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Punjab: विधानसभा स्पीकर ने राज्यपाल को भेजा विशेष सत्र का एजेंडा, केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव का जिक्र नहीं
Fri, 16 Jun 2023 10:34 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 16 Jun 2023 10:34 AM IST
सार
दो दिवसीय सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रस्तावों में, डीजीपी की नियुक्ति में केंद्र सरकार का दखल कम करने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस एक्ट-2007 में संशोधन और राज्य में सक्रिय चिट फंड कंपनियों की धांधली रोकने के लिए दोषियों को न्यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान किए जाने संबंधी संशोधन प्रस्ताव प्रमुख हैं।
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पंजाब विधानसभा
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने राज्य सरकार की ओर से 19 व 20 जून के दो दिवसीय सत्र के लिए उपलब्ध कराया गया एजेंडा राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को भेज दिया है। खास बात यह है कि इसमें केंद्र सरकार के खिलाफ पेश किए जाने वाले ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र नहीं किया गया है, जिसमें राज्य सरकार केंद्र द्वारा विभिन्न योजनाओं की बकाया राशि न दिए जाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का एलान कर चुकी है।
क्या रहेगा दो दिन के सत्र में
राज्यपाल ने बुधवार को दो दिवसीय सत्र का एजेंडा उपलब्ध कराने को कहा था। इस बीच दो दिवसीय सत्र के कार्यक्रम के अनुसार, 19 जून को दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि के साथ होगी। ढाई बजे से सदन में विधायी कामकाज होगा। इसमें विभिन्न प्रस्ताव पेश किए जाएंगे और उन पर चर्चा होगी। 20 जून को सदन की कार्यवाही सुबह 10 बजे विधायी कामकाज के साथ ही शुरू होगी। सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने संबंधी नियम 16 के तहत प्रस्ताव के साथ स्थगित हो जाएगी।
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सत्रावसान राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर
19 व 20 जून को बुलाया जा रहा पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय सत्र गत 22 फरवरी बुलाए गए बजट सत्र का ही हिस्सा है। दरअसल, राज्य सरकार ने 22 मार्च को बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद इसका सत्रावसान अब तक नहीं किया था। इस संबंध में निर्धारित नियमों के अनुसार संविधान के नियम 174 के तहत छह माह के अंतराल पर विधानसभा का दूसरा सत्र बुलाया जा सकता है, लेकिन किसी भी सत्र के सत्रावसान के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और यह राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर है। हालांकि, सत्र के दौरान पारित प्रस्ताव को लागू करने के लिए उसे कानूनी रूप, सत्रावसान के बाद ही दिया जा सकता है।
विवाद से शुरू हुआ सत्र, अब तक विवादों में
पंजाब सरकार की ओर से इस साल 22 फरवरी को बुलाया गया पंजाब विधानसभा का बजट सत्र विवाद के साथ ही शुरू हुआ था। इसमें राज्य सरकार अपने पक्ष में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती थी, जिसे लेकर विपक्ष ने सांविधानिक नियमों का हवाला देते हुए राज्यपाल ने सत्र बुलाने की अनुमति देने के बाद अपना फैसला बदलते हुए सत्र बुलाने पर रोक लगा दी थी।
राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के बजट सत्र का एजेंडा तलब कर लिया, जिसके आधार पर ही सत्र बुलाने की अनुमति देने की बात कही। इस पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों को उनकी प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए ऐसे मसले अपने स्तर पर हल करने की हिदायत भी दी गई। आखिरकार राज्यपाल ने सत्र बुलाने की अनुमति तो दे दी लेकिन बजट अभिभाषण में ''माई गवर्नमेंट'' कहकर सदन को संबोधित करने से मना कर दिया। इस पर सदन में ही हंगामा हुआ और सदन के नेता व मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट जाने की चुनौती दे डाली कि अभिभाषण को मंत्रिमंडल की ओर से मंजूरी दी गई है और राज्यपाल को इसे अक्षरश: ही पढ़ना होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने राज्यपाल को जानकारी दिए बिना सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश कर पारित कराया।
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क्या रहेगा दो दिन के सत्र में
राज्यपाल ने बुधवार को दो दिवसीय सत्र का एजेंडा उपलब्ध कराने को कहा था। इस बीच दो दिवसीय सत्र के कार्यक्रम के अनुसार, 19 जून को दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि के साथ होगी। ढाई बजे से सदन में विधायी कामकाज होगा। इसमें विभिन्न प्रस्ताव पेश किए जाएंगे और उन पर चर्चा होगी। 20 जून को सदन की कार्यवाही सुबह 10 बजे विधायी कामकाज के साथ ही शुरू होगी। सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने संबंधी नियम 16 के तहत प्रस्ताव के साथ स्थगित हो जाएगी।
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यह भी पढ़ें: Punjab: पठानकोट में बनेगा NSG Center, पंजाब सरकार मुफ्त देगी 103 एकड़ जमीन, केंद्र को भेजा पत्र
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सत्रावसान राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर
19 व 20 जून को बुलाया जा रहा पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय सत्र गत 22 फरवरी बुलाए गए बजट सत्र का ही हिस्सा है। दरअसल, राज्य सरकार ने 22 मार्च को बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद इसका सत्रावसान अब तक नहीं किया था। इस संबंध में निर्धारित नियमों के अनुसार संविधान के नियम 174 के तहत छह माह के अंतराल पर विधानसभा का दूसरा सत्र बुलाया जा सकता है, लेकिन किसी भी सत्र के सत्रावसान के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और यह राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर है। हालांकि, सत्र के दौरान पारित प्रस्ताव को लागू करने के लिए उसे कानूनी रूप, सत्रावसान के बाद ही दिया जा सकता है।
विवाद से शुरू हुआ सत्र, अब तक विवादों में
पंजाब सरकार की ओर से इस साल 22 फरवरी को बुलाया गया पंजाब विधानसभा का बजट सत्र विवाद के साथ ही शुरू हुआ था। इसमें राज्य सरकार अपने पक्ष में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती थी, जिसे लेकर विपक्ष ने सांविधानिक नियमों का हवाला देते हुए राज्यपाल ने सत्र बुलाने की अनुमति देने के बाद अपना फैसला बदलते हुए सत्र बुलाने पर रोक लगा दी थी।
राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के बजट सत्र का एजेंडा तलब कर लिया, जिसके आधार पर ही सत्र बुलाने की अनुमति देने की बात कही। इस पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों को उनकी प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए ऐसे मसले अपने स्तर पर हल करने की हिदायत भी दी गई। आखिरकार राज्यपाल ने सत्र बुलाने की अनुमति तो दे दी लेकिन बजट अभिभाषण में ''माई गवर्नमेंट'' कहकर सदन को संबोधित करने से मना कर दिया। इस पर सदन में ही हंगामा हुआ और सदन के नेता व मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट जाने की चुनौती दे डाली कि अभिभाषण को मंत्रिमंडल की ओर से मंजूरी दी गई है और राज्यपाल को इसे अक्षरश: ही पढ़ना होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने राज्यपाल को जानकारी दिए बिना सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश कर पारित कराया।