पंजाब कैबिनेट: विधायकों के बेटों के बाद पंजाब सरकार ने दी मंत्री के दामाद को नौकरी, फैसले के विरोध में कई मंत्री
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि राजस्व मंत्री गुरप्रीत के दामाद को ईटीओ की नौकरी देने के लिए सभी नियमों को हवा में उड़ा दिया गया। कांगड़ ने साबित कर दिया कि कांग्रेस पार्टी की घर घर नौकरी योजना मंत्रियों के परिवार के सदस्यों और कांग्रेस विधायकों और नेताओं तक ही सीमित थी। यह उन लाखों युवाओं या पंजाब के साथ भी मजाक है, जिन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भरोसा किया था।
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पंजाब कैबिनेट ने अनुकंपा के आधार पर कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत कांगड़ के दामाद गुरशेर सिंह को अनुकंपा के आधार पर बतौर आबकारी एवं कराधान इंस्पेक्टर नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। हालांकि कैबिनेट ने यह भी कहा कि इस फैसले को एक ही बार दी गई राहत समझा जाएगा और इस मामले को प्रथा नहीं बनाया जाएगा। यह फैसला लेते ही प्रदेश सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई।
अकाली दल और आप ने जहां मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए तो वहीं कैप्टन की कैबिनेट के कई मंत्रियों ने भी इस फैसले पर ऐतराज जताया है। दो मंत्रियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस तरह नौकरी दिया जाना सही नहीं है। गुरशेर की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है और वह करोड़पति परिवार के संबंधित हैं। इन मंत्रियों ने कहा कि जरूरतमंद आवेदकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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कैबिनेट ने इससे पहले दो कांग्रेस विधायकों फतेहजंग बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को नौकरी देते समय भी ऐसा ही कहा था। दूसरी ओर, गुरप्रीत कांगड़ ने भी अपने दामाद को नौकरी दिलाने के लिए पिछले साल आवेदन किया था लेकिन कार्मिक विभाग ने गुरशेर के परिवार की आर्थिक स्थिति और अनुकंपा आधार पर नौकरी देने के नियमों का हवाला देते हुए नौकरी देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद जब सरकार ने विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को नौकरी दी तो कांगड़ ने एक बार फिर से अपने दामाद की नौकरी के लिए फाइल आगे बढ़ा दी।
10 साल पहले हुआ था गुरशेर के पिता का निधन
शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरशेर के पिता भुपजीत ने रवि सिद्धू के समय हुए पीपीएससी घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पंजाब लोक सेवा आयोग में पारदर्शिता लाने में अहम भूमिका निभाई थी। भुपजीत सिंह, आबकारी एवं कराधान विभाग में आबकारी व कर अधिकारी के तौर पर तैनात थे। उनका 28 सितंबर, 2011 को निधन हो गया था। उस समय गुरशेर सिंह ने कॉमर्स में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी ही की थी। दफ्तरी रिकार्ड के अनुसार, भुपजीत सिंह की पत्नी जसबीर कौर ने 26 जून, 2020 को दिए आवेदन द्वारा (अपने पति की मौत से 8 साल बाद) विनती की थी कि उनके पुत्र गुरशेर सिंह को नौकरी दी जाए।
नियम के अनुसार, एक साल के भीतर आवेदन जरूरी
नवंबर 21, 2002 की सरकारी नीति और दिसंबर 28, 2005 को एक पत्र के जरिए किए गए संशोधन के मुताबिक, मृतक कर्मचारी /अधिकारी के वारिसों के लिए मौत की तारीख से एक साल के अंदर नौकरी के लिए आवेदन देना जरूरी होता है।
तीन साल पहले जुड़ा है रिश्ता: कांगड़
कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत कांगड़ ने अपने रसूख से दामाद गुरशेर को नौकरी दिलाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि भुपजीत सिंह के परिवार के उनका रिश्ता तीन साल पहले ही जुड़ा है और गुरशेर को नौकरी का मामला 10 साल पुराना है। कांगड़ ने कहा कि गुरशेर सिंह को अनुकंपा के आधार पर दी गई नौकरी नियमानुसार है और इसके लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया।
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नौकरी को लेकर पूरे प्रदेश में बेरोजगार युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री के दामाद को अनुकंपा के आधार पर नौकरी कैप्टन साहब ने दे दी लेकिन जो रोजगार के लिए सड़कों पर हैं उन पर तरस नहीं खा रहे हैं। पंजाब के लोगों के साथ यह सरासर नाइंसाफी है। हरपाल सिंह चीमा, नेता प्रतिपक्ष, पंजाब।
यह फैसला न्यायोचित नहीं है। इससे पहले भी पंजाब में हजारों लोग आतंकवाद के दौर में अपनी जान गंवा चुके हैं लेकिन सरकार ने उन्हे कोई नौकरी नहीं दी। फिर मंत्रियों और विधायकों के परिजनों को कैप्टन कैसे नौकरी दे सकते हैं। सुभाष शर्मा, महामंत्री, भाजपा, पंजाब।