{"_id":"5b10dce34f1c1bf56e8b5a8b","slug":"punjab-cabinet-meeting-may-2018","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कैबिनेट मीटिंगः पंजाब में वित्तीय धोखाधड़ी अब गैर जमानती अपराध, पढ़ें 10 अन्य फैसले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैबिनेट मीटिंगः पंजाब में वित्तीय धोखाधड़ी अब गैर जमानती अपराध, पढ़ें 10 अन्य फैसले
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jun 2018 11:13 AM IST
विज्ञापन
पंजाब कैबिनेट मीटिंग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने वित्तीय कंपनियों द्वारा लोगों से की जाने वाली धोखाधड़ी को गैर-जमानती अपराध का दर्जा दे दिया है। इसके तहत 10 साल की सजा और संपत्तियां जब्त करने का प्रावधान कर दिया है।
बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने वीरवार को ‘द पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रस्ट ऑफ डिपॉजिटर’ (इन फाइनेंशियल इस्टैबलिशमेंट) बिल-2018 को मंजूरी दे दी। इसके तहत यदि वित्तीय कंपनी द्वारा जमा राशि निश्चित समय पर लोगों को वापस नहीं की जाती या किसी तरह का धोखा किया जाता है तो कंपनी के मालिकों, मैनेजरों और कंपनी के कर्मचारियों को 10 वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
इसके अलावा वित्तीय कंपनी को भी 2 लाख रुपये से एक करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा वित्तीय कंपनी को अपने कारोबार संबंधी तिमाही रिपोर्ट सरकार द्वारा नोटीफाई किए अफसर को देनी होगी। जानकारी न देने की सूरत में एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने वीरवार को ‘द पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रस्ट ऑफ डिपॉजिटर’ (इन फाइनेंशियल इस्टैबलिशमेंट) बिल-2018 को मंजूरी दे दी। इसके तहत यदि वित्तीय कंपनी द्वारा जमा राशि निश्चित समय पर लोगों को वापस नहीं की जाती या किसी तरह का धोखा किया जाता है तो कंपनी के मालिकों, मैनेजरों और कंपनी के कर्मचारियों को 10 वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
विज्ञापन
इसके अलावा वित्तीय कंपनी को भी 2 लाख रुपये से एक करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा वित्तीय कंपनी को अपने कारोबार संबंधी तिमाही रिपोर्ट सरकार द्वारा नोटीफाई किए अफसर को देनी होगी। जानकारी न देने की सूरत में एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
विज्ञापन
बेघर फ्रीडम फाइटर्स और तीन लाख आय वालों को मकान
कैप्टन अमरिंदर सिंह
कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सूबे के बेघर स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवारों और तीन लाख से कम सालाना आय वाले बेघर परिवारों को ग्रामीण आवास योजना के तहत घर देने का फैसला किया है। उनके लिए एक ही शर्त होगी कि वह जिस गांव में मकान बनाना चाहते है, उस गांव के स्थायी निवासी होने चाहिए।
संयुक्त परिवारों में रह रहे विवाहित बेघर जिनका अपना अलग बिजली का कनेक्शन या राशन कार्ड हो, इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य होंगे। इसके तहत लाभपात्री को राज्य सरकार द्वारा 1.20 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इसके अलावा मनरेगा स्कीम से इसे जोड़कर 90 दिनों की मजदूरी मकान निर्माण के लिए दी जाएगी।
मकान के साथ 12 हजार रुपये की लागत से एक शौचालय मनरेगा/स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाया जाएगा। मकान लगभग 25 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का होगा, जिसमें एक कमरा, एक रसोई और एक शौचालय होगा। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (जी) के अधीन आने वाले लाभपात्रों, जिनकी आय 1.20 लाख से 3 लाख रुपए तक सालाना होगी, उनके लिए मकान का फंड उपलब्ध करवाया जाएगा।
संयुक्त परिवारों में रह रहे विवाहित बेघर जिनका अपना अलग बिजली का कनेक्शन या राशन कार्ड हो, इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य होंगे। इसके तहत लाभपात्री को राज्य सरकार द्वारा 1.20 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इसके अलावा मनरेगा स्कीम से इसे जोड़कर 90 दिनों की मजदूरी मकान निर्माण के लिए दी जाएगी।
मकान के साथ 12 हजार रुपये की लागत से एक शौचालय मनरेगा/स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाया जाएगा। मकान लगभग 25 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का होगा, जिसमें एक कमरा, एक रसोई और एक शौचालय होगा। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (जी) के अधीन आने वाले लाभपात्रों, जिनकी आय 1.20 लाख से 3 लाख रुपए तक सालाना होगी, उनके लिए मकान का फंड उपलब्ध करवाया जाएगा।
