फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab assembly elections 2017, Sad defeat reasons

पंजाब विस चुनावः 'आप' को तो अपने ही ले डूबे, गैरों में कहां दम था!

Sun, 12 Mar 2017 06:38 PM IST
दीपक यादव/अमर उजाला, चंडीगढ़
दीपक यादव/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Mar 2017 06:38 PM IST
विज्ञापन
Punjab assembly elections 2017, Sad defeat reasons
- फोटो : File Photo
सियासत की नदी का अजब है मंजर
विज्ञापन

डूब जाता काठ यहां तैरता है पत्थर

सियासी मैदान का यही सच है। पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम तो यही साबित कर रहा है। पंजाब की सत्ता पर दस वर्षों से काबिज शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन तीसरे स्थान पर रहा। प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ी आम आदमी पार्टी गठबंधन को पछाड़कर दूसरे स्थान पर रही। अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी को सूबे के मतदाताओं ने आक्सीजन देते हुए बहुमत के साथ सत्ता सौंप दी।

इस चुनाव में सभी दलों ने किसान आत्महत्या, नशा, युवा वर्ग को मुख्य मुद्दा बनाया। धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी का मामला भी गरमाया रहा। सभी पार्टियों ने चुनाव की तैयारियां काफी पहले ही शुरू कर दीं। कांग्रेस ने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) को हायर किया। राहुल गांधी ने पंजाब का दौरा कर नशे का मुद्दा उठाया। इसके बाद तो नशे के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया।
विज्ञापन


 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के चार सांसद जीते। इससे आप का मनोबल बढ़ा और पार्टी ने लोकसभा चुनाव के बाद से ही विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी। इसी कड़ी में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, संजय सिंह ने पंजाब के ताबड़तोड़ दौरे किए और नशे के मुद्दे को गरमाया। नशे के सौदागर कहने पर आप नेताओं पर मानहानि का मामला भी दर्ज हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

अति आत्मविश्वास ले डूबा गठबंधन सरकार

Punjab assembly elections 2017, Sad defeat reasons
इसी के साथ आप के प्रदेश कनवीनर रहे सुच्चा सिंह छोटेपुर पर कई आरोप लगे। हालात यह हुए छोटेपुर हाईकमान पर खुद को फंसाने का आरोप लगाते हुए पार्टी से अलग हो गए। छोटेपुर के अलग होते हुए पंजाबी बनाम बाहरी का मुद्दा गरमा गया। इसी दौरान मनीष सिसौदिया के अरविंद केजरीवाल भी सीएम हो सकते हैं, के बयान ने आग में घी का काम किया और पंजाबी बनाम बाहरी मुद्दा सूबे की सियासत जंगल में लगी आग की तरह फैलने लगा।

बचाव में आम आदमी पार्टी को यह एलान करना पड़ा कि सीएम कोई पंजाबी ही होगा। इसी कड़ी में पार्टी ने अपने सांसद भगवंत मान, दिल्ली से विधायक रहे जनरैल सिंह, गुरप्रीत सिंह घुग्गी को आगे किया। तब तक देर हो चुकी थी। लोकसभा चुनाव के साथ आप का बढ़ा ग्राफ गिरने लगा।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपना आखिरी चुनाव होने का एलान कर बड़ी सियासी चाल चल दी। पीके भी कैप्टन के लिए रणीनीति बनाने में जुट गए। काफी विद कैप्टन, पंजाब दा कैप्टन, चाय पर चर्चा नाम से अभियान शुरू किए। युवा वर्ग को लुभाने के लिए कैप्टन खुद कालेजों में गए और युवाओं से रूबरू होकर उनके तीखे सवालों के जवाब भी दिए। कुल मिलाकर कांग्रेस युवाओं को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रही। इसके अलावा नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में आने से पार्टी को टानिक मिली और ताकत बढ़ गई। सिद्धू के जुमलों ने मतदाताओं को पार्टी से जोड़ दिया।

वहीं शिअद-भाजपा गठबंधन के नेता जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में रहे और विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटते रहे। पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ने के लिए जनता ने गठबंधन को दोषी माना। किसान भी गठबंधन से दूर हो गया। बदसलूकी की घटनाओं ने पंथक वोट को भी शिअद से दूर कर दिया। नतीजन दस वर्ष से पंजाब की सत्ता पर काबिज गठबंधन को तीसरे स्थान पर खिसकना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed