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कैप्टन ने सभी समागमों पर लगाई रोक, डीजीपी बोले- 200 जमाती प्रदेश में लौटे, 12 जिले हो सकते प्रभावित
Fri, 03 Apr 2020 09:36 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 03 Apr 2020 09:36 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में हिस्सा लेने के लिए पंजाब से 200 लोग गए थे। ये सभी वापस लौट आए हैं। इन जमातियों के कारण राज्य के 12 जिले प्रभावित होने की आशंका है। इनकी तलाश की जा रही है और अब तक 73 लोगों की शिनाख्त की जा चुकी है। यह खुलासा गुरुवार को पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने किया। इस बीच, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य में धार्मिक समागमों सहित हर तरह के भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगा दी है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी तरह के भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाएगी, भले ही वे किसी भी धर्म से संबंधित हों। अमरिंदर ने कहा कि आगामी बैसाखी के त्योहार को देखते हुए वे निजी तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार साहिबान से बात करेंगे, जबकि मुख्य सचिव को यह मामला शिरोमणि कमेटी के समक्ष उठाने को कहा है।
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जमातियों को 21 दिन के एकांतवास में भेजने के आदेश
कैप्टन ने उन सभी को 21 दिन के एकांतवास में भेजने के आदेश दिए, जो इस निजामुद्दीन से वापस लौटे हैं। इसके अलावा पुलिस व प्रशासन के अफसरों को निर्देश दिया कि वे विशेष टीमों का गठन कर निजामुद्दीन से लौटे लोगों को ढूंढ निकालें और उनकी सेहत पर नजर रखें। कैप्टन ने पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूदा हालात की समीक्षा की।
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तब्लीगी जमात के लिए पंजाब आए बाहरी लोगों का भी पता नहीं
डीजीपी दिनकर गुप्ता के अनुसार, अलग-अलग समय पर पंजाब से 200 व्यक्ति निजामुद्दीन गए और वापस लौटे थे। इस तरह 12 जिलों के प्रभावित होने की आशंका है। उन्हें ढूंढने के अलावा अन्य प्रदेशों के व्यक्तियों को भी ढूंढा जा रहा है, जो तब्लीगी जमात के काम से पंजाब आए थे। फिलहाल इनमें से कोरोना प्रभावित कोई केस सामने नहीं आया है।
सेहत विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विभाग को अब तक निजामुद्दीन से लौटे 125 जमातियों की सूची मिली है, जिनमें से 73 का पता चला है। उनमें 25 के सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से कुछ लोग 19 मार्च को मानसा आए थे। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर इन सभी को क्वारंटीन कर दिया गया है।
निजामुद्दीन से लौटे 31 लोग एकांतवास में
कपूरथला के डीसी ने मुख्यमंत्री को बताया कि निजामुद्दीन से लौटे 31 लोगों को एकांतवास में रखा गया है। हालांकि उनमें से अभी तक किसी में कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। पटियाला में भी 29 लोगों को एकांतवास में रखा गया है लेकिन उनमें भी कोई लक्षण नहीं मिले हैं। संगरूर के जिला पुलिस प्रमुख ने बताया कि निजामुद्दीन से लौटे जिन लोगों को नाम उन्हें मिले हैं, उन सभी को ढूंढ लिया गया है और उनके सैंपले जांच के लिए भेजे गए हैं।
अमृतसर में पाक नागरिकों को भी एकांतवास में भेजा
डीजीपी दिनकर गुप्ता से सुझाव पर कैप्टन ने अमृतसर में ठहरे पाकिस्तानी नागरिकों को भी एकांतवास में भेजने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस नाजुक समय में प्रदेश कोई रिस्क उठाने की स्थिति में नहीं है। अमृतसर के डीसी ने बताया कि पाकिस्तान ने दिल्ली से लौटे अपने नागरिकों में से चार को ही पाकिस्तान आने की इजाजत दी है, जिनमें से तीन पाजिटिव हैं। उन्होंने बताया कि इन पाकिस्तानी नागरिकों से बीएसएफ और इमीग्रेशन के जिन अधिकारियों का वास्ता पड़ा था, उन्हें भी एकांतवास में रखा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ पाकिस्तानी अभी अमृतसर में ही फंसे हैं।
प्रवासी मजदूरों के ठहरने की व्यापक व्यवस्था की