पंजाब उच्च शिक्षा काउंसिल के गठन संबंधी अध्यादेश मंजूर
अमरिंदर सिंह
पंजाब कैबिनेट ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की जरूरतों के अंतर्गत पंजाब उच्च शिक्षा काउंसिल गठित करने के अध्यादेश को मंजूर करने सहित कई अहम फैसले लिए हैं।
सूबे में वित्तीय धोखाधड़ी को गैर जमानती अपराध का दर्जा देने के अलावा कैबिनेट ने वीरवार को हुई बैठक में बेघर स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवारों और 3 लाख से कम आय वाले बेघरों को मकान दिलाने, एससी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के लिए निजी शैक्षिक संस्थाओं को फंड जारी करने, और खनन व्यवसाय से राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से खदानों की अब प्रोग्रेसिव बोली की विधि अपनाने की मंजूरी दे दी।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री इस काउंसिल के चेयरमैन होंगे जबकि उच्च शिक्षा मंत्री उप-चेयरमैन और प्रशासनिक सचिव उच्च शिक्षा इसके सदस्य सचिव होंगे। कमेटी में राज्य की सरकारी यूनिवर्सिटियों के उपकुलपति, सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल, कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सभ्याचार और उद्योग आदि के क्षेत्र में प्रसिद्ध योगदान डालने वाले व्यक्ति शामिल किए जाएंगे।
काउंसिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा का योजनाबद्ध विकास करना, उच्च शिक्षा के संस्थानों की गुणवत्ता यकीनी बनाना, यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों के पास मौजूद संसाधनों की अनुसंधान गतिविधियों के लिए साझेदारी करवाना, कालेजों का अकादमिक और प्रशासकीय सुधार, निगरानी, मूल्यांकन और फंडिग संबंधी नियम बनाना है।
सूबे में वित्तीय धोखाधड़ी को गैर जमानती अपराध का दर्जा देने के अलावा कैबिनेट ने वीरवार को हुई बैठक में बेघर स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवारों और 3 लाख से कम आय वाले बेघरों को मकान दिलाने, एससी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के लिए निजी शैक्षिक संस्थाओं को फंड जारी करने, और खनन व्यवसाय से राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से खदानों की अब प्रोग्रेसिव बोली की विधि अपनाने की मंजूरी दे दी।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री इस काउंसिल के चेयरमैन होंगे जबकि उच्च शिक्षा मंत्री उप-चेयरमैन और प्रशासनिक सचिव उच्च शिक्षा इसके सदस्य सचिव होंगे। कमेटी में राज्य की सरकारी यूनिवर्सिटियों के उपकुलपति, सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल, कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सभ्याचार और उद्योग आदि के क्षेत्र में प्रसिद्ध योगदान डालने वाले व्यक्ति शामिल किए जाएंगे।
काउंसिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा का योजनाबद्ध विकास करना, उच्च शिक्षा के संस्थानों की गुणवत्ता यकीनी बनाना, यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों के पास मौजूद संसाधनों की अनुसंधान गतिविधियों के लिए साझेदारी करवाना, कालेजों का अकादमिक और प्रशासकीय सुधार, निगरानी, मूल्यांकन और फंडिग संबंधी नियम बनाना है।
विधायकों के लिए एक्सग्रेशिया अनुदान बढ़ा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
कैबिनेट ने विधायकों के लिए एक्सग्रेशिया अनुदान एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख करने के लिए ‘‘दी पंजाब स्टेट लेजिसलेचर मेंबर नियम, 1984 की धारा 10-ए (1) में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस फैसले के मुताबिक यदि पंजाब विधानसभा के मेंबर की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को पांच लाख रुपये का एक्सग्रेशिया अनुदान मुहैया करवाया जाएगा।
नायब तहसीलदार (बी) सेवा नियम मंजूर
कैबिनेट ने पंजाब नायब तहसीलदार (ग्रुप बी) सेवा नियम-2018 को भी मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार नायब तहसीलदार के पद, जोकि मौजूदा पंजाब नायब तहसीलदार सेवा नियम 1984 के अनुसार दर्जा तीन का पद है, अब ग्रुप बी का पद होगा। इसके साथ अब नायब तहसीलदार ग्रुप-बी सेवा नियम बनाए जाने हैं।
इस समय नायब तहसीलदार का पद दर्जा-3 का पद होने के कारण इसके नियुक्ति कर्ता अधिकारी संबधित मंडलों के कमिश्नर हैं। यह पद ग्रुप बी में आ जाने के कारण नये रूलों की रचना के बाद इसके नियुक्ति कर्ता और अपीलीय अधिकारी वित्तीय कमिश्नर राजस्व होंगे और समर्थ अथॉरिटी राजस्व मंत्री होंगे।
वार्षिक रिपोर्टों को मंजूरी
