Punjab News: सीएम भगवंत मान ने बताया अरबी घोड़ों का पता, अकाली दल बोला- सुना रहे मनोहर कहानियां
अरबी घोड़े का मुद्दा पंजाब की राजनीति में छाया है। सीएम भगवंत मान ने कुछ दिन पहले ही इसका जिक्र चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान किया था।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के अरबी घोड़ों से जुड़े सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल सीमा से लगते उत्तर प्रदेश में फार्म हाउस है, उसी फार्म हाउस पर ये घोड़े हैं।
वहीं, अकाली दल ने कहा कि सीएम मनोहर कहानियां सुनाकर समय पास कर रहे हैं, क्योंकि सरकार हर फ्रंट पर फेल रही है। इससे पहले मजीठिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट अपलोड कर कहा कि सीएम साहिब पक्के हिल गए हैं। पहले वह कहते थे कि सुरजीत सिंह मजीठिया ने 1957 में इस्तीफा दिया था। अब वह कहते हैं कि इस्तीफा देने के बाद उन्हें नेपाल का अंबेसडर बनाया गया था।
भारत सरकार का रिकॉर्ड है। इसमें लिखा है कि सुरजीत सिंह मजीठिया 1947 से 1949 तक नेपाल के अंबेसडर रहे। 1952 से 1962 तक मंत्री रहे और कभी इस्तीफा नहीं दिया। फिर 1957 में इस्तीफे की बात कहां से आई। भारत सरकार की लोकसभा की वेबसाइट पर यह जानकारी उपलब्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उन पर टिप्पणी की है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
दरअसल, कुछ दिन पहले चंडीगढ़ में एक समागम में मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 1957 में भारत में मतदान हुए तो उस मौके पर जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। उनके नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अरब मुल्कों के दौरे पर गया था। इस प्रतिनिधिमंडल में बिक्रम सिंह मजीठिया के पूर्वजों में तत्कालीन उप-रक्षा मंत्री सुरजीत सिंह मजीठिया भी शामिल थे।
अरब मुल्क के एक राजा ने भारतीय फौज के लिए याद के तौर पर अरबी नस्ल के शानदार घोड़े तोहफे में दिए थे। ये घोड़े प्रशिक्षण के लिए फौज के प्रशिक्षण केंद्र मेरठ भेजे जाने थे, जहां फौज में शामिल जानवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। दो महीने बाद अरबी राजा ने घोड़ों की हालत के बारे पता किया तो पता लगा कि वह घोड़े मेरठ में पहुंचे ही नहीं। इसके बाद राजा ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पास नाराजगी जाहिर की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर नेहरू ने तुरंत सुरजीत सिंह मजीठिया का इस्तीफा ले लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना ने सिखों के सच्चे किरदार पर सवाल खड़े किए। यह बहुत दुख की बात है कि आज भी जब कोई दस्तारधारी सिख मेरठ के प्रशिक्षण केंद्र में जाता है तो उसे घोड़ा चोर के नजरिए से देखा जाता है।