अमृतसर के डीसी ने बैठक में बताया कि जिले में प्रवासी मजदूरों का मसला बड़ा नहीं है क्योंकि इनमें से अधिकतर ट्रांसपोर्ट, रेलवे व अन्य विभागों में काम कर रहे हैं। जिनके पास काम नहीं है, उनके लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। पठानकोट के डीसी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 111 प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं और मैरिज पैलेसों व अन्य स्थानों पर ठहराया गया है। इनमें तीन लोगों को बुखार व खांसी के चलते एकांतवास में रखा गया है।
लुधियाना के डीसी ने कहा कि लुधियाना में 5.25 लाख प्रवासी मजदूरों के लिए 60 कैंप बनाए गए हैं हालांकि इनमें से केवल दो का ही इस्तेमाल शुरु हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों को लगातार भोजन दिया जा रहा है। गुरदासपुर के डीसी ने बताया कि राधास्वामी भवन उपलब्ध हैं लेकिन उनके जिले में प्रवासी मजदूर ईंट-भट्टा मालिकों के पास ही रह रहे हैं जहां वे काम कर रहे हैं। तरन तारन में प्रवासी मजदूरों के रहने के लिए चार केंद्र खोले गए हैं।
1330 एनआरआई गायब थे, अब जमाती भी ढूंढने होंगे
उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलने के बाद पंजाब लौटे एनआरआईज में से 1330 को राज्य पुलिस तलाश कर रही है। यह लोग स्वास्थ्य जांच से बचने के लिए छिपे हुए हैं और चिंताजनक यह है कि अगर इनमें कोई बीमार हुआ तो वह बाकी लोगों के लिए जानलेवा बन सकता है। राज्य पुलिस इनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी कि अब उसे 127 जमातियों और पंजाब में तब्लीगी जमात के लिए आए अन्य राज्यों के लोगों (जिनकी संख्या का पता नहीं है) की भी तलाश करनी होगी।
अमृतसर में पाक नागरिकों को भी एकांतवास में भेजा
डीजीपी दिनकर गुप्ता से सुझाव पर कैप्टन ने अमृतसर में ठहरे पाकिस्तानी नागरिकों को भी एकांतवास में भेजने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस नाजुक समय में प्रदेश कोई रिस्क उठाने की स्थिति में नहीं है। अमृतसर के डीसी ने बताया कि पाकिस्तान ने दिल्ली से लौटे अपने नागरिकों में से चार को ही पाकिस्तान आने की इजाजत दी है, जिनमें से तीन पाजिटिव हैं। उन्होंने बताया कि इन पाकिस्तानी नागरिकों से बीएसएफ और इमीग्रेशन के जिन अधिकारियों का वास्ता पड़ा था, उन्हें भी एकांतवास में रखा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ पाकिस्तानी अभी अमृतसर में ही फंसे हैं।
प्रवासी मजदूरों के ठहरने की व्यापक व्यवस्था की
अमृतसर के डीसी ने बैठक में बताया कि जिले में प्रवासी मजदूरों का मसला बड़ा नहीं है क्योंकि इनमें से अधिकतर ट्रांसपोर्ट, रेलवे व अन्य विभागों में काम कर रहे हैं। जिनके पास काम नहीं है, उनके लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। पठानकोट के डीसी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 111 प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं और मैरिज पैलेसों व अन्य स्थानों पर ठहराया गया है। इनमें तीन लोगों को बुखार व खांसी के चलते एकांतवास में रखा गया है।
लुधियाना के डीसी ने कहा कि लुधियाना में 5.25 लाख प्रवासी मजदूरों के लिए 60 कैंप बनाए गए हैं हालांकि इनमें से केवल दो का ही इस्तेमाल शुरु हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों को लगातार भोजन दिया जा रहा है। गुरदासपुर के डीसी ने बताया कि राधास्वामी भवन उपलब्ध हैं लेकिन उनके जिले में प्रवासी मजदूर ईंट-भट्टा मालिकों के पास ही रह रहे हैं जहां वे काम कर रहे हैं। तरन तारन में प्रवासी मजदूरों के रहने के लिए चार केंद्र खोले गए हैं।
1330 एनआरआई गायब थे, अब जमाती भी ढूंढने होंगे
उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलने के बाद पंजाब लौटे एनआरआईज में से 1330 को राज्य पुलिस तलाश कर रही है। यह लोग स्वास्थ्य जांच से बचने के लिए छिपे हुए हैं और चिंताजनक यह है कि अगर इनमें कोई बीमार हुआ तो वह बाकी लोगों के लिए जानलेवा बन सकता है। राज्य पुलिस इनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी कि अब उसे 127 जमातियों और पंजाब में तब्लीगी जमात के लिए आए अन्य राज्यों के लोगों (जिनकी संख्या का पता नहीं है) की भी तलाश करनी होगी।