कैबिनेट ने पंजाब बिल्डिंग और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 की वार्षिक लेखा रिपोर्टों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने कानून के अंतर्गत, इन रिपोर्टों को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी है। इसी तरह मंत्रिमंडल ने रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग की वर्ष 2015 -16 की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है।
नायब तहसीलदार (बी) सेवा नियम मंजूर
कैबिनेट ने पंजाब नायब तहसीलदार (ग्रुप बी) सेवा नियम-2018 को भी मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार नायब तहसीलदार के पद, जोकि मौजूदा पंजाब नायब तहसीलदार सेवा नियम 1984 के अनुसार दर्जा तीन का पद है, अब ग्रुप बी का पद होगा। इसके साथ अब नायब तहसीलदार ग्रुप-बी सेवा नियम बनाए जाने हैं।
इस समय नायब तहसीलदार का पद दर्जा-3 का पद होने के कारण इसके नियुक्ति कर्ता अधिकारी संबधित मंडलों के कमिश्नर हैं। यह पद ग्रुप बी में आ जाने के कारण नये रूलों की रचना के बाद इसके नियुक्ति कर्ता और अपीलीय अधिकारी वित्तीय कमिश्नर राजस्व होंगे और समर्थ अथॉरिटी राजस्व मंत्री होंगे।
वार्षिक रिपोर्टों को मंजूरी
कैबिनेट ने पंजाब बिल्डिंग और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 की वार्षिक लेखा रिपोर्टों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने कानून के अंतर्गत, इन रिपोर्टों को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी है। इसी तरह मंत्रिमंडल ने रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग की वर्ष 2015 -16 की वार्षिक प्रशासकीय रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है।
राजस्व बढ़ाने को खदानों की प्रगतिशील बोली का फैसला
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
सुप्रीम कोर्ट में एक प्रमुख लड़ाई जीतने के बाद पंजाब सरकार ने प्रगतिशील बोली के जरिए खनन के ठेके देने का फैसला किया है। इससे सरकार के राजस्व में बड़ा इजाफा होने और अवैध खनन रुकने की संभावना जताई गई है।
इस महीने के शुरू में सुप्रीम कोर्ट ने खदानों की रिवर्स बोली की जगह प्रोग्रेसिव बोली करने के राज्य सरकार के फैसले को मंजूरी दी है। इसके चलते सभी खनन सरगर्मियां तुरंत रोके जाने के आदेश दिए हैं और ठेकेदारों को खनन वाले स्थानों से अपनी मशीनरी हटाने के लिए निर्देश दिए थे। इससे खदानें फिर राज्य सरकार के पास बोली के लिए आने का रास्ता साफ हुआ है।
पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप का पैसा जारी करने का फैसला
कैबिनेट ने वजीफों के वितरण में चल रही वित्तीय जांच के मद्देनजर एससी विद्यार्थियों को कोई मुश्किल न आए, इसलिए पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के अंतर्गत प्राईवेट शैक्षिक संस्थाओं को फंड जारी करने को मंजूरी दे दी है। लेकिन इसके साथ ही कैबिनेट ने वजीफा राशि में धांधली के मामलों में पैसा 9 प्रतिशत के दंड ब्याज के साथ वसूलने के आदेश भी दे दिए हैं।
कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि जायज वजीफा राशि जारी करने से शैक्षिक संस्थाओं की आडिट रिपोर्ट में अनियमितताएं पाई गई तो आपराधिक /सिविल कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित विभाग द्वारा डिफाल्टर शैक्षिक संस्थाओं के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाई शुरू करने के लिए कल्याण विभाग को अपेक्षित मानवीय शक्ति मुहैया करवाई जाएगी।
इस महीने के शुरू में सुप्रीम कोर्ट ने खदानों की रिवर्स बोली की जगह प्रोग्रेसिव बोली करने के राज्य सरकार के फैसले को मंजूरी दी है। इसके चलते सभी खनन सरगर्मियां तुरंत रोके जाने के आदेश दिए हैं और ठेकेदारों को खनन वाले स्थानों से अपनी मशीनरी हटाने के लिए निर्देश दिए थे। इससे खदानें फिर राज्य सरकार के पास बोली के लिए आने का रास्ता साफ हुआ है।
पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप का पैसा जारी करने का फैसला
कैबिनेट ने वजीफों के वितरण में चल रही वित्तीय जांच के मद्देनजर एससी विद्यार्थियों को कोई मुश्किल न आए, इसलिए पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के अंतर्गत प्राईवेट शैक्षिक संस्थाओं को फंड जारी करने को मंजूरी दे दी है। लेकिन इसके साथ ही कैबिनेट ने वजीफा राशि में धांधली के मामलों में पैसा 9 प्रतिशत के दंड ब्याज के साथ वसूलने के आदेश भी दे दिए हैं।
कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि जायज वजीफा राशि जारी करने से शैक्षिक संस्थाओं की आडिट रिपोर्ट में अनियमितताएं पाई गई तो आपराधिक /सिविल कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित विभाग द्वारा डिफाल्टर शैक्षिक संस्थाओं के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाई शुरू करने के लिए कल्याण विभाग को अपेक्षित मानवीय शक्ति मुहैया करवाई जाएगी।