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पंजाब में विस चुनाव की बिसात बिछी, दलित वोट बैंक टारगेट पर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 08 Apr 2016 09:02 PM IST
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बादल ने केजरीवाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : file photo
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 की चुनावी बिसात बिछ गई है। सभी पार्टियों का फोकस इस बार पंजाब के मजबूत दलित वोट बैंक पर है। चुनाव से पहले दलितों को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए सभी पार्टियां पूरी कोशिश में जुट गई हैं। शुक्रवार को भाजपा ने दोआबा के दलित नेता और केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला को प्रदेश प्रधानगी सौंप कर अपना दलित कार्ड खेला है, लेकिन दूसरी पार्टियां इससे पहले ही दलितों को अपने हक में करने की कवायद शुरू कर चुकी हैं।
आम आदमी पार्टी केराष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल एकाएक स्व. कांशीराम की बहन से मिलने उनके गांव पहुंच गए। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर डाली। उसकेबाद केजरीवाल जालंधर सिंह डेरा बल्लां गए, जोकि रविदास बिरादरी का सबसे प्रमुख स्थान है। कांग्रेस ने इससे भी पहले युवा दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया। चन्नी अभी काफी युवा हैं, उनके मुकाबले कई सीनियर कांग्रेसी इस पद के दावेदार थे।
पूर्व सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ का प्रदर्शन भी शानदार रहा था, लेकिन पार्टी ने चुनावी साल में दलित वोट बैंक को देखते हुए चन्नी को ही सीएलपी लीडर बनाया। इसके बाद गायक हंसराज हंस को शामिल कर दोआबा में अपना आधार मजबूत किया। फिर एक और दलित नेता शमशेर सिंह दूलो को राज्यसभा भेजा। अकाली दल भी लगातार दलितों को लुभाने के लिए एलान करता रहा है।
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हाल ही में सीएम प्रकाश सिंह बादल ने डॉ. अंबेडकर स्कॉलरशिप का एलान किया है। अंबेडकर जयंती पर कई गतिविधियां आयोजित करने की भी घोषणा की है। कुछ दिन पहले ही सीएम और डिप्टी सीएम ने खुरालगढ़ में श्री गुरु रविदास मेमोरियल का नींव पत्थर रखा। समागम में दलित समाज की कई दिग्गज शख्सीयतें शामिल हुईं।
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आम आदमी पार्टी केराष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल एकाएक स्व. कांशीराम की बहन से मिलने उनके गांव पहुंच गए। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर डाली। उसकेबाद केजरीवाल जालंधर सिंह डेरा बल्लां गए, जोकि रविदास बिरादरी का सबसे प्रमुख स्थान है। कांग्रेस ने इससे भी पहले युवा दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया। चन्नी अभी काफी युवा हैं, उनके मुकाबले कई सीनियर कांग्रेसी इस पद के दावेदार थे।
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पूर्व सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ का प्रदर्शन भी शानदार रहा था, लेकिन पार्टी ने चुनावी साल में दलित वोट बैंक को देखते हुए चन्नी को ही सीएलपी लीडर बनाया। इसके बाद गायक हंसराज हंस को शामिल कर दोआबा में अपना आधार मजबूत किया। फिर एक और दलित नेता शमशेर सिंह दूलो को राज्यसभा भेजा। अकाली दल भी लगातार दलितों को लुभाने के लिए एलान करता रहा है।
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हाल ही में सीएम प्रकाश सिंह बादल ने डॉ. अंबेडकर स्कॉलरशिप का एलान किया है। अंबेडकर जयंती पर कई गतिविधियां आयोजित करने की भी घोषणा की है। कुछ दिन पहले ही सीएम और डिप्टी सीएम ने खुरालगढ़ में श्री गुरु रविदास मेमोरियल का नींव पत्थर रखा। समागम में दलित समाज की कई दिग्गज शख्सीयतें शामिल हुईं।