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Punjab: हाईकोर्ट की फटकार के बाद बैकफुट पर पंजाब सरकार, दो दिन में वापस होगी पंचायतें भंग करने की अधिसूचना
Thu, 31 Aug 2023 11:34 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:34 AM IST
सार
पंजाब सरकार ने 10 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को भंग कर दिया था। तय समय से पहले पंचायतें भंग करने के मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता गुरजीत सिंह तलवंडी ने जनहित याचिका दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी थी।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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विस्तार
कार्यकाल पूरा होने से पहले पंचायतें भंग करने को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की फटकार और कड़े रुख के बाद पंजाब सरकार ने बैकफुट पर आते हुए इस अधिसूचना को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिसके लिए हाईकोर्ट ने दो दिन की मोहलत दी है। हालांकि सरकार ने हाईकोर्ट में इसका कारण प्रशासनिक अधिकारियों की बाढ़ राहत कार्यों में व्यस्तता को दिया है। अधिसूचना वापस लेने की जानकारी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने गुरुवार को इसके खिलाफ सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
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पंजाब में तय समय से पहले पंचायतें भंग करने को अकाली नेता गुरजीत सिंह तलवंडी ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में अधिसूचना को अवैध, मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए कहा गया था कि कार्यकाल पूरा होने से पहले चुने गए प्रतिनिधियों से उनका हक नहीं छीना जा सकता।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई आरंभ होते ही पंजाब सरकार ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में बाढ़ के हालात बने हुए हैं और अधिकारी राहत कार्यों में जुटे हैं। ऐसे में इन्हें पंचायतों के प्रशासक की जिम्मेदारी देना जनहित में नहीं है। सरकार ने निर्णय लिया है कि पंचायतें भंग करने का निर्णय वापस लिया जाएगा और तय समय पर ही चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे। हाईकोर्ट ने अब सरकार को आदेश दिया है कि दो दिन के भीतर इस अधिसूचना को वापस लिया जाए।
हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच के समक्ष पंचायतों के फंड सीज करने के मुद्दे पर दोपहर बाद सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि पंचायतें भंग करने की अधिसूचना से जुड़े जितने भी निर्णय हैं वे वापस ले लिए जाएंगे। ऐसे में पंचायतों के सीज किए फंड भी विकास कार्यों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस जानकारी के बाद संबंधित बेंच ने इन याचिकाओं का भी निपटारा कर दिया।
सरकार पर उठाए थे सवाल
हाईकोर्ट ने मंगलवार को पंचायतें भंग करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा था कि क्या कोई सर्वे करने के बाद यह निर्णय लिया गया था। कैसे खुद के नियम बनाकर सरकार इस प्रकार का फैसला लेकर चयनित प्रतिनिधियों से शक्तियां वापस ले सकती है। प्रदेश में बाढ़ के हालात बने हैं और ऐसे में क्यों पंचायतों के फंड को सीज कर उन्हें इस्तेमाल करने से रोक दिया गया।