाही का ठीकरा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर ही फोड़ा है।

दूलो से पहले, राज्य से वह सभी मंत्री जो मुख्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ने भी शराब के राजस्व घाटे की जांच की मांग उठाई है। सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक राजा वड़िंग तो मुख्यमंत्री को लगातार ट्वीट कर इस मामले में दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कैबिनेट मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, सांसद प्रताप सिंह बाजवा, विधायक संगत सिंह गिलजियां, राजकुमार वेरका, कुलबीर जीरा, जोगिंदर पाल, बरिंदर सिंह पाहड़ा खुलकर पूरे मामले की जांच की मांग करने लगे हैं।

हालांकि इन सभी के निशाने पर मुख्य सचिव करन अवतार सिंह ही हैं लेकिन उनके द्वारा बनाया जा रहा दबाव अपनी ही सरकार के खिलाफ अधिक दिखाई देने लगा है। इस बीच, मुख्यमंत्री की ओर से न तो मंत्रियों की जांच की मांग पर और न ही मुख्य सचिव पर किसी एक्शन के अब तक संकेत दिए गए हैं। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस आलाकमान में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जो पैठ है, उन्हें किसी तरह का तरह का खतरा नहीं है। मंत्री और विधायक कुछ दिन मुद्दा उछाल सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी तरह की लॉबिंग करने में सक्षम नहीं हैं। 

जहां तक मुख्य सचिव करन अवतार सिंह का सवाल है, माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने इस पसंदीदा अफसर की रिटायरमेंट सम्मानजनक तरीके से ही कराएंगे। दूसरी ओर, मंत्रियों द्वारा अपनी ही सरकार के दौरान हुई अनियमितता की जांच की मांग उठाने से विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा हाथ लग गया है। विपक्षी दलों ने इस मामले को शराब के अवैध कारोबार में हिस्से की लड़ाई की संज्ञा दी है और मुख्यमंत्री को इस अवैध कारोबार के लिए कठघरे में खड़ा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

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